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ताशकंद। भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने रिश्तों को नई ऊंचाई देते हुए रणनीतिक साझेदारी को समग्र रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने और वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा एक अरब डॉलर से बढ़ाकर पांच अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच ताशकंद में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने खनिज संसाधन, आयुर्वेद, पर्यटन, शिक्षा, पर्यावरण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान समेत 11 क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए। रणनीतिक साझेदारी के 15 साल पूरे, संबंधों को मिला नया दर्जा दो दिन की उज्बेकिस्तान यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ वार्ता के बाद कहा कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के 15 वर्ष पूरे हो रहे हैं और इस विशेष अवसर पर इसे समग्र रणनीतिक साझेदारी में बदलने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संबंधों के इस नए स्वरूप को तेज गति और ठोस परिणामों के साथ आगे बढ़ाने के लिए महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने उज्बेकिस्तान की अपनी चौथी यात्रा को दोनों देशों के बीच निकटता, गहरे समन्वय और मजबूत मित्रता का प्रतीक बताया। एक अरब डॉलर पार कर चुका व्यापार, अब पांच गुना बढ़ाने की तैयारी श्री मोदी ने बताया कि भारत और उज्बेकिस्तान का द्विपक्षीय व्यापार पहले ही एक अरब डॉलर का स्तर पार कर चुका है। अब दोनों देशों ने इसे 2030 तक पांच अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देश बाजार तक पहुंच आसान करेंगे, परिवहन और संपर्क व्यवस्था मजबूत करेंगे, बैंकिंग सहयोग बढ़ाएंगे, भुगतान प्रणालियों को सरल बनाएंगे और व्यापारिक बाधाओं को व्यवस्थित तरीके से दूर करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्थिक संबंधों के विस्तार से दोनों देशों के उद्योगों, निवेशकों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। यूपीआई से उज्बेकिस्तान में भुगतान होगा आसान भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को उज्बेकिस्तान में बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और उज्बेकिस्तान के नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर के बीच वाणिज्यिक समझौता हुआ है। इसके तहत भारतीय यूपीआई एप के जरिए उज्बेकिस्तान में व्यापारिक भुगतान के लिए वहां के राष्ट्रीय क्यूआर कोड को स्कैन किया जा सकेगा। इससे भारतीय यात्रियों और व्यापारियों के लिए भुगतान करना आसान होगा तथा दोनों देशों के बीच डिजिटल आर्थिक संपर्क मजबूत होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से परमाणु ऊर्जा तक बढ़ेगा सहयोग दोनों देशों ने भविष्य की तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई है। इनमें डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, बुनियादी ढांचा विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि इन क्षेत्रों में सहयोग भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाएगा। खनिज संसाधनों समेत 11 क्षेत्रों में समझौते प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच 11 समझौता ज्ञापनों और करारों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें शामिल हैं- 1. सांस्कृतिक आदान-प्रदान 2. प्राचीन बौद्ध स्थलों का संरक्षण 3. अभिलेखीय सहयोग 4. आयुर्वेद 5. भूविज्ञान और खनिज संसाधन 6. पर्यटन 7. राजनयिक प्रशिक्षण 8. आर्थिक और वित्तीय संवाद 9. पर्यावरण संरक्षण 10. उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान 11. गुजरात और समरकंद क्षेत्र के बीच साझेदारी इन समझौतों से सरकारी स्तर के साथ-साथ शिक्षा, शोध, संस्कृति और स्थानीय प्रशासन के बीच भी सीधा संपर्क बढ़ेगा। रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन और सह-विकास पर जोर श्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच करीबी रक्षा और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधा संपर्क बढ़ाया जाएगा। हथियारों और रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन तथा सह-विकास को भी बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। आतंकवाद के खिलाफ ‘शून्य सहनशीलता’ का साझा संकल्प भारत और