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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को अब तक 150 संदिग्धों के नाम मिले हैं और करीब 25 लोगों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है वहीं ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। सूत्रों की माने तो राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी का मामला अब सिर्फ चोरी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि मंदिर ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था, दान राशि की गिनती और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एसआईटी की जांच में अब तक करीब 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से करीब 25 लोगों पर कार्रवाई के आसार जताए जा रहे हैं। जांच के बाद बढ़ सकती है बड़ी कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और शनिवार को छठे दिन भी टीम राम मंदिर परिसर पहुंची। माना जा रहा है कि जांच पूरी करने के बाद टीम आज ही लखनऊ लौटेगी और सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। रिपोर्ट के आधार पर मंदिर ट्रस्ट और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर सवाल इस मामले में सबसे अधिक चर्चा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि दोनों पर कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है और उन्हें पद से हटाया जा सकता है। मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव की भूमिका भी जांच के दायरे में है और उन्हें भी जिम्मेदारी से हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है। चढ़ावे की गिनती व्यवस्था पर उठे सवाल मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें कई ऐसे लोग शामिल बताए जा रहे हैं जो मंदिर में दान राशि की गिनती से जुड़े थे। सवाल यह है कि श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई गई रकम की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में आखिर ऐसी चूक कैसे हुई कि करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की आशंका खड़ी हो गई। छह घंटे तक चली पूछताछ एसआईटी ने शुक्रवार को मंदिर परिसर में करीब छह घंटे तक जांच की। इस दौरान चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव से अलग-अलग पूछताछ की गई। टीम ने एसबीआई बैंक के मैनेजर और कैशियर से भी सवाल किए ताकि यह पता लगाया जा सके कि दान राशि की गिनती, जमा प्रक्रिया और रिकॉर्ड में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। एसआईटी जिन लोगों से पूछताछ कर चुकी है, उन्हें अगले आदेश तक बाहर न जाने की चेतावनी दी गई है। इससे साफ है कि जांच एजेंसी मामले को गंभीरता से देख रही है और पूछताछ के दायरे में आए लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। कर्मचारी सोमेश आनंद की तलाश एसआईटी मंदिर कर्मचारी सोमेश आनंद से भी पूछताछ करना चाहती थी लेकिन वह टीम को नहीं मिले। सूत्रों के अनुसार, उनका मोबाइल फोन भी बंद बताया जा रहा है। सोमेश आनंद को मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव का भतीजा बताया जा रहा है इसलिए उनकी गैरमौजूदगी ने जांच को और संवेदनशील बना दिया है। अब तक दो करोड़ रुपये की रिकवरी चढ़ावा चोरी मामले में अब तक लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर करीब दो करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। ये सभी मंदिर में दान राशि की गिनती से जुड़े कार्यों में शामिल बताए जाते हैं। इसके अलावा 13 जून को रामशंकर उर्फ टिन्नू के घर से सोना भी मिला था, हालांकि सोने की मात्रा को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विपक्ष के आरोपों से बढ़ा दबाव इस मामले को लेकर राजनीतिक दबाव भी लगातार बढ़ता गया। समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने 07 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से पांच से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की चोरी हुई है। इसके बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। पीएमओ तक पहुंची शिकायत विवाद बढ़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 09 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग की। इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब कर ली। इसके बाद जांच की रफ्तार तेज हुई और अब एसआईटी की रिपोर्ट पर सबकी नजर टिकी है। ट्रस्ट की सफाई, लेकिन सवाल बरकरार मामले की शुरुआत में चंपत राय ने कहा था कि चढ़ावा चोरी जैसी कोई बात सामने नहीं आई है लेकिन एसआईटी जांच में संदिग्धों की लंबी सूची और करोड़ों रुपये की रिकवरी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत थी या फिर निगरानी व्यवस्था में ऊंचे स्तर पर भी बड़ी चूक हुई। रिपोर्ट से खुलेगा अगला रास्ता एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद यह साफ हो सकता है कि किन लोगों की भूमिका संदिग्ध मानी गई है और किन पर सीधी कार्रवाई होगी। फिलहाल अयोध्या से लेकर लखनऊ तक इस मामले को लेकर हलचल तेज है और राम मंदिर जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गया है।