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नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्रों से जुड़े प्रस्ताव के पक्ष में मतदान जरूर किया है लेकिन विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इसका मतलब किसी खास मानचित्र, किसी निजी पक्ष के नक्शे या राष्ट्रीय सीमाओं के किसी विशेष चित्रण को भारत की मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए। प्रस्ताव के पक्ष में वोट, लेकिन रुख पहले ही कर चुका है साफ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस मुद्दे पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भारत ने प्रस्ताव का समर्थन किया था और उसके पक्ष में मतदान भी किया था। उन्होंने यह भी बताया कि जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव अपनाया गया था तब भारत ने एक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा, “जब यह प्रस्ताव अपनाया गया था तब हमने इसका समर्थन किया था और प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था। जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव अपनाया गया, तब हमने एक बयान भी दिया था, जिसमें हमने अपनी स्थिति स्पष्ट की थी।” किसी खास नक्शे का समर्थन नहीं करता प्रस्ताव विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह प्रस्ताव किसी विशेष मानचित्र को मान्यता देने या किसी निजी संस्था अथवा इकाई के नक्शे का समर्थन करने के लिए नहीं है। श्री जायसवाल ने स्पष्ट किया कि इसका केंद्र केवल समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्रों के सिद्धांत को मान्यता देना है। उन्होंने कहा कि ऐसे मानचित्रों का उद्देश्य महाद्वीपीय भूभागों के सापेक्ष आकार को अधिक सही तरीके से दिखाना या संरक्षित करना है। आखिर ‘समान-क्षेत्रफल मानचित्र’ पर जोर क्यों विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, प्रस्ताव का फोकस इस बात पर है कि समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्रों को अपनाने, उन्हें महत्व देने और उनकी विश्वसनीयता को स्वीकार करने के सिद्धांत को बढ़ावा दिया जाए। इसका मकसद किसी देश की सीमा तय करना नहीं बल्कि भूभागों के सापेक्ष आकार को सही अनुपात में दिखाने वाली मानचित्र पद्धति को महत्व देना है। विदेश मंत्रालय ने एक और भ्रम दूर किया सूत्रों के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र ने इस मामले में कोई मानचित्र जारी नहीं किया है। यूएन महासभा ने केवल एक प्रस्ताव पारित किया है। इसलिए किसी खास नक्शे को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक स्वीकृति या जारी किए गए मानचित्र के रूप में देखना सही नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर भारत की स्थिति स्पष्ट विदेश मंत्रालय इस मुद्दे पर पहले भी अपना रुख साफ कर चुका है। भारत का कहना है कि वह समान-क्षेत्रफल मानचित्रों से जुड़े सिद्धांत का समर्थन करता है, लेकिन उसके संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी शामिल हैं, भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दिखाए जाने चाहिए। भारत ने यह भी साफ किया है कि उसकी राष्ट्रीय सीमाओं का कोई भी गलत, भ्रामक या अस्वीकार्य चित्रण मंजूर नहीं किया जाएगा।



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