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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को एक बार फिर “अमेरिकी क्षेत्र” बताकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। श्री ट्रंप ने दक्षिण कैरोलिना में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि अमेरिकी सैन्य नाकेबंदी के कारण इस सामरिक जलमार्ग पर फिलहाल वॉशिंगटन का नियंत्रण है वहीं ईरान ने उनके बयान को “वहम” करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। ‘हमें यह भी नहीं पता कि हम जीते या नहीं’ द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, रैली में ईरान युद्ध का जिक्र करते हुए श्री ट्रंप ने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि अमेरिका युद्ध जीता है या नहीं क्योंकि वह इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र की तरह देखते हैं। श्री ट्रंप दक्षिण कैरोलिना में सीनेट उम्मीदवार डारलाइन ग्राहम के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। डारलाइन दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम की बहन हैं और उनकी सीट पर स्थायी रूप से चुने जाने के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल हैं। ईरान पर बमबारी को लेकर किया मजाक श्री ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान ईरान पर दोबारा हमला करने को लेकर भी मजाक किया। शुक्रवार की रात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास काफी समय है और वह वापस जाकर ईरान पर “थोड़ी और बमबारी” कर सकते हैं।उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास सफल नहीं हो पाए हैं। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण बदला समुद्री यातायात अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और नौवहन पर सैन्य नाकेबंदी लागू कर रखी है। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, नाकेबंदी का पालन कराने के लिए दर्जनों व्यावसायिक जहाजों का रास्ता बदला गया है। उपलब्ध नवीनतम सेंटकॉम सामग्री में यह संख्या 91 बताई गई है जबकि पहले प्रकाशित रिपोर्ट में 68 जहाजों को मोड़े जाने का उल्लेख था। इस सैन्य दबाव का उद्देश्य ईरान की तेल निर्यात क्षमता और उससे होने वाली आमदनी को सीमित करना बताया जा रहा है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है। समुद्र के रास्ते होने वाली वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा सामान्य परिस्थितियों में इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग पर लंबे समय तक रुकावट आने से कच्चे तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर ईंधन की कीमतों, माल ढुलाई और महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। पहले भी दे चुके हैं क्षेत्र घोषित करने की धमकी गौरतलब है कि श्री ट्रंप ने इससे पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया था कि नाकेबंदी के कारण कोई जहाज अमेरिकी अनुमति के बिना इस रास्ते से नहीं गुजर सकता। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक नक्शा भी साझा किया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को “नया अमेरिकी क्षेत्र” बताया गया था। ईरान बोला—यह ट्रंप का भ्रम ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने श्री ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए इसे उनका “वहम” और “भ्रम” बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यह भ्रम या तो परिस्थितियां दूर करेंगी या ईरान स्वयं इसका जवाब देगा। तेहरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी एक देश का दावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था और क्षेत्रीय संप्रभुता के विरुद्ध है। शांति वार्ता अब भी बेनतीजा अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष छह महीने के करीब पहुंचने के बावजूद स्थायी शांति समझौता नहीं हो सका है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत में होर्मुज से जहाजों की आवाजाही, ईरान पर प्रतिबंध और सैन्य कार्रवाइयां प्रमुख विवाद बने हुए हैं। अमेरिका आर्थिक नाकेबंदी और समुद्री नियंत्रण के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहता है जबकि तेहरान प्रतिबंधों में राहत और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई समाप्त करने की मांग कर रहा है। तेल बाजार से लेकर भारत तक पड़ सकता है असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। भारत सहित एशिया के कई देश खाड़ी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और गैस आयात करते हैं। इस रास्ते पर सैन्य टकराव या जहाजों की आवाजाही में बाधा बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो सकता है। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल, विमान ईंधन, परिवहन लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।



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