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मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और बिहार पुलिस की संयुक्त टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए दो लोगों को हिरासत में लिया तथा उनके कब्जे से 500 रुपये के 176 संदिग्ध नोट सहित 88 हजार रुपये की जाली भारतीय मुद्रा बरामद की। खुफिया सूचना पर बिछाया गया जाल एसएसबी सूत्रों के अनुसार, 71वीं वाहिनी के कमांडेंट प्रफुल्ल कुमार को सूचना मिली थी कि कुछ लोग मोतिहारी से जाली भारतीय मुद्रा लेकर तस्करी के इरादे से लखौरा की ओर जाने वाले हैं। सूचना मिलते ही एसएसबी ने लखौरा थाना पुलिस के साथ जानकारी साझा की और उपनिरीक्षक रिषभ सिंह रावत के नेतृत्व में संयुक्त टीम गठित की गई। रात में नाकाबंदी, मोटरसाइकिल सवारों को रोका संयुक्त टीम ने गुरुवार रात मोतिहारी-लखौरा मार्ग पर नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहनों और व्यक्तियों की निगरानी शुरू की। इसी दौरान मोटरसाइकिल से जा रहे दो लोगों को रोककर पूछताछ की गई। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर सदर मोतिहारी के अंचल अधिकारी सुनील कुमार की मौजूदगी में नियमानुसार तलाशी ली गई। 500 रुपये के 176 नोट बरामद तलाशी के दौरान शेख नूर आलम के कब्जे से 500 रुपये मूल्यवर्ग के 176 नोट बरामद किए गए। इन नोटों की कुल अंकित कीमत 88 हजार रुपये बताई गई है। टीम ने सभी नोटों को जब्त कर जांच के लिए सुरक्षित कर लिया। फीकी छपाई और एक जैसी क्रम संख्या ने बढ़ाया शक संयुक्त टीम की प्रारंभिक जांच में नोटों की छपाई की गुणवत्ता फीकी मिली। कई नोटों पर एक जैसी क्रम संख्या अंकित होने की बात भी सामने आई। इन्हीं विसंगतियों के आधार पर मुद्रा के प्रथमदृष्टया जाली होने का संदेह जताया गया है। दोनों संदिग्धों की पहचान हुई हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान चिरैया थाना क्षेत्र के बसवरिया निवासी 38 वर्षीय शेख नूर आलम और महुआवा निवासी 35 वर्षीय मोहम्मद इस्तकार के रूप में हुई है। दोनों को गुरुवार की मध्य रात्रि में हिरासत में लिया गया। लखौरा थाना पुलिस को सौंपे गए संदिग्ध दोनों संदिग्धों और बरामद नोटों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए लखौरा थाना पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई। पुलिस अब दोनों से पूछताछ कर संदिग्ध मुद्रा के स्रोत और उसके संभावित नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। संगठित गिरोह की भूमिका की जांच अधिकारियों का कहना है कि पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नोट कहां से लाए गए थे, किसे सौंपे जाने थे और क्या इसके पीछे किसी संगठित तस्करी गिरोह की भूमिका है। भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा इलाका होने के कारण मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच के बाद ही होगी अंतिम पुष्टि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बरामद नोट वास्तव में जाली हैं या नहीं, इसकी अंतिम पुष्टि विशेषज्ञ जांच और विधिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल मामला संदिग्ध जाली मुद्रा की बरामदगी के आधार पर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।