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संजय कौशिक मोतिहारी। डगमगाते पांव, अधखुली आंखें, मदहोश तन-मन... बिहार के सीमांचल में ऐसी ही बदहवासी का शिकार बन रहे बच्चे और जवान। शौक, जरूरत बनने लगी है और जरूरत, कुंठा परोस रही है। यह किसी फिल्म के कथानक का अंश नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय साजिश का अघोषित षड्यंत्र है, जिसे शासन भी स्वीकारता है। भारत-नेपाल का सीमाई जिला पूर्वी चंपारण नशे की मादकता के इसी कारोबार का प्रमुख मार्ग बनकर उभरा है। शराब से सरक कर जवानी गांजा, अफीम, चरस और ब्राउन सुगर की गिरफ्त में आने लगी है। विद्यालय से महाविद्यालय तक पसरा है नशे का कारबार। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, देश में 2020 में 26560 मामले दर्ज किए गए थे। 2020 से 2025 के बीच इस बाजार ने बड़ा विस्तार पाया है। पिछले एक वर्ष में अकेले पूर्वी चंपारण में सौ से अधिक छोटे-बड़े ऐसे मामले पकड़ में आये हैं, जो युवा पीढ़ी को बीमार बनाने की अंतराष्ट्रीय साजिश का खुलासा करते हैं। सभी मामलों में प्रतिबंधित मादक पदार्थ नेपाल से बॉर्डर क्रॉस कर भारतीय क्षेत्र में लाये गए थे। चम्पारण क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक हरिकिशोर राय का मानना है कि “मुनाफे के अंतर के कारण नशा के कारोबार का आकर्षण बढ़ा है लेकिन पुलिस की विशेष नज़र है। लोग पकड़े भी जा रहे हैं और उन्हें सजा भी मिल रही है।" 2025 के केवल दिसम्बर माह के गुजरे महज 26 दिनों में 13 मादक पदार्थों से जुड़े मामले पकड़ में आएं हैं। उदाहरण के लिए 1 दिसम्बर 2025 को चिरैया थाना की पुलिस ने एक नेपाली महिला को 3.542 किलो चरस के साथ गिरफ्तार किया। 06 दिसम्बर की रात पुलिस ने छतौनी थानाक्षेत्र के मठिया मोड़ से एक स्कार्पियो गाड़ी से 169 किलो गांजा के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया। 07 दिसम्बर रक्सौल कस्टम के समीप और सुगांव माई स्थान के पास से 9.178 किलो चरस बरामद कर दो वाहनों को जब्त करने के साथ 6 लोगों को गिरफ्तार किया। 07 दिसम्बर को ही पुलिस ने हरसिद्धि थाना क्षेत्र से 2.88 किलो गांजा के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। 12 दिसम्बर की रात जीतना थाना के धेनुखी बलुआ सरेह से एसएसबी ने 36 किलो गांजा बरामद किया। इसी तरह 13 दिसम्बर को नकरदेई थाना की पुलिस ने भकुरहियां गांव से एक व्यक्ति को 26 ग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया। 14 दिसम्बर आदापुर थाना की पुलिस और एसएसबी ने संयुक्त रूप से भारत-नेपाल सीमा के समीप से छह किलो चरस बरामद किया। 15 दिसम्बर हरपुर थाना की पुलिस और एसएसबी ने संयुक्त रूप से 1.35 किलो अफीम और 52 ग्राम चरस के साथ उत्तरप्रदेश के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। वहीं, 16 दिसम्बर की रात जीतना थाना की पुलिस ने जीतना गांव के समीप से 71 किलो गांजा बरामद किया। 17 दिसम्बर पुलिस ने हरैया थाना के भलुआहा गांव से 1 किलो चरस बरामद किया। 24 दिसम्बर पुलिस ने हरैया थाना के पनटोका मार्ग से 7.560 किलो चरस के साथ तीन तस्करों को गिरफ्तार किया। 26 दिसम्बर को सुगौली थाना के श्रीपुर चौक के पास एक चारपहिया वाहन से पुलिस ने 93 किलो गांजा के साथ 3 व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पिछले एक वर्ष में यह आंकड़ा और भयावह है। 