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मोकी (चीन)। भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम ने रविवार को स्वर्ण पदक मुकाबले में कोरिया को 4-1 से हराकर पुरुष जूनियर एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया और रिकॉर्ड छठी बार महाद्वीपीय चैंपियन बनते हुए प्रतियोगिता की सबसे सफल टीम के रूप में अपनी बादशाहत और मजबूत कर ली। भारत ने फाइनल में शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी खेली और पहले 21 मिनट के भीतर तीन गोल दागकर मुकाबले पर मजबूत पकड़ बना ली। कोरिया अंतिम क्वार्टर में केवल एक गोल कर सका, लेकिन तब तक भारत जीत की पटकथा लिख चुका था। 2004 से 2026 तक छह खिताबों की गौरवगाथा भारत पांच बार का चैंपियन और गत विजेता बनकर प्रतियोगिता में उतरा था। कोरिया पर जीत के साथ टीम ने अपने खिताब की सफलतापूर्वक रक्षा की और ट्रॉफियों की संख्या छह तक पहुंचा दी। भारत के पिछले पांच खिताब 2004, 2008, 2015, 2023 और 2024 में आए थे। वर्ष 2026 की जीत ने इस सूची में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया। पहले क्वार्टर से भारत ने बनाया दबाव स्वर्ण पदक मुकाबला शुरू होते ही भारतीय टीम आक्रामक इरादे के साथ आगे बढ़ी। पहले क्वार्टर में सात मिनट से कुछ अधिक समय शेष रहते भारत ने अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। कोरिया ने इस खतरे को साफ कर दिया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव कम नहीं होने दिया और कुछ ही देर बाद एक और पेनल्टी कॉर्नर अर्जित कर लिया। इस बार भारत अवसर को हाथ से जाने देने वाला नहीं था। 9वां मिनट: अजीत यादव की डिफ्लेक्शन ने खोला खाता मैच के नौवें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर अजीत यादव ने शानदार डिफ्लेक्शन लगाकर गेंद को गोल में पहुंचा दिया। कोरियाई रक्षापंक्ति के पास इस सटीक प्रयास का कोई जवाब नहीं था और भारत ने 1-0 की बढ़त बना ली। पहला गोल आते ही भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ गया। उसने कोरिया को संभलने का मौका दिए बिना लगातार आक्रमण जारी रखा। 13वां मिनट: कप्तान अनमोल ने बढ़त दोगुनी की पहले क्वार्टर में दो मिनट से कुछ अधिक समय शेष था, जब भारत ने एक और पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। कप्तान अनमोल एक्का जिम्मेदारी लेने के लिए आगे आए और 13वें मिनट में मौके को गोल में बदल दिया। भारत अब 2-0 से आगे था। कोरिया ने क्वार्टर के अंतिम क्षणों में पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर जवाब देने का प्रयास किया, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति ने मजबूती से खतरा टाल दिया।शुरुआती 15 मिनट समाप्त हुए और भारत दो गोल की मजबूत बढ़त के साथ नियंत्रण में था। दूसरे क्वार्टर में भी भारत का दबदबा दूसरे क्वार्टर में भारतीय टीम ने मैच की गति पर अपनी पकड़ बनाए रखी। गेंद पर नियंत्रण, आक्रामक दबाव और संगठित खेल के सामने कोरिया को खुलकर खेलने का अवसर नहीं मिला। भारत ने 21वें मिनट में एक और तेज हमला तैयार किया और इस बार प्रभदीप सिंह ने कमाल कर दिया। प्रभदीप सिंह ने बेहतरीन फिनिश के साथ गेंद को नेट में पहुंचाया और भारत की बढ़त 3-0 कर दी। पहले क्वार्टर में अजीत और अनमोल के गोलों से दबाव में आए कोरिया के लिए तीसरा गोल बड़ा झटका था। कोरियाई टीम ने मुकाबले में वापसी का रास्ता खोजने की कोशिश की, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति पूरी तरह अनुशासित और संगठित रही। मध्यांतर तक भारत 3-0 की शानदार बढ़त के साथ स्वर्ण पदक और ट्रॉफी की ओर मजबूती से बढ़ रहा था। तीसरे क्वार्टर में