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मोतिहारी। बिहार में पूर्वी चंपारण जिले की सत्र अदालत ने दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता को प्रताड़ित करने और आग से जलाकर उसकी हत्या किए जाने के मामले में आज मृतका के पति और ससुर को 14-14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। सोलहवीं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जटाशंकर मिश्र की अदालत ने केसरिया थाना क्षेत्र के राजपुर लाला टोला निवासी बंटी बैठा और उसके पुत्र राहुल बैठा को भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत दोषी ठहराया। मामला वर्ष 2020 का है। चकिया थाना क्षेत्र के मठिया वार्ड नंबर 15 निवासी संजय कुमार रजक ने एक अगस्त 2020 को केसरिया थाना कांड संख्या 308/2020 दर्ज कराया था। प्राथमिकी में उन्होंने अपने दामाद राहुल बैठा, समधी बंटी बैठा और समधीन लालमती को नामजद किया था। अभियोजन के अनुसार, संजय कुमार रजक की पुत्री राजकुमारी की शादी करीब सात वर्ष पूर्व राहुल बैठा से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज में मोटरसाइकिल और पांच लाख रुपये की मांग की जाने लगी। मांग पूरी नहीं होने पर राजकुमारी को प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाया गया। अस्पताल में पिता से कही थी पूरी बात 30 जुलाई 2020 को मायके वालों को सूचना मिली कि राजकुमारी आग से गंभीर रूप से झुलस गई है और उसे शहर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया है। पिता के अस्पताल पहुंचने पर राजकुमारी ने कथित तौर पर बताया कि दहेज की मांग को लेकर उसके पति, ससुर और सास ने उसे जान से मारने की नीयत से जला दिया। गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच, पटना रेफर कर दिया। इलाज के दौरान एक अगस्त 2020 को राजकुमारी की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने मामले में नामजद तीनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र समर्पित किया। सत्र वाद की सुनवाई के दौरान अभियुक्त लालमती की मृत्यु हो गई, जबकि पति राहुल बैठा और ससुर बंटी बैठा के विरुद्ध विचारण जारी रहा। छह गवाहों की हुई गवाही मामले की सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक ईश्वर चंद्र दुबे ने अभियोजन की ओर से छह गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत कराया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने बंटी बैठा और राहुल बैठा को दहेज हत्या के मामले में दोषी पाया। अदालत ने दोनों दोषियों को 14-14 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि कारागार में पूर्व में बिताई गई अवधि का समायोजन सजा की अवधि में किया जाएगा।