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पटना। समान काम के लिए समान वेतन और सेवा नियमित करने की मांग को लेकर बिहार की संविदा एएनएम कर्मियों ने बुधवार को पटना स्थित जनता दल यूनाइटेड (जदयू) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। बिहार के अलग-अलग जिलों से पहुंचीं एएनएम ने अपनी मांगों को लेकर कार्यालय का घेराव किया और स्वास्थ्य विभाग से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान मंत्री रत्नेश सदा की गाड़ी को घेरने की खबर भी सामने आई है। राज्यभर से प्रदर्शन में पहुंचीं संविदा एएनएम प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार संविदा एएनएम कर्मी संघ की महासचिव अनामिका कुमारी और सचिव सोनी कुमारी ने संयुक्त रूप से किया। प्रदर्शन में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में संविदा एएनएम शामिल हुईं। इनमें कुमारी निशा, कविता कुमारी और प्रियंका कुमारी समेत अनेक कर्मी शामिल थीं। संघ की नेताओं ने कहा कि वे स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से मिलकर अपनी मांगें रखना चाहती थीं, लेकिन बुधवार को उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे गुरुवार को भी पटना में डटी रहेंगी और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात के बाद ही लौटेंगी। पहले भी मिला आश्वासन, नहीं हुई ठोस पहल संघ की महासचिव सोनी कुमारी ने कहा कि इससे पहले भी वह तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से मिलकर संविदा एएनएम की समस्याएं रख चुकी हैं। उनके अनुसार उस समय आश्वासन तो मिला, लेकिन मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई। संविदा एएनएम कर्मियों का कहना है कि वे वर्षों से ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों को गांवों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद उनकी सेवा संविदा पर है और मानदेय को लेकर असमानता बनी हुई है। 15 हजार रुपये मानदेय बढ़ाने की मांग संघ के अनुसार वर्तमान में संविदा एएनएम को 15 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलता है। कर्मियों ने इसे बढ़ाने तथा समान काम करने वाले नियमित कर्मियों के अनुरूप वेतन देने की मांग की है। हालांकि नियमित और संविदा कर्मियों के वेतन में अंतर से संबंधित आंकड़े संघ के दावे पर आधारित हैं। संविदा एएनएम की प्रमुख मांगों में सेवा का नियमितीकरण, मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि, स्थायी नियुक्ति में संविदा सेवा के अनुभव को महत्व देने के लिए अतिरिक्त अंक या वेटेज, नियुक्ति प्रक्रिया में उचित अवसर तथा गृह प्रखंड में पोस्टिंग शामिल है। टकराव नहीं, सम्मान और रोजगार की सुरक्षा चाहिए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे सरकार से टकराव नहीं, बल्कि वर्षों से की जा रही सेवा के अनुरूप सम्मान और रोजगार की सुरक्षा चाहती हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था की निचली कड़ी को मजबूत किए बिना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाना कठिन है।बुधवार को प्रदर्शन के बाद भी मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं होने से कर्मियों ने आंदोलन जारी रखने की बात कही। अब उनकी नजर स्वास्थ्य मंत्री से प्रस्तावित मुलाकात पर है। संघ ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस पहल होने तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगी।



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