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मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते से बने सकारात्मक माहौल के बीच निवेशकों की जोरदार खरीदारी के दम पर घरेलू शेयर बाजार लगातार चौथे कारोबारी दिन तेजी के साथ बंद हुए, जिससे सेंसेक्स 77 हजार अंक के पार पहुंच गया और निफ्टी भी एक महीने से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। 77 हजार के पार पहुंचा सेंसेक्स बीएसई का सेंसेक्स बुधवार को 347 अंकों की छलांग लगाकर 77,155.62 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 96 अंकों की बढ़त के साथ 24,085.70 के स्तर पर पहुंच गया। दोनों सूचकांक 8 मई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुए। वेस्ट एशिया से आई गुड न्यूज, बाजार में बढ़ा कॉन्फिडेंस बाजार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता माना जा रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई सामान्य बनी रहेगी। इसी उम्मीद ने बाजार में पॉजिटिव सेंटिमेंट को मजबूत किया। सिर्फ बड़े शेयर नहीं, स्मॉलकैप-मिडकैप भी चमके बाजार की तेजी सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी तक सीमित नहीं रही। निफ्टी मिडकैप-50 में 0.30 फीसदी और स्मॉलकैप-100 में 0.79 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक बाजार में भी बना हुआ है। आईटी और मेटल स्टॉक्स बने रैली के हीरो दिनभर के कारोबार में आईटी, मेटल, पब्लिक सेक्टर बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में शानदार खरीदारी देखने को मिली। सबसे ज्यादा चर्चा में रहा ट्रेंट, जिसका शेयर 7 फीसदी से ज्यादा उछल गया। इसके अलावा बीईएल, टाटा स्टील, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, टीसीएस, सन फार्मा, टाइटन और एसबीआई जैसे दिग्गज शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इन शेयरों ने किया निराश जहां ज्यादातर सेक्टर हरे निशान में रहे, वहीं ऑटो और रियल्टी शेयरों में दबाव देखने को मिला। बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स और आईटीसी के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार का ब्रॉड पिक्चर क्या कहता है? एनएसई पर कारोबार करने वाली 3,430 कंपनियों में से 1,921 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,396 शेयरों में गिरावट रही। यह संकेत देता है कि बाजार में खरीदारी का रुझान व्यापक स्तर पर बना हुआ है। आगे किस पर रहेगी नजर? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान वार्ता, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। यदि वैश्विक माहौल सकारात्मक बना रहता है तो घरेलू बाजारों में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।