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मुंबई। टी-20 क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता और दर्शकों की बदलती पसंद के बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व दिग्गज जोंटी रोड्स ने वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि आने वाले वर्षों में दो देशों के बीच खेली जाने वाली 50 ओवर की सीरीज की संख्या लगातार कम हो सकती है, हालांकि वनडे विश्व कप अपनी अहमियत और रोमांच बनाए रखेगा। वनडे क्रिकेट को लेकर रोड्स ने क्यों बजाई खतरे की घंटी मुंबई में ईटीपीएल की फ्रैंचाइजी रॉटरडैम डॉकर्स की जर्सी पेश करने के दौरान रोड्स ने क्रिकेट के तीनों प्रारूपों के भविष्य पर अपनी राय रखी। उनका मानना है कि टी-20 क्रिकेट आने के बाद शुरुआत में आशंका जताई गई थी कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान टेस्ट क्रिकेट को होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके उलट अब 50 ओवर का प्रारूप दबाव में दिखाई दे रहा है। रोड्स ने कहा, “जब टी-20 क्रिकेट शुरू हुआ था, तो लोग कह रहे थे कि इससे टेस्ट क्रिकेट पर दबाव पड़ेगा। लेकिन हैरानी की बात है कि ऐसा नहीं हुआ।” ‘50 ओवर का क्रिकेट मुश्किल में पड़ सकता है’ रोड्स के मुताबिक, नए दर्शकों के क्रिकेट से जुड़ने और खेल को देखने के नजरिए में बदलाव का सीधा असर वनडे प्रारूप पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए शुरू से यह बात स्पष्ट थी कि आने वाले वर्षों में 50 ओवर का क्रिकेट ऐसा प्रारूप हो सकता है, जिसे सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़े। यह खतरा खास तौर पर द्विपक्षीय वनडे सीरीज पर नजर आ रहा है। द्विपक्षीय वनडे सीरीज होंगी कम रोड्स की सबसे अहम टिप्पणी दो देशों के बीच होने वाली वनडे सीरीज को लेकर रही। उनका मानना है कि भविष्य में द्विपक्षीय क्रिकेट में 50 ओवर के मुकाबलों की संख्या धीरे-धीरे कम हो सकती है। हालांकि उन्होंने वनडे क्रिकेट के पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं जताई। रोड्स के मुताबिक, 50 ओवर के प्रारूप के बिना क्रिकेट की कल्पना करना अभी भी बेहद मुश्किल है। वर्ल्ड कप बचाए रखेगा वनडे की चमक द्विपक्षीय सीरीज को लेकर चिंता जताने के बावजूद रोड्स को वनडे विश्व कप के भविष्य पर भरोसा है। उनका मानना है कि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में खेलने का आकर्षण अलग होता है और यह बात टी-20 तथा 50 ओवर दोनों प्रारूपों पर लागू होती है। यानी रोड्स की नजर में वनडे क्रिकेट की असली ताकत भविष्य में उसकी द्विपक्षीय सीरीज के बजाय वर्ल्ड कप जैसे बड़े वैश्विक टूर्नामेंट हो सकते हैं। अगले वनडे वर्ल्ड कप पर दक्षिण अफ्रीका की नजर दक्षिण अफ्रीका अगले वनडे विश्व कप के मेजबानों में शामिल है और रोड्स इसे अपने देश के लिए बेहद खास मौका मानते हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका दुनिया भर से आने वाले क्रिकेट प्रशंसकों की मेजबानी को लेकर उत्साहित है। रोड्स ने अपने देश में पहले आयोजित हुए बड़े खेल आयोजनों का भी जिक्र किया। उन्होंने 1995 रग्बी वर्ल्ड कप, 2007 टी-20 वर्ल्ड कप और 2010 फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप को याद करते हुए दक्षिण अफ्रीका की मेजबानी क्षमता पर भरोसा जताया। अब सफेद गेंद की आईसीसी ट्रॉफी का इंतजार दक्षिण अफ्रीका के लिए अगला वनडे विश्व कप सिर्फ मेजबानी तक सीमित नहीं रहने वाला है। टीम की नजर उस उपलब्धि पर भी होगी, जिसका लंबे समय से इंतजार है। रोड्स ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियन है, लेकिन टीम अब तक आईसीसी की सफेद गेंद वाली ट्रॉफी नहीं जीत सकी है। ऐसे में घरेलू परिस्थितियों में होने वाला विश्व कप प्रोटियाज के लिए इतिहास बदलने का मौका बन सकता है। उन्होंने कहा, “मेजबान दक्षिण अफ्रीका टीम के तौर पर कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें हम हासिल करना चाहेंगे और उनमें से एक आईसीसी की लिमिटेड-ओवर्स ट्रॉफी जीतना है।”