Full Story
मोतिहारी। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद बिहार के पूर्वी चंपारण में बाढ़ का खतरा गहरा गया है, जहां गंडक, बूढ़ी गंडक और सिकरहना समेत करीब एक दर्जन नदियां उफान पर हैं तथा सुगौली के नयका टोला में सिकरहना नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुसने से प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सड़कों पर बहाव, जनजीवन प्रभावित सिकरहना नदी का पानी शनिवार की शाम नयका टोला में घुसकर सड़कों और खेतों में तेजी से फैल गया। नयका टोला मुख्य मार्ग पर करीब दो फीट तक पानी बह रहा है, जिसके कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों को दैनिक जरूरत की सामग्री लाने, बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने और घरों से बाहर निकलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन इलाकों में तेजी से फैल रहा है पानी नदी के दक्षिण दिशा में निर्माणाधीन तटबंध पर स्लुइस गेट के लिए छोड़े गए खुले स्थान से पानी बेहद तेज रफ्तार के साथ 'विशुनपुरवा सरेह' की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही बौधी माई और नासी के समीप भी पानी का रौद्र रूप देखा जा रहा है, जिससे आसपास के दर्जनों गांवों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है। किसानों की बढ़ी धड़कनें मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता विकास शर्मा ने बताया कि पानी का फैलाव खेतों में बहुत तेजी से हो रहा है। अगर जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है, तो किसानों की तैयार खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। इस आशंका से पूरे इलाके के किसानों और ग्रामीणों में भारी चिंता का माहौल है। एक्शन मोड में प्रशासन: जिलाधिकारी ने संभाला मोर्चा बाढ़ की विभीषिका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने खुद गंडक नदी के दाहिने तटबंध का निरीक्षण किया। उन्होंने संवेदनशील इलाकों में तटबंधों की 24 घंटे निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग करने का सख्त निर्देश दिया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन सहित सभी संबंधित विभागों को तैयार रहने को कहा गया है। अधिकारियों ने किया ग्राउंड जीरो का दौरा स्थिति का जायजा लेने के लिए सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अरुण कुमार स्थानीय अधिकारियों की टीम के साथ प्रभावित नयका टोला पहुंचे। उन्होंने सिकरहना तटबंध और लालपरसा धूमनी टोला बांध का निरीक्षण कर स्थिति की समीक्षा की। वहीं, स्थानीय अंचलाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया, "फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। जिन स्थानों पर तटबंधों को आंशिक क्षति पहुंची है, वहां युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य चलाया जा रहा है। हमारी टीम जलस्तर पर लगातार नजर रखे हुए है।" अफवाहों से बचने की अपील मौसम विभाग के अनुसार, यदि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला थमा नहीं तो आने वाले 24 से 48 घंटे पूर्वी चंपारण के निचले इलाकों के लिए बेहद संवेदनशील हो सकते हैं। जान-माल और फसलों की सुरक्षा को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए जिला प्रशासन ने आम जनता से सतर्क रहने, सुरक्षित स्थानों पर रहने और बाढ़ से जुड़ी किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।



Comments
0