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पणजी। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज कहा कि केंद्र सरकार ने 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ का संकल्प लिया है और इसके लिए जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क तोड़ने, सिंथेटिक और प्रीकर्सर ड्रग्स पर रोक, मांग और नुकसान कम करने, पुनर्वास तथा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को केंद्र में रखा गया है। चार स्तंभों पर चलेगा तीन साल का मिशन श्री शाह ने रविवार को यहां नारकोटिक्स नियंत्रण पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2026 से 2029 तक नशे के खिलाफ लड़ाई को मिशन मोड में चलाया जाएगा। इस रोडमैप में समय-सीमाएं तय की गई हैं। अलग-अलग मंत्रालयों को जिम्मेदारी दी गई है और तिमाही समीक्षा के साथ परिणाम आधारित जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। यह रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों इंटेलिजेंस और ऑपरेशन आधारित प्रवर्तन, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, डिमांड एवं हार्म रिडक्शन तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय पर आधारित है। इसके तहत ड्रग्स के बड़े सरगनाओं के डोजियर तैयार करने, नेटवर्क के आगे और पीछे के लिंक तलाशने तथा व्यावसायिक मात्रा से जुड़े हर मामले की वित्तीय जांच करने की योजना है। ‘जैसे नक्सलवाद खत्म हुआ, वैसे ही ड्रग्स की समस्या भी खत्म करेंगे’ गृह मंत्री ने कहा कि जिस संकल्प के साथ देश में नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसी दृढ़ता से ड्रग्स की समस्या को भी खत्म किया जाएगा। ड्रग्स केवल अपराध नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा है और इसकी कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद में भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2019 के बाद नशे के खिलाफ लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बनाया और इसे अलग-अलग एजेंसियों की बिखरी कार्रवाई से निकालकर एक समन्वित राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया। 2004-14 के मुकाबले 2014-26 में ड्रग्स जब्ती कई गुना बढ़ने का दावा श्री शाह ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2004 से 2014 के बीच करीब 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए थे, जिनकी कीमत लगभग 40 हजार करोड़ रुपये थी, जबकि 2014 से 2026 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो गया, जिसकी कीमत करीब 1 लाख 89 हजार करोड़ रुपये बताई गई। उन्होंने यह भी कहा कि 2004 से 2014 के बीच 3 लाख 36 हजार किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए थे, जबकि 2014 से 2026 के बीच 48 लाख 68 हजार किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए। छोटी पुड़िया से लेकर बड़े जखीरे तक पूरी चेन की जांच गृह मंत्री ने कहा कि अब जांच का तरीका बदल दिया गया है। बॉटम-टू-टॉप और टॉप-टू-बॉटम दोनों तरह के दृष्टिकोण अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ड्रग्स की छोटी पुड़िया पकड़ी जाती है तो यह पता लगाया जाता है कि वह देश में कहां से आई, और यदि सीमा पर बड़ा जखीरा पकड़ा जाता है तो इसकी जांच की जाती है कि वह आखिर किस रास्ते से छोटे पैकेटों में बदलकर युवाओं तक पहुंचने वाला था। डार्क नेट, क्रिप्टो और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क पर भी नजर श्री शाह ने कहा कि ड्रग्स कारोबार में इस्तेमाल होने वाले डार्क नेट, एन्क्रिप्टेड संचार, क्रिप्टो लेन-देन और डेड ड्रॉप डिलीवरी के खिलाफ तकनीक आधारित जांच शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स में समर्पित डार्क नेट-क्रिप्टो सेल बनाने का काम भी शुरू किया गया है और प्रीकर्सर तथा सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण के लिए अंतर-मंत्रालयी व्यवस्था तैयार की गई है। 