उज्बेकिस्तान ने आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद को पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्पष्ट किया कि इन चुनौतियों के खिलाफ दोनों देशों की शून्य सहनशीलता की नीति आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में शांति, स्थिरता और विकास के लिए सुरक्षा सहयोग बेहद जरूरी है और दोनों देश इस दिशा में मिलकर काम करते रहेंगे। आयुर्वेद और औषधीय जड़ी-बूटियों में साझेदारी कृषि और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया गया है। दोनों देश खाद्य सुरक्षा मजबूत करने और एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करेंगे। औषधीय जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद पर हुए समझौते से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों, शोध और उपचार से जुड़े साझा प्रयासों को बढ़ावा मिलेगा। उज्बेकिस्तान में हिंदी के लिए 100 छात्रवृत्तियां भारत ने उज्बेकिस्तान में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए लाल बहादुर शास्त्री छात्रवृत्ति के तहत 100 छात्रवृत्तियां देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के युवाओं, छात्रों और पेशेवरों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाना भारत की उच्च प्राथमिकता है। इससे नई पीढ़ी के बीच सांस्कृतिक समझ और आपसी संपर्क मजबूत होगा। बौद्ध धरोहरों के संरक्षण में भारत करेगा सहयोग दोनों देशों ने उज्बेकिस्तान में मौजूद प्राचीन बौद्ध विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों की सबसे गहरी जड़ें उनकी साझा सभ्यतागत विरासत में हैं। बौद्ध स्थलों का संरक्षण इस ऐतिहासिक जुड़ाव को और मजबूत करेगा। अरल सागर क्षेत्र के लिए 10 लाख डॉलर की मदद भारत ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए अरल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए 10 लाख डॉलर का अनुदान देने की घोषणा की है। अरल सागर क्षेत्र लंबे समय से गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रहा है। भारत की यह सहायता वहां हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण सुधार के प्रयासों में उपयोग की जाएगी। सिर्फ राजधानियों तक सीमित नहीं रहेगी साझेदारी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-उज्बेकिस्तान साझेदारी केवल नई दिल्ली और ताशकंद के बीच सरकारी संपर्क तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसी दिशा में गुजरात और उज्बेकिस्तान के समरकंद क्षेत्र के बीच साझेदारी की गई है। इससे राज्यों, शहरों, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय प्रशासन के बीच सीधे संबंध विकसित होंगे। पर्यटन और खेलों में भी खुलेंगे नए अवसर दोनों देशों ने पर्यटन बढ़ाने और लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने पर भी सहमति जताई। इसके अलावा खेलों के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को आगे ले जाने का निर्णय लिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और खेल लोगों को करीब लाने वाले महत्वपूर्ण माध्यम हैं और इन क्षेत्रों में साझेदारी से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत सामाजिक आधार मिलेगा। ‘यांगी उज्बेकिस्तान’ और ‘विकसित भारत 2047’ में समानता प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उज्बेकिस्तान का ‘यांगी उज्बेकिस्तान’ और भारत का ‘विकसित भारत 2047’ दृष्टिकोण कई मामलों में एक-दूसरे से मेल खाता है। दोनों विकास योजनाओं के केंद्र में युवा, नवाचार, आधुनिक प्रौद्योगिकी और समावेशी विकास हैं। उन्होंने कहा कि इसी साझा सोच के आधार पर दोनों देश अपने नागरिकों की समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। मध्य एशिया में शांति और समृद्धि को मिलेगा बल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-उज्बेकिस्तान की मजबूत साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे पूरे मध्य एशिया में शांति, प्रगति और समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता की 35वीं वर्षगांठ के लिए भारत की ओर से राष्ट्रपति मिर्जियोयेव और वहां के नागरिकों को बधाई भी दी। दोनों नेताओं की वार्ता और नए समझौते संकेत देते हैं कि भारत अब मध्य एशिया में व्यापार, तकनीक, सुरक्षा, ऊर्जा और सांस्कृतिक संबंधों को एक साथ आगे बढ़ाने की व्यापक रणनीति पर काम कर रहा है।