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मुंबई। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अभिनेत्री कुब्रा सैत ने योग को खुद से जुड़ने और अंदरूनी सुकून पाने का जरिया बताते हुए कहा कि इसका मकसद परफेक्ट बनना नहीं, बल्कि हर दिन खुद के लिए मौजूद रहना और आत्म-स्वीकृति के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखना है। "योग का मतलब सिर्फ पैर की उंगलियां छूना नहीं" कुब्रा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "लोग समझते हैं कि योग का मतलब पैर की उंगलियां छूना है, लेकिन मेरे लिए योग का मतलब खुद से जुड़ना और अपने अंदर लौटना है।" उनका मानना है कि योग सिर्फ फिजिकल फिटनेस नहीं, बल्कि मानसिक और जज़्बाती संतुलन का भी अहम हिस्सा है। हर दिन एक जैसा नहीं होता अपने तजुर्बे साझा करते हुए कुब्रा ने बताया कि जिंदगी में हर दिन एक जैसा नहीं होता। कुछ दिन ऐसे होते हैं जब सब आसान लगता है, जबकि कुछ दिनों में बैलेंस बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने लिखा, "40 साल की उम्र के बाद कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे जिस्म की हर मांसपेशी से अलग-अलग बात करनी पड़ रही हो।" हालांकि उनका कहना है कि योग का मकसद परफेक्ट बनना नहीं, बल्कि हर दिन खुद के लिए वक्त निकालना और मौजूद रहना है। खुद को कबूल करना भी योग का हिस्सा कुब्रा का कहना है कि योग हमें यह सिखाता है कि हमें अपनी कमियों और कमजोरियों को भी अपनाना चाहिए। उनका संदेश है कि लगातार कोशिश करना, खुद पर रहम करना और खुद को वैसे ही कबूल करना, जैसे हम हैं, असली कामयाबी है। चाहे योग के जरिए ताकत बढ़ानी हो, मन को सुकून देना हो, बैलेंस बनाना हो या सिर्फ कुछ पल खुद के साथ बिताने हों, कुब्रा मानती हैं कि हर छोटा कदम अहम होता है। उनके मुताबिक योग कोई मंजिल नहीं, बल्कि एक खूबसूरत सफर है। "योग हमारी विरासत है" वैश्विक योग समुदाय का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए कुब्रा ने कहा, "मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि इस खूबसूरत परिवार का हिस्सा हूं। योग हमारी विरासत है और इसे हमें संभालकर रखना चाहिए।"



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