Full Story

बांका/पटना। नाली के साथ पीसीसी सड़क निर्माण के बिल का भुगतान कराने के बदले कथित रूप से रिश्वत वसूली के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बिहार के बांका जिला परिषद कार्यालय में छापेमारी कर निजी सहायक ओम प्रकाश मंडल और रात्रि प्रहरी जागेश्वर मंडल को 1.26 लाख रुपये लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया वहीं जांच में सरकारी योजनाओं से जुड़ी रकम की कथित संगठित वसूली का संकेत मिलने के बाद तीन अधिकारी समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यालय कक्ष में बिछा जाल निगरानी की मुख्यालय टीम ने 3 अगस्त 2026 को बांका जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यालय कक्ष में कार्रवाई की। धावा दल ने ओम प्रकाश मंडल और जागेश्वर मंडल को शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम लेते पकड़ लिया। कार्रवाई पुलिस उपाधीक्षक सत्येंद्र राम के नेतृत्व में गठित टीम ने की। बिल भुगतान के बदले मांगी गई थी रकम ब्यूरो ने सोमवार को बताया कि धोरैया थाना क्षेत्र के फतुचक निवासी अवध किशोर कुमार ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि नाली के साथ पीसीसी सड़क निर्माण कार्य का बिल पास कराने के एवज में उनसे रिश्वत मांगी जा रही है।ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन में रिश्वत मांगने का प्रमाण मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर जाल बिछाया गया। पांच लोगों पर केस, तीन सरकारी अधिकारी भी नामजद निगरानी ब्यूरो के अनुसार, सत्यापन में लोक सेवकों और गैर-लोक सेवकों द्वारा कथित रूप से संगठित तरीके से सरकारी योजनाओं में रिश्वत वसूलने की बात सामने आई। इसके बाद सहायक अभियंता सुधीर कुमार , कनीय अभियंता मगरूफ , जिला परिषद अध्यक्ष राजेंद्र यादव , निजी सहायक ओम प्रकाश मंडल और रात्रि प्रहरी जागेश्वर मंडल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। रिटायर इंजीनियर से ‘निजी तकनीकी सहायक’ बनने तक ब्यूरो ने बताया कि ओम प्रकाश मंडल जिला परिषद कार्यालय से सेवानिवृत्त कनीय अभियंता हैं। वह 31 जनवरी 2020 को सेवा से रिटायर हुए थे लेकिन इसके बाद भी कथित तौर पर कार्यालय से जुड़े रहे और निजी तकनीकी सहायक के रूप में काम करते थे। ब्यूरो ने आरोप लगाया कि वह इसी भूमिका की आड़ में बिचौलिये का काम कर रहे थे। घर की तलाशी में बैंक खातों और मकान का खुलासा गिरफ्तारी के बाद ओम प्रकाश मंडल के आवास की तलाशी ली गई। उनके भारतीय स्टेट बैंक खाते में चार लाख रुपये से अधिक जमा मिले। आजाद चौक, बांका में करीब दो हजार वर्ग फुट क्षेत्र में उनका दो मंजिला निर्माणाधीन मकान भी मिला। भारतीय स्टेट बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में उपलब्ध राशि को फ्रीज कराने की कार्रवाई की गई है। अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई की तैयारी गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ के बाद उन्हें विशेष निगरानी न्यायालय, भागलपुर में पेश किया जाएगा। निगरानी ब्यूरो ने कहा है कि अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है और मामले की आगे की जांच की जा रही है। 2026 में 83वां ट्रैप केस निगरानी ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 90वीं प्राथमिकी और 83वां ट्रैप केस है। अब तक 86 आरोपियों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया जा चुका है और कुल 31 लाख 51 हजार 800 रुपये रिश्वत की रकम बरामद हुई है।वर्ष 2025 में 101 ट्रैप केस दर्ज हुए थे और 37 लाख 80 हजार 300 रुपये बरामद किए गए थे। छोटे बिल से खुला बड़े नेटवर्क का शक यह मामला केवल 1.26 लाख रुपये की कथित रिश्वत तक सीमित नहीं दिख रहा। निगरानी के बयान के अनुसार, जांच अब इस दिशा में भी बढ़ रही है कि जिला परिषद की अन्य योजनाओं और बिल भुगतान में भी क्या इसी तरह की संगठित वसूली की व्यवस्था सक्रिय थी।