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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बिहार को बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर सौगात देते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच)-22 के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनबरसा खंड को 3590.73 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन बनाने की मंजूरी दी है, जिससे भारत-नेपाल सीमा तक संपर्क और तेज होगा, यात्रा समय घटेगा तथा व्यापार, पर्यटन और माल परिवहन को नई रफ्तार मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की हुई बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। करीब 82.58 किलोमीटर लंबी यह परियोजना हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (एचएएम) के तहत विकसित होगी और इसके पूरा होने के बाद बिहार से नेपाल सीमा तक यात्रा पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और आसान हो जाएगी। मुजफ्फरपुर से नेपाल बॉर्डर तक मिलेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर यह परियोजना मुजफ्फरपुर, मुक्सुदपुर, रुन्नी सैदपुर, थुम्मा, दुमरा, भुतही और सोनबरसा जैसे महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ते हुए भारत-नेपाल सीमा तक फोरलेन सड़क उपलब्ध कराएगी। यह मार्ग सोनबरसा बॉर्डर को एनएच-27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर) के जरिए मुजफ्फरपुर जैसे बड़े आर्थिक केंद्र से जोड़ेगा, जिससे सीमा पार व्यापार और आवागमन को नई गति मिलेगी। जाम से मिलेगी राहत, सफर होगा तेज और सुरक्षित फोरलेन बनने के बाद इस पूरे मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा। परियोजना को 100 किलोमीटर प्रति घंटा और 80 किलोमीटर प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड के अनुरूप तैयार किया जाएगा। सड़क के बीच कहीं भी समतल स्तर का खुला कट नहीं होगा, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी और यात्रा अधिक सुरक्षित बनेगी। बिहार के व्यापार और उद्योग को मिलेगा बड़ा फायदा यह कॉरिडोर केवल सड़क नहीं, बल्कि बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए नई लाइफलाइन साबित होगा। इसके जरिए बरौनी औद्योगिक क्षेत्र , मेगा फूड पार्क , रेलवे स्टेशन और अन्य लॉजिस्टिक्स हब तक माल की आवाजाही तेज होगी। कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन भी मजबूत होगी और परिवहन लागत घटेगी। नेपाल के साथ व्यापार को मिलेगी नई उड़ान यह परियोजना भिट्ठामोड़ लैंड पोर्ट के जरिए भारत-नेपाल के बीच माल और यात्रियों की आवाजाही को और आसान बनाएगी। बेहतर सड़क संपर्क से सीमा पार व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक गतिविधियां मजबूत होंगी। जानकी मंदिर और बौद्ध सर्किट तक पहुंच होगी आसान फोरलेन परियोजना का फायदा पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को भी मिलेगा। इस सड़क से सीतामढ़ी स्थित जानकी पुनौरा धाम , माता जानकी मंदिर , बाबा गरीबनाथ मंदिर और बौद्ध सर्किट तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज होगी। 7 बड़े पुल, 3 रेलवे ओवरब्रिज और 2 फ्लाईओवर बनेंगे इस महत्वाकांक्षी परियोजना में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसके तहत 7 बड़े पुल बनाए जाएंगे, जिनमें बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा प्रमुख पुल शामिल है। तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण होगा। दो फ्लाईओवर बनाए जाएंगे, जिनकी लंबाई क्रमशः 1,170 मीटर और 270 मीटर होगी। इन संरचनाओं से ट्रैफिक निर्बाध रहेगा और यात्रा का समय कम होगा। ईंधन बचेगा, सड़क सुरक्षा बढ़ेगी सरकार का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद यात्रा समय कम होगा, वाहनों की परिचालन लागत घटेगी और ईंधन की बचत होगी। साथ ही सड़क सुरक्षा बेहतर होने से दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है। पीएम गति शक्ति योजना से जुड़ी है परियोजना यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य सड़क, रेलवे, उद्योग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़कर तेज, आधुनिक और एकीकृत परिवहन व्यवस्था तैयार करना है। बिहार के विकास को मिलेगी नई रफ्तार इस फोरलेन परियोजना से चार औद्योगिक एस्टेट , एक मेगा फूड पार्क , दो प्रमुख रेलवे स्टेशन (मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी) तथा कई सामाजिक और धार्मिक केंद्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उत्तर बिहार में व्यापार, पर्यटन, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी नई रफ्तार देगी।