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ग्लासगो (स्कॉटलैंड)। राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) 2026 में भारत ने पुरुषों की पैरा शॉटपुट एफ57 स्पर्धा में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सोमन राणा के स्वर्ण और शुभम जुयाल के रजत पदक के दम पर पहली बार इस इवेंट में गोल्ड जीतने के साथ-साथ शीर्ष दो स्थानों पर कब्जा जमाकर नया इतिहास रच दिया। शुभम ने पहली ही थ्रो में बना ली बढ़त 10 खिलाड़ियों के बीच हुई स्पर्धा में शुभम जुयाल ने अपनी पहली ही थ्रो में 13.08 मीटर का प्रदर्शन कर बढ़त बना ली। इसके बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 13.28 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और लंबे समय तक शीर्ष स्थान पर बने रहे। हालांकि सोमन राणा ने अपने दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का थ्रो फेंककर मुकाबले का रुख बदल दिया और स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। भारत के लिए पहली बार गोल्ड और डबल पोडियम यह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पुरुषों की शॉटपुट एफ57 स्पर्धा में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। साथ ही यह पहला मौका है, जब इस स्पर्धा में भारत ने एक साथ पहला और दूसरा स्थान हासिल किया। कैमरून के सेड्रिक इद्रिस लेकेजो अजामदजी ने 12.57 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। सोमन राणा की कहानी हौसले की मिसाल सोमन राणा की जीत केवल एक पदक नहीं बल्कि संघर्ष और वापसी की प्रेरक कहानी भी है। वह कभी राष्ट्रीय स्तर पर मिडिलवेट बॉक्सर रहे थे और करीब पांच साल तक मुक्केबाजी की। साल 2006 में वह 2/8 गोरखा राइफल्स में सिपाही थे, जब पुंछ सेक्टर में लैंडमाइन विस्फोट में उनका दाहिना पैर चला गया। 2017 में शुरू किया पैरा एथलेटिक्स का सफर करीब एक दशक बाद 2017 में उन्होंने पैरा एथलेटिक्स की शुरुआत की। उस समय वह आर्मी पैरालंपिक नोड गए थे, जहां कृत्रिम अंग केंद्र में उन्हें नया प्रोस्थेटिक पैर मिलना था। यहीं से उनकी नई खेल यात्रा शुरू हुई और अब उसी सफर ने उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक तक पहुंचा दिया। भारत के पदकों की संख्या पहुंची 30 सोमन राणा का यह स्वर्ण ग्लासगो 2026 में ट्रैक एंड फील्ड से भारत का तीसरा गोल्ड है जबकि शुभम जुयाल देश के सातवें रजत पदक विजेता बने। इन दो पदकों के साथ भारत की कुल पदक संख्या 30 हो गई है। भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए यादगार दिन सोमन राणा और शुभम जुयाल की इस सफलता ने भारतीय पैरा एथलेटिक्स को नई ऊंचाई दी है। एक ओर सेना के जवान से पैरा चैंपियन बने राणा की कहानी प्रेरणा देती है, तो दूसरी ओर जुयाल का लगातार दमदार प्रदर्शन भारतीय खेलों के मजबूत भविष्य का संकेत देता है।