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मुंबई। फ्रांस के ल्योन में भारतीय सिनेमा का मान उस वक्त और बढ़ गया, जब एसएस राजामौली का नाम मार्टिन स्कॉर्सेसी, क्लिंट ईस्टवुड और क्वेंटिन टैरेंटिनो जैसे दिग्गज फिल्मकारों की कतार में ‘म्यूर दे सिनेआस्त’ पर स्थायी रूप से दर्ज किया गया, जिसे निर्देशक ने अपने जीवन का बेहद भावुक और अविस्मरणीय सम्मान बताया। मार्टिन स्कॉर्सेसी, क्लिंट ईस्टवुड, क्वेंटिन टैरेंटिनो और फ्रांसिस फोर्ड कोपोला जैसे दिग्गजों के बीच अब राजामौली का भी नाम इस सम्मान की सबसे खास बात यह है कि म्यूर दे सिनेआस्त पर वही नाम दर्ज किए जाते हैं, जिन्होंने सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग और स्थायी पहचान बनाई हो। इस दीवार पर पहले से मार्टिन स्कॉर्सेसी, क्लिंट ईस्टवुड, क्वेंटिन टैरेंटिनो और फ्रांसिस फोर्ड कोपोला जैसे दिग्गज फिल्मकारों के नाम मौजूद हैं। अब इसी फेहरिस्त में एसएस राजामौली का नाम भी शामिल हो गया है, जो भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक ताकत का बड़ा संकेत है। खुद राजामौली भी हो गए भावुक, बोले— यह सम्मान शब्दों से परे है राजामौली ने इस सम्मान को लेकर अपनी भावनाएं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब वह वहां पहुंचे और दिग्गजों के नामों के बीच अपनी पट्टिका देखी, तो कुछ पल के लिए उनका दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया। उन्होंने कहा कि इस सम्मान को शब्दों में बयां करना आसान नहीं है और वह सिर्फ कृतज्ञता महसूस कर रहे हैं। राजामौली ने माना कि दुनिया के इतने बड़े फिल्मकारों के साथ अपना नाम स्थायी रूप से दर्ज होना उनके लिए बेहद भावुक और विनम्र कर देने वाला अनुभव है। इंस्टिट्यूट ल्यूमियर में मिला खास सम्मान, कान फिल्म फेस्टिवल से भी जुड़ा है संस्थान राजामौली को यह सम्मान फ्रांस के इंस्टिट्यूट ल्यूमियर से मिला, जो सिनेमा के इतिहास और विरासत से जुड़ा एक बेहद प्रतिष्ठित संस्थान माना जाता है। यह वही संस्थान है, जिसके डायरेक्टर थिएरी फ्रेमॉ मशहूर कान फिल्म फेस्टिवल से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में राजामौली को मिला यह सम्मान सिर्फ एक औपचारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि वैश्विक फिल्म जगत की ओर से उनकी कला और योगदान को दी गई बड़ी मान्यता है। ‘ईगा’ और ‘आरआरआर’ की स्क्रीनिंग ने भी बढ़ाया गौरव इस मौके पर ल्यूमियर म्यूजियम के स्क्रीनिंग रूम में राजामौली की फिल्मों ‘ईगा’ और ‘आरआरआर’ का प्रदर्शन भी किया गया, जहां दर्शकों की शानदार मौजूदगी देखने को मिली। यह इस बात का संकेत है कि राजामौली की फिल्में सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के दर्शकों पर अपनी गहरी छाप छोड़ चुकी हैं। भारतीय सिनेमा को दुनिया में नई पहचान दिलाने वाले फिल्मकार एसएस राजामौली लंबे समय से भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। ‘बाहुबली’ सीरीज से लेकर ‘आरआरआर’ तक, उनकी फिल्मों ने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि भारतीय कहानी कहने के अंदाज को भी दुनिया भर में नई पहचान दिलाई। अब फ्रांस में मिला यह सम्मान इस बात की तस्दीक करता है कि राजामौली का सिनेमा अब सीमाओं से बहुत आगे निकल चुका है। यह सिर्फ राजामौली का सम्मान नहीं, भारतीय सिनेमा की जीत है राजामौली का नाम जब सिनेमा के सबसे बड़े निर्देशकों के बीच दर्ज हुआ, तो यह पल सिर्फ एक निर्देशक की निजी उपलब्धि नहीं रहा। यह भारतीय सिनेमा की उस बढ़ती साख का प्रतीक बन गया, जिसने अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना मजबूत असर छोड़ना शुरू कर दिया है। यह सम्मान आने वाले वक्त में भारतीय फिल्मकारों और दर्शकों—दोनों के लिए गर्व की वजह रहेगा।



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