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नई दिल्ली। पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों और छात्रों की आत्महत्या के मामलों की जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें अनशन खत्म करने की अपील करने के बजाय लोग 20 जुलाई को प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च में शामिल हों। श्री वांगचुक ने गुरुवार को 19वें दिन भी उन्होंने अपना अनशन जारी रखा और कहा, “सरकार की ओर से कोई जवाब आए बिना अनशन तोड़ना उनके आंदोलन को कमजोर कर देगा।” इस बीच डॉक्टरों ने बताया कि वांगचुक का 9 किलो से ज्यादा वजन घट चुका है , हालांकि फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। 'अगर मैं खा लूं तो सरकार को क्या संदेश जाएगा' वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें हजारों संदेश मिल रहे हैं, जिनमें लोग अनशन खत्म करने की अपील कर रहे हैं। कई वरिष्ठ नेता भी उनसे मिले और चिंता जताई। लेकिन उन्होंने कहा कि अगर वह बिना किसी सरकारी प्रतिक्रिया के अनशन तोड़ देंगे तो सरकार को यही संदेश जाएगा कि प्रदर्शन करो और फिर चुपचाप घर लौट जाओ, जवाबदेही की कोई जरूरत नहीं। उन्होंने सवाल किया कि उनके अनशन खत्म करने से आखिर बदलेगा क्या? इसलिए लोगों से अपील है कि वे आंदोलन को मजबूत करने के लिए 20 जुलाई को संसद मार्च में शामिल हों। छात्रों से भी की खास अपील श्री वांगचुक ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों से भी संसद मार्च में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र और राजनीति को समझने का वास्तविक पाठ होगा और युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। 19 दिन में 9 किलो से ज्यादा वजन घटा वांगचुक की सेहत पर नजर रख रहे वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सतीश लांबा ने बताया कि 19 दिनों के अनशन में उनका वजन 9 किलो से ज्यादा कम हो गया है। फिलहाल उनका ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और नाड़ी सामान्य सीमा में हैं तथा वह मानसिक रूप से पूरी तरह सतर्क हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि लगातार लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर अब ऊर्जा के लिए वसा और मांसपेशियों का इस्तेमाल कर रहा है। यूरिक एसिड बढ़ रहा है और यदि अनशन लंबा चला तो किडनी पर भी असर पड़ सकता है। जबरन खाना खिलाने की मांग पहुंची हाईकोर्ट इस बीच दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर श्री वांगचुक को तत्काल सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने और जरूरत पड़ने पर जबरन भोजन देने की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यदि चिकित्सकीय हस्तक्षेप जरूरी हुआ तो पहले उनकी सहमति ली जाएगी और जरूरत पड़ने पर नसों के जरिए तरल पदार्थ देना ज्यादा सुरक्षित विकल्प होगा। क्या है आंदोलन की मांग सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। संगठन की मांग है कि पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षाओं में गड़बड़ियों और छात्रों की आत्महत्या के मामलों की जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। इसी मांग को लेकर 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 'चलो संसद' मार्च का आह्वान किया गया है।