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पटना। जन सुराज ने बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की लंबे समय से मजबूत गढ़ मानी जाने वाली पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाकर भाजपा के गढ़ में सीधी चुनौती पेश कर दी है। जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने रविवार को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में पीके को बांकीपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाए जाने का ऐलान किया। श्री किशोर ने उम्मीदवार बनाए जाने के बाद कहा, “चार सालों से जन सुराज ही मेरी जिंदगी है। पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा से निभाने का प्रयास करूंगा। बांकीपुर से जीत मिलती है तो इससे पार्टी का मनोबल बढ़ेगा और आगे की लड़ाई को ताकत मिलेगी।” भाजपा के गढ़ में पीके की एंट्री, सियासी मुकाबला होगा दिलचस्प बांकीपुर सीट पर उपचुनाव की नौबत भाजपा नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद आई है। श्री नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने और अप्रैल 2026 में राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई। तभी से अटकलें लगाई जा रही थीं कि पीके यहां से चुनाव लड़ सकते हैं। कुछ दिन पहले खुद पीके ने भी संकेत दिया था कि अगर उनके मैदान में उतरने से बांकीपुर जैसी भाजपा की मजबूत सीट हिलती है, तो वे चुनाव लड़ने को तैयार हैं। अब उस बयान पर मुहर लग गई है। बांकीपुर: भाजपा का अभेद्य किला, अब पीके की सबसे बड़ी परीक्षा बांकीपुर विधानसभा सीट बिहार की सबसे प्रतिष्ठित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीटों में गिनी जाती है। 1995 से इस सीट पर लगातार भाजपा का कब्जा रहा है। पहले श्री नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके बेटे नितिन नवीन ने इस सीट पर मजबूत पकड़ बनाए रखी। नितिन नवीन यहां से पांच बार विधायक रह चुके हैं। इस सीट पर व्यापारी वर्ग और कायस्थ मतदाता भाजपा की सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी सिर्फ एक चुनावी दांव नहीं, बल्कि बीजेपी के मजबूत शहरी वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश मानी जा रही है। 2025 में नहीं लड़ा चुनाव, अब खुद मैदान में उतरे पीके पीके ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में खुद कोई सीट नहीं लड़ी थी। उनकी पार्टी जन सुराज को उस चुनाव में सिर्फ 3.34% वोट शेयर मिला और पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। बाद में खुद पीके ने स्वीकार किया था कि चुनाव न लड़ना उनकी “रणनीतिक भूल” थी। अब बांकीपुर से चुनाव लड़ने का फैसला उसी भूल को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह चुनाव पीके के लिए सिर्फ सीट जीतने की लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता और जन सुराज की जमीन साबित करने की भी चुनौती है। ग्रामीण जमीन के बाद अब शहरी अग्निपरीक्षा जन सुराज ने अब तक ग्रामीण बिहार में पदयात्राओं और जनसंपर्क अभियानों के जरिए अपनी मजबूत पहचान बनाई है। लेकिन पटना का बांकीपुर पूरी तरह अलग राजनीतिक और सामाजिक समीकरण वाला इलाका है। यहां शहरी, शिक्षित और लंबे समय से भाजपा समर्थक मतदाताओं का प्रभाव है। यही वजह है कि बांकीपुर का उपचुनाव प्रशांत किशोर की राजनीतिक स्वीकार्यता, संगठन क्षमता और चुनावी रणनीति—तीनों की असली परीक्षा बन गया है। अगर पीके यहां मुकाबला मजबूत करते हैं या जीत दर्ज करते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में जन सुराज के लिए बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। सियासी संदेश साफ: अब पीछे हटने के मूड में नहीं जन सुराज श्री किशोर को बांकीपुर से उतारकर जन सुराज ने यह साफ संदेश दिया है कि पार्टी अब प्रयोग नहीं, सीधा राजनीतिक संघर्ष चाहती है। भाजपा के सबसे मजबूत शहरी गढ़ में पीके की एंट्री ने इस उपचुनाव को अचानक हाई-प्रोफाइल बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि रणनीति के मास्टर कहे जाने वाले पीके चुनावी मैदान में खुद कितने असरदार साबित होते हैं। गौरतलब है कि बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव के लिए 06 जुलाई से 13 जुलाई तक नामांकन पर्चा दाखिल किए जाएंगे। 14 जुलाई को पर्चों की जांच होगी। इसके बाद 16 जुलाई तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। इस सीट के लिए 30 जुलाई को वोटिंग और 03 अगस्त को काउंटिंग होगी।



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