क्रॉसबार ने रोका चौथा गोल तीसरे क्वार्टर में भी भारत ने मुकाबले की गति तय करना जारी रखा। क्वार्टर में सात मिनट से कुछ कम समय बाकी था, जब भारत को एक पेनल्टी कॉर्नर मिला। भारतीय प्रयास गोल की ओर तेजी से बढ़ा, लेकिन गेंद क्रॉसबार से टकरा गई। भारत चौथे गोल से चूक गया। इसके बाद भी उसने लगातार दबाव बनाए रखा, मगर कोरिया ने तीसरे क्वार्टर में दृढ़ रक्षा करते हुए स्कोर को आगे नहीं बढ़ने दिया। आखिरी क्वार्टर में गोल पर हमलों की बौछार भारत अंतिम क्वार्टर में भी रक्षात्मक होने के बजाय उसी आक्रामक इरादे के साथ मैदान पर उतरा और जल्द एक पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। कोरिया ने गोल पर हुए भारतीय प्रयासों की बौछार को शुरुआत में रोक लिया। इसके बाद वीडियो रेफरल के कारण भारत को पेनल्टी कॉर्नर दोबारा मिला। कोरिया ने फैसले को चुनौती दी, लेकिन उसका रेफरल सफल नहीं हुआ। पेनल्टी कॉर्नर भारत के पास बरकरार रहा और इस बार टीम ने कोई गलती नहीं की। 50वां मिनट: आशु मौर्य ने जीत पर लगाई मुहर आशु मौर्य ने 50वें मिनट में गेंद को नेट में पहुंचाकर भारत की बढ़त 4-0 कर दी। यह गोल मैच पर भारत के पूर्ण नियंत्रण की मुहर था। कोरिया के लिए अब चार गोल के अंतर को पाटना बेहद कठिन हो चुका था। भारत ने पहले 21 मिनट में तीन गोल किए थे और चौथे क्वार्टर में आए आशु के गोल ने खिताबी जीत को लगभग सुनिश्चित कर दिया। एक फाउल के बाद कोरिया को पेनल्टी स्ट्रोक दिया गया। कप्तान ली मिनह्योक ने 54वें मिनट में इस मौके को गोल में बदलकर अपनी टीम के लिए स्कोर 4-1 कर दिया। हालांकि, यह गोल कोरिया को मुकाबले में वापस लाने के लिए पर्याप्त नहीं था। भारत की बढ़त बड़ी थी और समय तेजी से समाप्त हो रहा था। अंतिम मिनट में पोस्ट से टकराई कोरिया की उम्मीद कोरिया ने आखिरी क्षण तक एक और गोल की तलाश जारी रखी और अंतिम मिनट में पेनल्टी कॉर्नर हासिल किया। कोरियाई फ्लिक पोस्ट से टकराया और फिर डिफ्लेक्शन बाहर चला गया। इसके साथ ही कोरिया की अंतिम उम्मीद भी समाप्त हो गई। भारत ने बाकी क्षण सुरक्षित निकाले और 4-1 की यादगार जीत पूरी कर ली। मैच समाप्त होने की सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ियों का जश्न शुरू हो गया। टीम ने न केवल अपना खिताब बचाया, बल्कि रिकॉर्ड छठी बार पुरुष जूनियर एशिया कप की ट्रॉफी भी उठा ली। इस जीत ने महाद्वीपीय जूनियर चैंपियनशिप के इतिहास में भारत की सबसे सफल टीम की स्थिति को और मजबूत कर दिया। विश्व कप का टिकट भी पक्का जूनियर एशिया कप का खिताब जीतने के साथ भारत ने एफआईएच पुरुष जूनियर विश्व कप के लिए योग्यता भी हासिल कर ली।रिकॉर्ड छठी ट्रॉफी के साथ विश्व कप का टिकट भारतीय टीम के मोक्वी अभियान की दूसरी बड़ी उपलब्धि बन गया। भारतीय टीम की शानदार उपलब्धि के सम्मान में हॉकी इंडिया ने पुरस्कार राशि की घोषणा की। टीम के प्रत्येक खिलाड़ी को तीन लाख रुपये और सहयोगी स्टाफ के प्रत्येक सदस्य को डेढ़ लाख रुपये दिए जाएंगे। चार गोल, चार नायक और भारत की बादशाहत कायम फाइनल में भारत की जीत की कहानी चार अलग-अलग गोल करने वाले खिलाड़ियों ने लिखी। अजीत यादव ने नौवें मिनट में पहला प्रहार किया, कप्तान अनमोल एक्का ने 13वें मिनट में बढ़त दोगुनी की, प्रभदीप सिंह ने 21वें मिनट में तीसरा गोल दागा और आशु मौर्य ने 50वें मिनट में चौथे गोल के साथ जीत पर मुहर लगा दी। आक्रामक धार के साथ भारतीय रक्षापंक्ति की मजबूती ने कोरिया को अधिकांश मुकाबले में रोके रखा। अंतिम स्कोर 4-1 रहा और भारत ने निरंतरता, जुझारूपन तथा आक्रामक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए अपने खिताब की रक्षा सबसे ऊंचे मुकाम पर समाप्त की।