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मुंबई। हिंदी सिनेमा में दोस्ती की कहानी को नए अंदाज में पेश करने वाली ‘दिल चाहता है’ के 25 साल पूरे होने पर फरहान अख्तर ने फिल्म की कास्टिंग से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि उस दौर में कलाकार मल्टी-हीरो फिल्मों के बजाय लव ट्रायंगल करना चाहते थे और आमिर खान को पूरी स्क्रिप्ट सुनने के लिए राजी करने में उन्हें करीब आठ महीने लग गए थे। दोस्ती की कहानी पर भरोसा दिलाना नहीं था आसान साल 2001 में रिलीज हुई ‘दिल चाहता है’ को आज दोस्ती पर बनी यादगार फिल्मों में गिना जाता है लेकिन इसे पर्दे तक पहुंचाने का सफर फरहान अख्तर के लिए आसान नहीं था। फिल्म बनाने से पहले उनकी बड़ी मुश्किल कलाकारों को इस कहानी पर भरोसा दिलाना था। उस दौर में हिंदी फिल्मों में रोमांटिक ड्रामा और लव ट्रायंगल का खासा चलन था। ऐसे माहौल में तीन दोस्तों की कहानी लेकर आना, जिसमें उनके बीच किसी लड़की को लेकर लव ट्रायंगल नहीं था, अपने आप में अलग कोशिश थी। फरहान बोले- हर कोई करना चाहता था लव ट्रायंगल फरहान अख्तर ने आमिर खान की कास्टिंग का किस्सा साझा किया और बताया कि आमिर को फिल्म में लेना आसान नहीं था। उस समय कलाकारों की तरफ से उन्हें यह सुनने को मिलता था कि वे मल्टी-हीरो फिल्म नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि उस दौर में हर कोई लव ट्रायंगल करना चाहता था। यही वजह थी कि दोस्ती को कहानी के बीचोबीच रखने वाली ‘दिल चाहता है’ के लिए कलाकारों को तैयार करना उनके सामने बड़ी चुनौती बन गया। ‘दो लड़के एक लड़की के लिए लड़ें, यह नहीं चाहता था’ फरहान अख्तर शुरुआत से ही दोस्ती की इस कहानी को पुराने रोमांटिक फॉर्मूले से दूर रखना चाहते थे। उनके लिए फिल्म का असल मुद्दा तीन दोस्तों की दोस्ती थी न कि उनके बीच किसी लड़की को लेकर टकराव। फरहान के मुताबिक, वह ऐसी कहानी नहीं बनाना चाहते थे जिसमें दो लड़के एक लड़की के लिए आपस में लड़ते दिखाई दें। यही सोच आगे चलकर ‘दिल चाहता है’ की सबसे अलग पहचान बनी। आमिर खान के लिए 8 महीने तक करते रहे कोशिश आमिर खान को फिल्म के लिए राजी करना फरहान के लिए लंबा इंतजार साबित हुआ। फरहान ने बताया कि उनके पिता जावेद अख्तर आमिर के साथ ‘लगान’ में काम कर चुके थे लेकिन उन्होंने इस पहचान का फायदा उठाकर किसी खास मुलाकात या सिफारिश का सहारा नहीं लिया। इसके बजाय फरहान खुद लगातार कोशिश करते रहे। आखिरकार करीब आठ महीने के इंतजार के बाद आमिर खान पूरी स्क्रिप्ट सुनने के लिए तैयार हुए। आमिर को बाद में पसंद आई फरहान की जिद फरहान ने बताया कि आमिर खान ने बाद में उनसे कहा था कि उन्हें इस बात की खुशी है कि फरहान ने उन्हें फिल्म में लेने के लिए इतनी कोशिश की। आमिर को इससे यह एहसास हुआ कि फरहान इस किरदार के लिए उन्हें कितनी शिद्दत से चाहते थे। यानी जिस कास्टिंग के लिए फरहान को महीनों इंतजार करना पड़ा, वही कोशिश आखिरकार फिल्म के लिए अहम साबित हुई। 2001 में आई फिल्म ने दोस्ती को दिया नया अंदाज ‘दिल चाहता है’ साल 2001 में रिलीज हुई थी। फिल्म ने हिंदी सिनेमा में दोस्ती को पर्दे पर दिखाने के अंदाज को एक अलग पहचान दी। तीन दोस्तों की जिंदगी, उनके रिश्तों और बदलते वक्त के साथ उनकी दोस्ती की कहानी ने खास तौर पर युवा दर्शकों से रिश्ता बनाया। फिल्म में दोस्ती केवल कहानी का एक हिस्सा नहीं थी बल्कि कहानी की बुनियाद थी। 25 साल बाद सामने आई पर्दे के पीछे की कहानी आज ‘दिल चाहता है’ के 25 साल पूरे होने पर फिल्म की कामयाबी अपनी जगह है लेकिन फरहान अख्तर की यादें इसके पीछे की मुश्किल कहानी भी सामने लाती हैं। जिस दौर में लव ट्रायंगल और रोमांटिक ड्रामा का बोलबाला था, उस समय तीन दोस्तों की कहानी को ही फिल्म की सबसे बड़ी ताकत मानकर कलाकारों को उस पर भरोसा दिलाना आसान नहीं था। आमिर खान को स्क्रिप्ट सुनाने के लिए आठ महीने का इंतजार और पुराने लव ट्रायंगल फॉर्मूले से दूर रहने का फरहान का फैसला बताता है कि ‘दिल चाहता है’ पर्दे पर आने से पहले ही हिंदी सिनेमा के प्रचलित ढर्रे से अलग रास्ता चुन चुकी थी।