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नई दिल्ली। अब तक किसान फसल उगाकर कमाई करते हैं लेकिन क्या भविष्य में मिट्टी को बेहतर बनाकर भी पैसे कमा सकेंगे? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कृषि विशेषज्ञ अब ऐसी व्यवस्था पर विचार करने की बात कर रहे हैं, जिसमें किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के बदले कमाई हो सके। इसे 'पोषक तत्व क्रेडिट प्रणाली' कहा जा रहा है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर एस. महेंद्र देव ने हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग संगठन फिक्की के एक कार्यक्रम में इस विचार को सामने रखा है। उनका मानना है कि भारतीय खेती को केवल ज्यादा उत्पादन की सोच से बाहर निकालकर मिट्टी की सेहत और किसानों की आय पर भी ध्यान देना होगा। क्या है पोषक तत्व क्रेडिट अगर कोई किसान अपने खेत में जरूरत के हिसाब से खाद का इस्तेमाल करता है, मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाता है, सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखता है और मिट्टी को खराब होने से बचाता है तो उसे इसके बदले आर्थिक प्रोत्साहन मिल सकता है। यानी किसान को सिर्फ फसल के लिए ही नहीं बल्कि मिट्टी को स्वस्थ रखने के लिए भी फायदा मिल सकता है। यह जरूरत क्यों पड़ी पिछले कई सालों में खेती में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इससे उत्पादन तो बढ़ा लेकिन कई जगहों पर मिट्टी की ताकत कम होने लगी। कई किसान बताते हैं कि पहले जितनी फसल कम खाद में मिल जाती थी अब उतनी फसल लेने के लिए ज्यादा खाद डालनी पड़ रही है। इसका मतलब है कि मिट्टी की सेहत पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो खेती की लागत बढ़ती जाएगी और मिट्टी कमजोर होती जाएगी। अब फोकस 'ज्यादा खाद' नहीं, 'सही खाद' पर प्रोफेसर महेंद्र देव का कहना है कि अब यह नहीं देखना चाहिए कि खेत में कितनी खाद डाली गई बल्कि यह देखना चाहिए कि खाद का फायदा कितना मिला। दूसरे शब्दों में कहें तो खेती का लक्ष्य होना चाहिए, “कम लागत, स्वस्थ मिट्टी और बेहतर उत्पादन।” किसानों को क्या फायदा होगा अगर भविष्य में पोषक तत्व क्रेडिट जैसी व्यवस्था लागू होती है तो किसानों को कई फायदे हो सकते हैं, जैस- मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहेगी, खाद पर खर्च कम हो सकता है, उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, किसानों को अतिरिक्त आर्थिक प्रोत्साहन मिल सकता है और पर्यावरण को भी फायदा होगा। सब्सिडी से आगे की सोच सरकार पहले से ही नीम-कोटेड यूरिया, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, नैनो यूरिया और प्राकृतिक खेती जैसी योजनाओं को बढ़ावा दे रही है। अब विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को केवल सस्ती खाद देने के बजाय अच्छी खेती की पद्धतियां अपनाने पर भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। खेती का नया रास्ता भारत 2047 तक विकसित देश बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए खेती को भी बदलना होगा। केवल उत्पादन बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, मिट्टी को बचाना और किसानों की आय बढ़ाना भी उतना ही जरूरी होगा। 'पोषक तत्व क्रेडिट' अभी एक सुझाव है लेकिन अगर यह योजना जमीन पर उतरती है तो किसानों के लिए आय का एक नया रास्ता खुल सकता है। तब किसान सिर्फ अनाज उगाने वाले नहीं बल्कि मिट्टी की सेहत बचाने वाले 'मिट्टी के डॉक्टर' भी कहलाएंगे और इसके बदले उन्हें आर्थिक फायदा भी मिल सकता है।



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