Full Story

मुंबई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक बॉन्ड बाजार में तेज बिकवाली और अमेरिकी फेड अधिकारियों के बदलते संकेतों के बीच निवेशकों के सतर्क रुख के दबाव में बीते सप्ताह एक प्रतिशत तक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार की चाल अगले सप्ताह अमेरिका में जारी होने वाले रोजगार और खुदरा महंगाई के आंकड़ों से तय होगी। सेंसेक्स 749 अंक टूटा, निफ्टी 23,897 पर बंद बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 749.08 अंक यानी 0.97 प्रतिशत गिरकर शुक्रवार को 76,515.43 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 277.95 अंक यानी 1.15 प्रतिशत टूटकर 23,897.70 अंक पर आ गया और 24 हजार के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। मिडकैप पर दबाव, स्मॉलकैप ने दिखाई मजबूती बड़ी कंपनियों के शेयरों में दबाव के बीच मझौली और छोटी कंपनियों में मिला-जुला रुख दिखा। बीएसई मिडकैप 237.19 अंक यानी 1.4 प्रतिशत गिरकर 17,097.94 अंक पर आ गया, जबकि स्मॉलकैप 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 7,281.80 अंक पर बंद हुआ। कच्चे तेल और बॉन्ड बिकवाली ने बढ़ाई बेचैनी बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बॉन्ड बाजार में गहराती बिकवाली का रहा। इन दोनों वजहों से घरेलू निवेशकों में जोखिम लेने की इच्छा कमजोर पड़ी और पूरे सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। इसके साथ ही अमेरिकी फेड अधिकारियों के बदलते रुख ने भी निवेशकों को उलझाए रखा। जैक्सन होल के सख्त संकेतों से दबाव, वालर की टिप्पणी से कुछ राहत सप्ताह की शुरुआत में जैक्सन होल से आए सख्त संकेतों ने बाजार की धारणा पर दबाव बढ़ाया। हालांकि सप्ताह के आखिर में फेड गवर्नर वालर की ओर से महंगाई में नरमी के शुरुआती संकेत और ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना जताए जाने से बाजार को कुछ राहत मिली। इसके बावजूद निवेशकों की सतर्कता खत्म नहीं हुई। मजबूत जीडीपी बनाम वैश्विक अनिश्चितताएं बाजार के सामने इस समय दो विपरीत तस्वीरें हैं। एक तरफ भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) आंकड़ों ने घरेलू मांग की मजबूती को फिर साबित किया है। दूसरी तरफ कच्चा तेल, वैश्विक बॉन्ड बाजार और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता निवेशकों पर दबाव बनाए हुए है। स्मॉलकैप में चुनिंदा खरीद, लार्जकैप-मिडकैप में बिकवाली घरेलू अर्थव्यवस्था पर ज्यादा निर्भर स्मॉलकैप शेयरों में चुनिंदा खरीददारी देखने को मिली, जिससे उनमें मजबूती बनी रही। इसके उलट व्यापक आर्थिक परिस्थितियों के प्रति ज्यादा संवेदनशील लार्जकैप और मिडकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। घरेलू विकास की मजबूती से निजी बैंकों और रियल्टी शेयरों को कुछ सहारा मिला। कच्चे तेल की तेजी का दोहरा असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का अलग-अलग सेक्टरों पर अलग असर दिखाई दिया। ऊंची कीमतों से बेहतर प्राप्तियों की उम्मीद में अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस कंपनियों को फायदा हुआ, जबकि लागत बढ़ने के प्रति संवेदनशील ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे शेयरों पर दबाव बढ़ा। अब अमेरिकी रोजगार और सीपीआई पर नजर अगस्त में अमेरिका की कोर महंगाई में नरमी आने की उम्मीदों के बीच निवेशक अब आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर नजर लगाए हुए हैं। अमेरिकी रोजगार आंकड़े और उसके बाद अगले सप्ताह आने वाले अमेरिकी सीपीआई आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि फेड ब्याज दरों को स्थिर रखने की दिशा में आगे बढ़ता है या नहीं। इन आंकड़ों का असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ेगा और वही अगले सप्ताह भारतीय बाजार की चाल के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है।