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मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने और रुपये पर दबाव जैसे वैश्विक जोखिमों के बावजूद दिग्गज कंपनियों के चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े बेहतर रहने से उत्साहित निवेशकों की जबरदस्त खरीददारी की बदौलत बीते सप्ताह आधी फीसदी से अधिक उछले घरेलू शेयर की बाजार की नजर अगले हफ्ते भारत के पीएमआई आंकड़ों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। सेंसेक्स 78 हजार के पार, निफ्टी में भी शानदार तेजी बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 582.06 अंक (0.75%) चढ़कर 78,151.45 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी-50 भी 127.40 अंक (0.53%) की बढ़त के साथ 24,334.30 अंक पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप में दिखा दबाव जहां बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीददारी रही, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। बीएसई मिडकैप-150 0.46 फीसदी गिरकर 16,922.46 अंक और स्मॉलकैप-250 0.80 फीसदी टूटकर 7,095.60 अंक पर बंद हुआ। बड़ी कंपनियों के शेयर बने निवेशकों की पहली पसंद इस सप्ताह निवेशकों का रुझान मिडकैप और स्मॉलकैप से हटकर बड़ी कंपनियों की ओर रहा। इसकी वजह छोटे शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन, जबकि बड़ी कंपनियों में बेहतर कमाई की संभावना और आकर्षक वैल्यूएशन है। आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ने दिखाई ताकत सेक्टोरल प्रदर्शन में आईटी शेयर सबसे आगे रहे। बेहतर प्रबंधन संकेतों और मजबूत तिमाही नतीजों की उम्मीद ने इस क्षेत्र को मजबूती दी। वहीं, घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद से कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों में भी खरीदारी रही। इसके उलट रियल्टी और मेटल सेक्टर दबाव में बने रहे। अगले सप्ताह इन आंकड़ों पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में भारत के पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) के आंकड़े अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही जापान के महंगाई के आंकड़ों पर भी वैश्विक निवेशकों की नजर रहेगी, जिससे ब्याज दरों की भविष्य की दिशा का संकेत मिल सकता है। भारत में लंबे समय के निवेश की उम्मीद बरकरार जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर का मानना है कि एशियाई बाजारों में एआई आधारित कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यदि वहां गिरावट आती है तो भारत उभरते बाजारों में निवेशकों के लिए और आकर्षक विकल्प बन सकता है। मजबूत आर्थिक बुनियाद, स्थिर घरेलू मांग और विविध विकास क्षमता के कारण भारतीय बाजार में लंबे समय तक निवेश का भरोसा कायम रहने की संभावना है।