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रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को बड़ा झटका देते हुए आदेश दिया है कि ग्राहक को बेची गई ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार वापस लेकर उसी मॉडल की E20 पेट्रोल के अनुकूल नई कार 45 दिनों के भीतर दी जाए। आयोग ने कहा कि ग्राहक को यह नहीं बताना कि कार E20 पेट्रोल के अनुरूप नहीं है और समस्या का स्थायी समाधान नहीं देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार है। क्या है पूरा मामला डॉ. प्रेमराज देवता ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत आयोग में शिकायत दायर की थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने 3 जून 2024 को मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड डेल्टा प्लस 1.5 खरीदी थी। हालांकि यह कार जनवरी 2023 में बनी थी। शिकायत के अनुसार, खरीद के करीब पांच महीने बाद ही कार बार-बार खराब होने लगी। अधिकृत सर्विस सेंटर में जांच के दौरान पेट्रोल में गड़बड़ी बताकर फ्यूल टैंक साफ किया गया, लेकिन कुछ समय बाद वही समस्या फिर सामने आ गई। लैब जांच में मिला एथेनॉल शिकायतकर्ता ने बताया कि पेट्रोल का नमूना सरकारी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया, जिसमें एथेनॉल की मौजूदगी पाई गई। इसके बावजूद फ्यूल बदलने, टैंक साफ कराने और दोबारा पेट्रोल भरवाने के बाद भी कार बार-बार बंद होती रही। मारुति और डीलर ने क्या कहा मारुति सुजुकी और डीलर ने आयोग में कहा कि कार में कोई निर्माण दोष (Manufacturing Defect) नहीं है। उनके अनुसार, खराब गुणवत्ता वाले पेट्रोल के कारण समस्या आई, जो वारंटी के दायरे में नहीं आती। इसलिए वे कार बदलने या मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। आयोग ने क्यों दिया ग्राहक के पक्ष में फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद आयोग ने माना कि केवल कार की मरम्मत करना पर्याप्त समाधान नहीं था। आयोग ने पाया कि: कार जनवरी 2023 में बनी थी और *E20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं थी। * जून 2024 में कार बेचते समय ग्राहक को इस महत्वपूर्ण तथ्य की जानकारी नहीं दी गई। * बार-बार मरम्मत और फ्यूल टैंक साफ करने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई। * कंपनी ने कार वापस लेकर E20 इंजन वाली नई कार देने से इनकार किया। आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना। आयोग ने क्या आदेश दिया उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुजुकी और डीलर को निर्देश दिया कि: * 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की पुरानी कार वापस लेकर E20 पेट्रोल के अनुकूल उसी मॉडल की नई कार उपलब्ध कराई जाए। यदि तय समय में कार नहीं बदली जाती, तो ग्राहक को 20,50,494 रुपये लौटाए जाएं। इसमें: * 18,29,000 रुपये कार की कीमत, * 1,86,850 रुपये आरटीओ शुल्क, * 34,644 रुपये बीमा प्रीमियम शामिल है। इसके अलावा ग्राहक को एक लाख रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 10,000 रुपये मुकदमे का खर्च भी 45 दिनों के भीतर दिया जाए।आदेश का पालन नहीं होने पर इन राशियों पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। फैसले का क्या मतलब है यह फैसला उन वाहन खरीददारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो E20 पेट्रोल और वाहन की तकनीकी अनुकूलता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आयोग ने साफ किया कि वाहन बेचते समय ग्राहक को उसकी तकनीकी सीमाओं की पूरी जानकारी देना निर्माता और डीलर की जिम्मेदारी है। यदि ऐसा नहीं किया जाता और इससे ग्राहक को नुकसान होता है, तो इसे उपभोक्ता कानून के तहत सेवा में कमी माना जा सकता है।



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