Full Story
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन पर सदस्य देशों से समूह के फैसलों को समयबद्ध तरीके से लागू कर उनके परिणाम जमीनी स्तर तक पहुंचाने का आह्वान करते हुए कहा कि ब्रिक्स की व्यवस्थाएं केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि लोगों के वास्तविक जीवन में उनका प्रभाव दिखाई देना चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि नई दिल्ली शिखर सम्मेलन ने ब्रिक्स के प्रति भरोसे को और मजबूत किया है। संगठन अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है और दुनिया उससे केवल विचारों तथा प्रतिबद्धताओं की घोषणा नहीं, बल्कि ठोस परिणामों की अपेक्षा कर रही है। दो दिवसीय सम्मेलन का संपर्क कार्यक्रम के साथ समापन ब्रिक्स का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन रविवार को समूह के संपर्क कार्यक्रम के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के नेताओं के अलावा संपर्क कार्यक्रम के तहत आमंत्रित देशों के शासनाध्यक्षों और राष्ट्राध्यक्षों ने भी भाग लिया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सभी नेताओं की सक्रिय सहभागिता और मूल्यवान योगदान के लिए आभार जताते हुए कहा कि उनके विचारों और सुझावों ने ब्रिक्स सहयोग को व्यापकता देने के साथ उसे अधिक गहरा भी बनाया है। नई दिल्ली घोषणापत्र पर पहले दिन बनी सर्वसम्मति शिखर सम्मेलन के पहले दिन नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। घोषणापत्र में नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक संस्थाओं में सुधार का समर्थन किया गया। इसके साथ पश्चिम एशिया सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया गया। ब्रिक्स देशों ने अलग-अलग क्षेत्रों में आपसी सहयोग की नई पहल करने और साझा चुनौतियों से मिलकर निपटने का संकल्प भी व्यक्त किया। ‘समयबद्ध कार्रवाई से जुड़ें सभी परिणाम’ प्रधानमंत्री ने अपने समापन संबोधन में सदस्य देशों के नेताओं को महत्वपूर्ण घोषणापत्र को अंतिम रूप देने में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “हमें सभी परिणामों को समयबद्ध कार्रवाई और लास्ट-माइल इम्पैक्ट से जोड़ना होगा। हमारे फ्रेमवर्क केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि वास्तविक जीवन में प्रभाव पैदा करें—इसके लिए हम सब मिलकर काम करेंगे।” ‘ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं’ श्री मोदी ने कहा कि पिछले दो दिनों की चर्चाओं ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह नहीं, बल्कि समाधानों का एक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र है। उन्होंने कहा, “आप सभी की मौजूदगी ब्रिक्स की बढ़ती प्रासंगिकता, खुलेपन और समावेशिता का प्रमाण है। सदस्य देशों के विचारों और सुझावों ने समूह के सहयोग का दायरा बढ़ाने के साथ उसकी गहराई भी बढ़ाई है। घोषणापत्र देगा भविष्य के सहयोग को दिशा सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विश्वास जताया कि नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में अपनाया गया घोषणापत्र ब्रिक्स की साझा सोच और भविष्य के सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा। इस घोषणापत्र में वैश्विक व्यापार, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, शांति, सुरक्षा और सदस्य देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। उनका जोर इस बात पर रहा कि साझा सोच को अब ठोस कार्यक्रमों और समयबद्ध क्रियान्वयन में बदलना होगा। तीसरे दशक में ब्रिक्स के सामने नई जिम्मेदारी प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स अब अपने अस्तित्व के तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है। संगठन की बढ़ती प्रासंगिकता के साथ उससे दुनिया की अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि अब केवल विचार रखना और प्रतिबद्धताओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं होगा। ब्रिक्स को यह दिखाना होगा कि वह अपने फैसलों को वास्तविक परिणामों में बदल सकता है। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा, “मुझे विश्वास है कि हम साझा प्रयासों से इन अपेक्षाओं पर जरूर खरे उतरेंगे।” खुलापन और समावेशिता बनी ब्रिक्स की ताकत श्री मोदी ने सम्मेलन में सदस्य तथा आमंत्रित देशों की भागीदारी को ब्रिक्स के बढ़ते खुलेपन और समावेशी स्वरूप का प्रमाण बताया।उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के विचारों को साथ लेकर चलने की क्षमता ही ब्रिक्स सहयोग को व्यापक और प्रभावी बनाती है। यही विविधता समूह को वैश्विक समस्याओं के साझा समाधान तलाशने वाला मंच भी बनाती है। अगली कमान चीन के हाथ, वहीं होगा 19वां सम्मेलन प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स की अगली अध्यक्षता संभालने जा रहे चीन को शुभकामनाएं दीं। ब्रिक्स का 19वां शिखर सम्मेलन चीन में आयोजित करने की घोषणा की गई है। इसके साथ नई दिल्ली से निकले फैसलों और घोषणापत्र को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अगले अध्यक्ष देश के रूप में चीन को मिलेगी।



Comments
0