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मुंबई। ऑटो, आईटी और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में खरीददारी के दम पर शेयर बाजार गुरुवार को लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और पश्चिम एशिया के तनाव से कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव के कारण कारोबार के दौरान बाजार में तेज उठापटक बनी रही। सेंसेक्स 77,928 और निफ्टी 24,317 पर बंद बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 273.55 अंक यानी 0.35 प्रतिशत चढ़कर 77,928.15 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 66.95 अंक यानी 0.28 प्रतिशत बढ़कर 24,317.15 अंक पर पहुंच गया। बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीददारी रही लेकिन मझौली और छोटी कंपनियों पर बिकवाली का दबाव दिखा। बीएसई मिडकैप सूचकांक 0.29 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक 0.83 प्रतिशत गिर गया। ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी क्षेत्रवार कारोबार में ऑटो सेक्टर सबसे आगे रहा। तेल एवं गैस, आईटी, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद, मीडिया और धातु क्षेत्र के सूचकांक भी बढ़त के साथ बंद हुए। इसके उलट रियल्टी, रसायन, वित्तीय सेवाएं, बैंकिंग, सीमेंट और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। मारुति और महिंद्रा ने संभाला बाजार सेंसेक्स की कंपनियों में मारुति सुजुकी और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर करीब पौने दो प्रतिशत चढ़े। रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक और पावरग्रिड में भी एक से डेढ़ प्रतिशत तक की मजबूती रही। इसके अलावा टेक महिंद्रा, सन फार्मा, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर हरे निशान में बंद हुए। अडानी पोर्ट्स सबसे ज्यादा टूटा गिरने वाले शेयरों में अडानी पोर्ट्स सबसे आगे रहा और इसमें करीब सवा तीन प्रतिशत की गिरावट आई। इंडिगो, बजाज फिनसर्व, बीईएल, एक्सिस बैंक, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, कोटक महिंद्रा बैंक और आईटीसी के शेयर भी नुकसान में रहे। फेड के फैसले के बाद भी बाजार रहा सतर्क अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, जो बाजार की उम्मीद के अनुरूप था। हालांकि महंगाई पर नियंत्रण को लेकर फेड का रुख सख्त बना रहा और कई नीति-निर्माताओं ने आगे दरें बढ़ाने की संभावना के संकेत दिए। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने निकट भविष्य में ब्याज दर बढ़ने की आशंका को मजबूत किया, जिससे वैश्विक निवेशक सतर्क रहे। कच्चे तेल और पश्चिम एशिया के तनाव से बढ़ी चिंता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर उतार-चढ़ाव देखा गया। इससे वैश्विक महंगाई और भारत के आयात खर्च को लेकर चिंता बनी रही। इसी वजह से घरेलू बाजार पूरे दिन सीमित दायरे में रहा और कई बार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एफआईआई की खरीदारी और मजबूत रुपये से मिला सहारा वैश्विक दबाव के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों की बढ़ती खरीदारी, रुपये की मजबूती और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के उत्साहजनक संकेतों ने बाजार की धारणा को संभाले रखा। निवेशकों ने गिरावट को चुनिंदा मजबूत शेयरों में खरीदारी के मौके के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे दिन बढ़त बचाने में सफल रहे।