25 करोड़ लोगों तक पहुंचा ‘नशामुक्त भारत’ अभियान गृह मंत्री ने कहा कि नशामुक्त भारत अभियान के तहत अब तक 25 करोड़ नागरिकों से संपर्क कर उन्हें शपथ दिलाई गई है , जबकि उपचार और पुनर्वास कार्यक्रमों के तहत 5 लाख 70 हजार लोगों को नशामुक्त करने का काम किया गया है। उन्होंने बताया कि सामाजिक न्याय विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन मिलकर देश में नशामुक्ति केंद्रों की संख्या तीन गुना बढ़ाकर 1,751 करने जा रहे हैं। इस अभियान में करीब 10 हजार स्वयंसेवक काम करेंगे। वहीं एनसीसी, एनएसएस और माय भारत के माध्यम से लाखों ‘नशामुक्ति मित्र’ तैयार किए जाएंगे। शिक्षा संस्थानों को ड्रग-फ्री बनाने का लक्ष्य श्री शाह ने कहा कि शिक्षा, युवा एवं खेल मंत्रालय और शिक्षण संस्थान मिलकर शिक्षा संस्थानों को ड्रग-फ्री बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच नशे की मांग कम करना केवल पुलिस कार्रवाई से संभव नहीं है, इसलिए जागरूकता, उपचार, पुनर्वास और सामाजिक भागीदारी को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। मार्च 2027 तक हर राज्य में पूरी तरह सुसज्जित एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स रोडमैप के तहत मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूरी तरह सुसज्जित एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स बनाने की योजना है। इसके लिए सात प्रतिशत केंद्रीय सहायता देने की बात कही गई है। गृह मंत्रालय ने फॉरेंसिक रिपोर्ट 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराने की व्यवस्था का लक्ष्य भी रखा है। चार स्तंभों के तहत 25 घटक और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट्स तय किए गए हैं। सीमा, बंदरगाह, एयरपोर्ट और कार्गो पर बढ़ेगी निगरानी गृह मंत्री ने कहा कि बीएसएफ, सीआईएसएफ, भारतीय तटरक्षक दल, सीमा शुल्क और डीआरआई जैसी एजेंसियां भूमि सीमाओं, बंदरगाहों, एयरपोर्ट और कार्गो पर जोखिम आधारित प्रोफाइलिंग और स्कैनर के जरिए निगरानी मजबूत करेंगी। वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), विदेश मंत्रालय और इंटरपोल भगोड़ों को वापस लाने के लिए काम करेंगे, जबकि प्रवर्तन निदेशालय, वित्तीय आसूचना इकाई और बैंकिंग तंत्र ड्रग्स कारोबार की वित्तीय श्रृंखला पर नजर रखेंगे। ‘डेथ ट्रायंगल’ और ‘डेथ क्रेसेंट’ के रास्तों पर भी फोकस श्री शाह ने कहा कि ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए चतुष्कोणीय रणनीति अपनाई जा रही है। इसके जरिए डेथ ट्रायंगल और डेथ क्रेसेंट से आने वाले तस्करी मार्गों पर लगाम लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने साफ कहा, “भारत में विदेशियों का स्वागत है, लेकिन ड्रग्स के साथ नहीं।” उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए 46 देशों के साथ समझौते किए गए हैं। इसके अलावा एनकॉर्ड की 10 शीर्ष बैठकें, 7 कार्यपालक बैठकें, 277 राज्य स्तरीय बैठकें और 16,798 जिला स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण, 401 रेड कॉर्नर नोटिस गृह मंत्री ने आंतरिक सुरक्षा के व्यापक संदर्भ में बताया कि 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण किया गया है। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, नार्कोटिक्स और गैंगवार जैसे मामलों में शामिल आरोपी भी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए, जबकि अकेले 2026 में जुलाई तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया पूरी हुई। भगोड़ों से जुड़ी करीब 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति 2019 से 2026 के बीच सील या जब्त किए जाने की बात भी कही गई। 2047 के विकसित भारत के लिए ‘नशामुक्त युवा शक्ति’ पर जोर श्री शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक नशामुक्त युवा शक्ति विकसित भारत की नींव बने। उन्होंने कहा कि इस मिशन को सफल बनाने के लिए गृह मंत्रालय और राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं और 2029 तक तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से हासिल करने का संकल्प लिया गया है।