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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल पुलिस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद उनके लोकसभा क्षेत्र स्थित कार्यालय को गैर-कानूनी तरीके से तोड़ा गया और वहां रखे सामान तथा अहम दस्तावेज भी हटा दिए गए। 'हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी' श्री बनर्जी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि अमतला स्थित उनके सांसद कार्यालय पर की गई कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट की ओर से बुलडोजर कार्रवाई को लेकर दिए गए निर्देशों के बावजूद कार्यालय को ध्वस्त किया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना राज्य में कानून व्यवस्था और संवैधानिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। 'पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं का साथ दिया' टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि वायरल वीडियो में पश्चिम बंगाल पुलिस के जवान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कार्यालय का सामान हटाते दिखाई दे रहे हैं। उनके मुताबिक, कार्यालय से लैपटॉप, प्रिंटर, दस्तावेज, टेबल, कुर्सियां और अन्य फर्नीचर बाहर निकाले गए। उन्होंने कहा कि यह केवल तोड़फोड़ नहीं बल्कि "वर्दी में चोरी" थी, जिसे न्यायिक प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद अंजाम दिया गया। 'कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ रहे' श्री बनर्जी ने पुलिस पर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों को कानून की रक्षा करनी चाहिए थी वही कानून तोड़ने वालों की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। राजनीतिक तनाव के बीच बढ़ा विवाद यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनातनी लगातार बढ़ रही है। दोनों दल प्रशासनिक फैसलों और कानून-व्यवस्था को लेकर एक-दूसरे पर लगातार आरोप लगा रहे हैं। श्री बनर्जी का आरोप है कि उनके सांसद कार्यालय पर की गई कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित थी और यह तब की गई जब मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन था।



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