Full Story

हाजीपुर/पटना। बिहार के वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में गुरुवार को निर्माणाधीन फोरलेन पुल पर बीम लॉन्चर गिरने से कई मजदूर घायल हो गए और निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को लालगंज रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने घटना को लेकर निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए हैं, जबकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने शुरुआती तौर पर लॉन्चिंग गर्डर के मूवमेंट के दौरान तकनीकी खराबी को वजह बताया है। घटना लालगंज थाना क्षेत्र के एतवारपुर गांव में सती स्थान के पास बाकरपुर–माणिकपुर एनएच-139डब्ल्यू परियोजना के निर्माण स्थल पर हुई। मंत्रालय ने विस्तृत तकनीकी जांच और कार्यस्थल पर सुरक्षा उपायों की दोबारा समीक्षा के निर्देश दिए हैं। तेज आवाज के बाद मची चीख-पुकार, बचाव में जुटे स्थानीय लोग प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 10 से 10.15 बजे के बीच अचानक तेज आवाज सुनाई दी। आसपास के लोग निर्माण स्थल की ओर पहुंचे तो वहां मजदूर फंसे हुए थे और मदद के लिए पुकार रहे थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें निकालने का प्रयास शुरू किया। शुरुआती स्थानीय जानकारी के मुताबिक, एक मजदूर को बाहर निकालने के लिए लोहे का हिस्सा काटना पड़ा और इस बचाव कार्य में करीब दो घंटे लगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे के बाद निर्माण कंपनी के अधिकारी और इंजीनियर मौके से निकल गए तथा पुलिस-प्रशासन के पहुंचने में भी देर हुई। बाद में लालगंज पुलिस और प्रखंड विकास पदाधिकारी सुजीत कुमार ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया, दो को रेफर करने की शुरुआती सूचना घटनास्थल से मिली जानकारी में लालगंज रेफरल अस्पताल में छह कर्मचारियों का उपचार होने और दो गंभीर घायलों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, दोपहर 3:58 बजे पीआईबी पटना के जरिए जारी मंत्रालय के स्पष्टीकरण में चार श्रमिकों को चोट लगने की जानकारी दी गई। मंत्रालय के अनुसार, तीन श्रमिकों को मामूली चोटें आईं और उनकी स्थिति सामान्य है। एक अन्य श्रमिक के पैर में चोट लगी, जिसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया; उसकी हालत भी सामान्य और स्थिर बताई गई है। मंत्रालय ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही परियोजना अधिकारियों और कार्यदायी एजेंसी ने आवश्यक कार्रवाई की तथा प्रभावित श्रमिकों को सहायता और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। तेजस्वी का हमला—निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर उठाए सवाल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने घटना को लेकर एनडीए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अपने बयान में इसे निर्माणाधीन पुल गिरने की घटना बताते हुए करीब आधा दर्जन मजदूरों के दबने और घायल होने की खबर का उल्लेख किया। श्री यादव ने आरोप लगाया कि घटिया निर्माण सामग्री, खराब गुणवत्ता, मानकों की अनदेखी, जांच में अनियमितता और भ्रष्टाचार लगातार होने वाली ऐसी घटनाओं के कारण हैं। उन्होंने सरकार पर मामले की लीपापोती करने की आशंका भी जताई। मंत्रालय बोला- लॉन्चिंग गर्डर के मूवमेंट में आई तकनीकी समस्या सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि बाकरपुर–माणिकपुर एनएच-139डब्ल्यू परियोजना के निर्माणाधीन फोरलेन पुल पर लॉन्चिंग गर्डर को आगे बढ़ाने के दौरान तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई थी। लॉन्चिंग गर्डर या बीम लॉन्चर पुल निर्माण में भारी बीम को निर्धारित स्थान पर रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला उपकरण है। मंत्रालय ने घटना को इसी उपकरण के मूवमेंट के दौरान आई खराबी से जोड़ा है। मंत्रालय के मुताबिक, तकनीकी खराबी के वास्तविक कारण और घटना की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर सुधारात्मक और अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा मानकों के पालन का दावा, फिर से समीक्षा के निर्देश मंत्रालय ने कहा कि निर्माण गतिविधि के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों, प्रोटोकॉल और आवश्यक सावधानियों का पालन किया गया था। घटना के बाद संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी एजेंसी को सुरक्षा उपायों की पुनः समीक्षा करने तथा जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सावधानियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने भी निर्माण गुणवत्ता और श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए तकनीकी जांच के निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई की बात कही है। भारतमाला परियोजना के तहत हो रहा फोरलेन निर्माण बाकरपुर–माणिकपुर एनएच-139डब्ल्यू पर भारतमाला परियोजना के तहत फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है। शुरुआती स्थानीय विवरण में निर्माण कार्य से एकलव्य कंस्ट्रक्शन कंपनी का नाम जुड़ा बताया गया है और परियोजना की लागत करीब छह हजार करोड़ रुपये बताई गई है। हादसे के बाद अब जांच का केंद्र लॉन्चिंग गर्डर में आई तकनीकी खराबी और उसके संचालन की परिस्थितियां हैं। मंत्रालय ने कहा है कि जांच के आधार पर आवश्यक कदम उठाने के साथ निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का निरंतर पालन सुनिश्चित किया जाएगा।