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काठमांडू/रक्सौल। नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ से 17 लोगों की मौत और निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना के इंजीनियरों-कर्मचारियों समेत 60 से अधिक लोगों तथा 26 पुलिसकर्मियों के लापता होने के बाद बिहार में गंडक नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए सीमावर्ती जिलों के प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नेपाल में मची इस तबाही ने बिहार की चिंता भी बढ़ा दी है। नेपाल से आने वाली नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए पूर्वी चंपारण प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। वाल्मीकिनगर बैराज पर दबाव बढ़ने और गंडक नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर जाने की आशंका के बीच नदी किनारे बसे क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी गई है। सुरंग में काम कर रहे थे कर्मचारी, तभी आया पानी का सैलाब स्याब्रुबेसी में 20 मेगावाट की लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना का निर्माण चल रहा था। बाढ़ आने के समय 60 से अधिक कर्मचारी परियोजना की सुरंग में कंक्रीट लाइनिंग का काम कर रहे थे। परियोजना के प्रबंध निदेशक और नेपाल के स्वतंत्र विद्युत उत्पादक संघ के सचिव बिजय मोहन भट्टराई के अनुसार, बाढ़ से परियोजना के बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है। नदी के सामान्य जलस्तर से करीब 10 मीटर ऊपर स्थित सुरंग भी इसकी चपेट में आ गई। श्री भट्टराई ने नेपाल सरकार से लापता कर्मचारियों की तलाश के लिए तत्काल बड़े स्तर पर खोज एवं बचाव अभियान चलाने की मांग की है। मलबे में जिंदगी की तलाश, ड्रोन से निगरानी आपदा के बाद नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल ने प्रभावित इलाकों में मोर्चा संभाल लिया है। राहत एवं बचाव कार्य के लिए चिकित्सा दल, वाहन, जरूरी सामग्री और विशेष उपकरण भेजे गए हैं। फंसे लोगों तथा बाढ़ से कटे इलाकों का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद ली जा रही है। रसुवागढ़ी के कस्टम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन ने भोटे कोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी तटों से दूर रहने की अपील की है। हिमनदी झील फटी या हिमस्खलन हुआ? कारण अभी रहस्य भोटे कोशी में अचानक इतना भयानक सैलाब कैसे आया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं है। नेपाल सरकार यह पता लगाने में जुटी है कि आपदा के पीछे हिमस्खलन, प्राकृतिक जलप्रवाह में असामान्य वृद्धि या किसी बांध अथवा जल संरचना का टूटना जिम्मेदार है।काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं जलवायु शोधकर्ता रिजन भक्त कायस्थ ने इसे सामान्य बाढ़ मानने से इनकार किया है। उनके अनुसार, बाढ़ की प्रकृति को देखते हुए हिमस्खलन या हिमनदी झील के फटने की आशंका काफी अधिक है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। नेपाल की तबाही से बिहार तक बजा खतरे का अलार्म नेपाल में नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने से वाल्मीकिनगर बैराज पर दबाव बढ़ सकता है। बैराज से ज्यादा पानी छोड़े जाने पर बिहार में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर जा सकता है। इसी आशंका को देखते हुए पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने गंडक से जुड़े अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया और पहाड़पुर अंचलों में अलर्ट जारी किया है। तटबंधों और निचले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। तटबंधों की निगरानी तेज, निकासी की तैयारी रखने का आदेश जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन शाखा, बाढ़ प्रमंडल और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की है। अधिकारियों को गंडक का जलस्तर अचानक बढ़ने की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।अंचलाधिकारियों और थाना प्रभारियों को नदी किनारे तथा निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है। आपात स्थिति पैदा होने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी तैयार रखने के निर्देश हैं। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की गश्त, मेडिकल टीमें भी तैयार संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) और एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) की टीमों को लगातार पेट्रोलिंग करने का निर्देश दिया गया है। सिविल सर्जन और जिला पशुपालन पदाधिकारी को पर्याप्त दवाओं के साथ मेडिकल टीमें तैयार रखने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर इन टीमों को संवेदनशील इलाकों में तुरंत तैनात किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर ग्रामीणों को खतरे और बचाव के उपायों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए हैं। फिलहाल हालात नियंत्रण में, लेकिन हर नजर जलस्तर पर बिहार में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, मगर प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। नेपाल से आने वाले पानी में अचानक बढ़ोतरी हुई तो गंडक किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर दबाव बढ़ सकता है। एक तरफ नेपाल में मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है, तो दूसरी तरफ बिहार में संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियां तेज हैं। फिलहाल भारत-नेपाल सीमा से लेकर गंडक के मैदानी इलाकों तक हर नजर नदियों के जलस्तर पर टिकी हुई है।



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