1 जनवरी 2025 से 25 दिसम्बर 2025 के बीच केवल पूर्वी चम्पारण में 30 करोड़ से अधिक कीमत के मादक पदार्थ पकड़े गए हैं। इस अवधि में 4590.475 किलो गांजा, 47.402 किलो चरस, 38.619 किलो स्मैक, 12.22 किलो अफीम, 0.076 ग्राम हशीश और 0.05 ग्राम हेरोईन के साथ दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया। गिरफ्तार लोगों में बिहार के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के निवासी भी थे। हालात डरावने हैं। तंत्र डाल-डाल और नशा के धंधेबाज पात-पात चल रहे हैं। हालिया स्थिति कम भयावह नहीं है। 01 जनवरी 2026 से 20 जून तक केवल पूर्वी चंपारण जिला से स्मैक 538.60 ग्राम, चरस 39.397 किलो, अफीम 27.100 किलो और डोडा 451.100 किलो बरामद किए गए। इस दैरान 18 धंधेबाज गिरफ्तार किए गए। ये बरामदगियां उन छोटी-छोटी बरामदगियों के अतिरिक्त हैं जो नशेड़ियों के सीधे हाथ तक पहुँचने के दौरान की गईं। अब तक पुरुषों को नशा के इस कारोबार के लिए जवाबदेह ठहराया जाता रहा है, लेकिन अब महिलाओं की बराबर की भागीदारी खुलकर सामने आई है। विगत 13 जून को पुलिस की श्रृंखलाबद्ध कार्रवाई में 12.43 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली अफीम, 1.100 किलोग्राम डोडा (पोस्ता का छिलका), 4 किलोग्राम गांजा तथा 14,300 रुपये नकद बरामद किए गए। इसमें नयी और चौकाने वाली बात यह रही कि इस मामले में गिरफ्तार आठ लोगों में चार महिलाएं हैं। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानन्द राय ने भी 13 दिसम्बर 2025 को एसएसबी के एक कार्यक्रम के दौरान रक्सौल में स्वीकार किया कि विदेशी शक्तियां जानती हैं कि अस्त्र-शस्त्र और विचार-व्यवहार से वे भारत से नहीं जीत सकती। इसलिए, ऐसी शक्तियां मादक पदार्थों को भारत में भेजकर युवा पीढ़ी को बर्बाद करने और देश को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। पुलिस उप महानिरीक्षक हरिकिशोर राय भी अन्तर्राष्ट्रीय साजिश से इनकार नहीं करते हैं। वे यह भी मानते हैं कि अब तक के रिकॉर्ड से पता चलता है कि पकड़े गए तमाम मादक पदार्थों को नेपाल से तस्करी कर भारतीय क्षेत्र में लाने का प्रयास किया गया है। लेकिन, वे यह भी मानते हैं कि सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं। हालांकि वरीय अधिवक्ता और पूर्व पत्रकार रमाकांत पाण्डेय शासन के प्रयासों को नाकाफी मानते हैं। उनका कहना है, "विद्यालयों और माहाविद्यालयों के बच्चों तक को यह घातक जहर उपलब्ध है। यह हमारी नयी पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है।" चंपारण, नशा के कारोबार का केवल प्रमुख मार्ग बनकर ही नहीं उभरा है, वरन यह घातक कारोबार इस मार्ग से विस्तार भी पा रहा है। मादक पदार्थों की उपलब्धता और बरामदगी की व्यापकता चंपारण के बुद्धिजीवियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। बुद्धिजीवियों की नजर में ऐसे तत्वों की खपत का एक बड़ा कारक है उम्मीद, संघर्ष, बेरोजगारी, निराशा और रोमांच। यह हमारी जवान होती पीढ़ी की सृजनशीलता का संहार कर क्रियाशीलता को निगल रही है। जिसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शासन की व्यवस्था भी स्वीकार करने लगी है।