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नई दिल्ली। आईआरसीटीसी (भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम) से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव , उनकी पत्नी राबड़ी देवी , बेटे तेजस्वी यादव और कई अन्य की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को उनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के तहत आरोप तय कर दिए। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सुनाया आदेश मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने आरोप तय करने का आदेश पारित किया। अदालत ने श्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के अलावा लारा प्रोजेक्ट्स, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, सुजाता होटल्स, विनय कोचर और विजय कोचर के खिलाफ भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए हैं। सात लोगों को अदालत से राहत इसी मामले में अदालत ने श्री लालू यादव के दामाद राहुल यादव के अलावा गौरव गुप्ता, नाथ मल कंकरनिया, विजय त्रिपाठी, डीएन तुलश्यान, राजीव रेलन और अभिषेक फाइनेंस को डिस्चार्ज कर दिया। इस तरह कोर्ट ने कुछ आरोपियों के खिलाफ मुकदमे को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया, जबकि सात लोगों को इस चरण पर राहत मिली। पहले भी तय हो चुके हैं भ्रष्टाचार और साजिश के आरोप यह मामला पहले भी अदालत में अहम मोड़ ले चुका है। 13 अक्टूबर 2025 को अदालत ने लालू प्रसाद यादव पर भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से जुड़े आरोप तय किए थे। वहीं, श्री तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पर भी साजिश और धोखाधड़ी समेत कई अपराधों के तहत आरोप तय किए गए थे। सीबीआई का क्या है आरोप केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई का आरोप है कि श्री लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए एक निजी फर्म को ठेका दिलाने के बदले अपने परिवार के लिए कीमती जमीन और शेयर कथित तौर पर रिश्वत के रूप में स्वीकार किए। सीबीआई के अनुसार, लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान 2004 से 2009 के बीच रांची और पुरी स्थित दो आईआरसीटीसी होटलों को सुजाता होटल्स नाम की कंपनी को लीज पर दिया गया। टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप जांच एजेंसी का दावा है कि इन होटलों को लीज पर देने की प्रक्रिया में टेंडर व्यवस्था से कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई।आरोप है कि इसके बदले करोड़ों रुपये की जमीन ऐसी कंपनी को ट्रांसफर की गई, जिसे राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से कथित रूप से जुड़ा बताया गया है। सीबीआई का कहना है कि यह जमीन उसके बाजार मूल्य के मुकाबले बहुत कम कीमत पर ट्रांसफर की गई थी। सीबीआई की एफआईआर के बाद ईडी ने दर्ज किया पीएमएलए केस सीबीआई की एफआईआर के आधार पर बाद में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया। अब उसी मनी लॉन्ड्रिंग केस में अदालत ने आरोप तय किए हैं, जिससे मुकदमे की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। लालू परिवार ने जांच पर उठाए सवाल श्री लालू यादव और उनके परिवार ने जांच एजेंसियों के आरोपों को चुनौती दी है। श्री यादव के परिवार का कहना है कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है और पूरा मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है। यानी अदालत में आरोप तय होना दोषसिद्धि नहीं है और अब अभियोजन पक्ष को मुकदमे के दौरान अपने आरोप सबूतों के आधार पर साबित करने होंगे। बचाव पक्ष की ओर से कौन हुआ पेश मामले में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, राबड़ी देवी और राहुल यादव की ओर से अधिवक्ता वरुण जैन, नवीन कुमार और सुमित सिंह अदालत में पेश हुए।