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मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिकी आयोग की आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग वॉशिंगटन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ ने संगठन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी प्रशासन से उसके नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों और राजनयिक सम्मान से दूर रखने तथा धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। भागवत की यात्रा से पहले दो बयानों ने बढ़ाई हलचल यूएससीआईआरएफ के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखे पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आरएसएस से संबंध का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि संगठन से जुड़े समूहों ने ईसाइयों और मुसलमानों समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं। उन्होंने श्री भागवत की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा का जिक्र करते हुए इस घटनाक्रम को अमेरिकी नीति-निर्माताओं के लिए धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया। ज्ञात हो कि श्री भागवत इस वर्ष 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (एएचईएडी) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। https://x.com/USCIRF/status/2090125836468769074 ‘उच्चस्तरीय बैठक या राजनयिक सम्मान न दिया जाए’ आयोग के सदस्य जीन मिल्स ने अपने बयान में कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से किसी रूप में जुड़े हों, उच्चस्तरीय बैठक या विशेष राजनयिक शिष्टाचार नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने अमेरिकी सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाए गए आरएसएस सदस्यों के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है। https://x.com/USCIRF/status/2090125838792479042 रिपोर्ट में भारत पर क्या कहा गया यूएससीआईआरएफ की 2026 वार्षिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 के दौरान भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब हुई तथा धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को प्रभावित करने वाले नए कानून बनाए या लागू किए गए। रिपोर्ट ने कई राज्यों में धर्मांतरण-विरोधी कानूनों को अधिक कठोर बनाने, अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कथित भीड़ हिंसा, हिरासत और निष्कासन की घटनाओं का उल्लेख किया है। ये सभी निष्कर्ष यूएससीआईआरएफ के आकलन और आरोप हैं। भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश’ बनाने की सिफारिश आयोग ने अमेरिकी सरकार से भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के कथित “व्यवस्थित, लगातार और गंभीर उल्लंघनों” के लिए कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न , यानी विशेष चिंता वाला देश घोषित करने की सिफारिश की है। आयोग ने पहली बार 2004 में यह सिफारिश की थी और 2020 में इसे फिर दोहराया। इसके बाद 2021 से 2026 तक की रिपोर्टों में भी उसने भारत को सीपीसी सूची में शामिल करने की मांग की। यह केवल यूएससीआईआरएफ की सिफारिश है। किसी देश को इस श्रेणी में रखने का अंतिम निर्णय अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी प्रशासन के स्तर पर लिया जाता है। आरएसएस और रॉ पर लक्षित प्रतिबंध की मांग इससे पहले मार्च 2026 में आयोग की सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों की आलोचना की गई थी। इस रिपोर्ट की सबसे कड़ी सिफारिशों में भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) और आरएसएस जैसे संगठनों तथा संबंधित व्यक्तियों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की मांग शामिल है। आयोग ने कथित गंभीर धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार या उन्हें सहन करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं की संपत्ति फ्रीज करने तथा उनके अमेरिका प्रवेश पर रोक लगाने का सुझाव दिया है। व्यापार, सुरक्षा सहायता और हथियार बिक्री से भी जोड़ने का सुझाव यूएससीआईआरएफ ने भविष्य में अमेरिका की सुरक्षा सहायता और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार नीति को धार्मिक स्वतंत्रता में सुधार से जोड़ने की सिफारिश की है। रिपोर्ट ने अमेरिकी कानून के तहत भारत को हथियारों की बिक्री रोकने तक का सुझाव दिया और अमेरिकी कांग्रेस से कथित अंतरराष्ट्रीय दमन की वार्षिक रिपोर्टिंग से संबंधित विधेयक दोबारा लाने को कहा है। धर्मांतरण-विरोधी कानूनों पर उठाए सवाल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 28 में से 12 राज्यों में धर्मांतरण-विरोधी कानून लागू हैं। आयोग ने दावा किया कि 2025 में कुछ राज्यों ने इन कानूनों की परिभाषा और सजा को और कठोर बनाया। रिपोर्ट में उत्तराखंड में कथित अवैध धर्मांतरण की अधिकतम सजा 10 से बढ़ाकर 14 वर्ष किए जाने और राजस्थान में कुछ मामलों में आजीवन कारावास का प्रावधान होने का उल्लेख है। वक्फ कानून और अल्पसंख्यक संस्थानों का भी जिक्र यूएससीआईआरएफ ने वक्फ से जुड़े कानून और उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव पर भी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट ने कहा कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने और विवादित संपत्तियों पर सरकारी अधिकार बढ़ाने वाले प्रावधानों में से कुछ पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक या सीमा लगाई। कश्मीर हमले और उसके बाद की घटनाओं का उल्लेख रिपोर्ट में अप्रैल 2025 में कश्मीर में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले का उल्लेख है, जिसमें 26 लोगों की हत्या हुई थी। आयोग ने कहा कि इस घटना के बाद देश के कुछ हिस्सों में मुसलमानों के खिलाफ कथित हमले और तनाव बढ़ा। रिपोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों और बंगाली भाषी मुसलमानों से जुड़े हिरासत तथा निष्कासन के मामलों पर भी सवाल उठाए हैं। भारत का संवैधानिक पक्ष भी दर्ज रिपोर्ट ने स्वीकार किया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, उसका पालन करने तथा प्रचार करने का अधिकार देता है। इसके बावजूद आयोग ने आरोप लगाया कि 2014 के बाद लागू कई कानूनों और नीतियों का धार्मिक अल्पसंख्यकों पर असमान प्रभाव पड़ा है। आयोग की रिपोर्ट, अमेरिकी सरकार की नीति नहीं यह समझना महत्वपूर्ण है कि यूएससीआईआरएफ की वार्षिक रिपोर्ट और उसके सदस्यों के बयान सिफारिशें तथा आकलन हैं, वे अपने आप अमेरिकी सरकार की आधिकारिक विदेश नीति या प्रतिबंध आदेश नहीं बन जाते। उपलब्ध रिपोर्ट में फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा और दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक संवाद का भी उल्लेख है, जिससे साफ है कि आयोग की आलोचनात्मक सिफारिशों के समानांतर भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंध जारी रहे।



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