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पटना। बिहार में पर्यटन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से सरकार ने मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत घरों को होमस्टे के रूप में विकसित करने वाले लोगों को वित्तीय सहायता दी जाएगी और युवाओं, महिलाओं तथा स्वयं सहायता समूहों को विशेष प्रोत्साहन देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल की जाएगी। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के सूत्रों ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है। अब घर बनेगा कमाई का जरिया नई योजना के तहत राज्य में अधिकतम 8 कमरों तक के होमस्टे का पंजीकरण कराया जा सकेगा। सरकार होमस्टे संचालकों को प्रति कमरे 2.50 लाख रुपये की दर से वित्तीय सहायता देगी। हालांकि अधिकतम 4 कमरों तक ही पूंजीगत सब्सिडी का लाभ मिलेगा, यानी एक होमस्टे इकाई को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकेगी। महिलाओं और युवाओं को मिलेगा अतिरिक्त लाभ सरकार ने योजना में महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया है। यदि होमस्टे का संचालन इन वर्गों द्वारा किया जाता है तो उन्हें प्रति कमरे 25 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। इस तरह एक पात्र होमस्टे संचालक को कुल मिलाकर 11 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है। 5 साल में 1000 होमस्टे बनाने का लक्ष्य सरकार ने पहले चरण की स्वीकृति के आधार पर अगले पांच वित्तीय वर्षों में 1000 कमरों को होमस्टे योजना से जोड़ने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए वित्तीय प्रोत्साहन मद में करीब 25 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पर्यटकों को मिलेगा लोकल अनुभव सरकार का मानना है कि होमस्टे मॉडल से पर्यटकों को होटल के बजाय स्थानीय संस्कृति, खानपान और जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। खासकर बोधगया, राजगीर, नालंदा, वाल्मीकिनगर, विक्रमशिला और अन्य पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा नया बूस्टर योजना का एक बड़ा उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। सरकार का मानना है कि होमस्टे बढ़ने से स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी, छोटे कारोबार विकसित होंगे और पर्यटन का लाभ सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहकर गांवों तक पहुंचेगा। क्या बदलेगा इस फैसले से * घर से ही रोजगार का अवसर मिलेगा। * युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार मिलेगा। * स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ेगी। * ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान मिलेगी। * पर्यटकों को सस्ता और स्थानीय अनुभव मिलेगा। * राज्य के पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी।



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