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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर नेतृत्व को लेकर जारी सियासी खींचतान के बीच ऋतब्रत बनर्जी गुट ने बड़ा कानूनी दावा करते हुए आज कहा कि अलीपुर अदालत ने 22 जून को गठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी को पार्टी के संचालन की एकमात्र वैध संस्था माना है और प्रतिद्वंद्वी गुट को पार्टी के नाम, पदाधिकारियों, दफ्तरों और संगठनात्मक कामकाज में हस्तक्षेप से रोक दिया है। कोर्ट ने क्या कहा, ऋतब्रत गुट ने क्या दावा किया श्री बनर्जी ने कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि 22 जून 2026 को गठित राष्ट्रीय कार्यकारिणी ही तृणमूल कांग्रेस का संचालन करने वाली एकमात्र वैध कार्यकारी संस्था है। उन्होंने दावा किया कि अदालत ने प्रतिद्वंद्वी गुट को पार्टी का प्रतिनिधि या पदाधिकारी होने का दावा करने और पार्टी के प्रशासन में किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से भी रोक दिया है। पार्टी के नाम, फंड और दफ्तर पर भी दावा नहीं कर सकेगा दूसरा गुट ऋतब्रत बनर्जी के मुताबिक अदालत ने यह भी कहा है कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम पर सरकारी या संवैधानिक संस्थाओं से संपर्क नहीं कर सकता। साथ ही पार्टी के रिकॉर्ड, बैंक खाते, फंड और संपत्तियों पर भी किसी अन्य गुट का अधिकार नहीं होगा। अरूप रॉय की अध्यक्षता वाली समिति को बताया वैध ऋतब्रत गुट का कहना है कि अदालत ने साफ किया है कि अरूप रॉय की अध्यक्षता वाली कार्यकारिणी ही पार्टी के सभी मामलों का संचालन करने की कानूनी अधिकार प्राप्त संस्था है। 'अब नहीं चलेगी ताकत की राजनीति' अदालती आदेश को ऐतिहासिक बताते हुए श्री बनर्जी ने कहा कि अब पार्टी के नियमों की जगह ताकत के दम पर संगठन चलाने का दौर खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा कि यदि कोई गुट कोलकाता स्थित तृणमूल भवन या राज्य के अन्य पार्टी कार्यालयों पर जबरन कब्जे की कोशिश करता है तो वह भी कानून का उल्लंघन माना जाएगा। 22 जून के विशेष अधिवेशन से शुरू हुआ विवाद ऋतब्रत बनर्जी ने बताया कि 22 जून को कोलकाता के एक होटल में पार्टी का विशेष अधिवेशन आयोजित किया गया था, जिसमें पार्टी संविधान के अनुसार नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव हुआ और अरूप रॉय को उसका अध्यक्ष चुना गया। इसके बावजूद कुछ लोग पार्टी के नाम का इस्तेमाल करते रहे और कार्यालयों में प्रवेश कर भ्रम फैलाने की कोशिश करते रहे। अगले कदम की तैयारी में ऋतब्रत गुट श्री बनर्जी ने कहा कि अदालत के आदेश की प्रति पार्टी कार्यकर्ताओं को भेज दी गई है और जल्द ही कानूनी सलाहकारों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्कासित या प्रतिद्वंद्वी नेता तृणमूल कांग्रेस के नाम पर गतिविधियां चलाने या पार्टी कार्यालयों में जबरन प्रवेश करने की कोशिश करते हैं तो उनके खिलाफ अदालत के आदेश के आधार पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। (नोट: यह दावा ऋतब्रत बनर्जी गुट की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया है। खबर में उन्हीं के दावों और अदालत के आदेश की उनकी व्याख्या को प्रस्तुत किया गया है।)



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