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मोतिहारी। जिस बच्चे ने अभी ठीक से इस दुनिया में आंखें भी नहीं खोली थीं, उसकी डेढ़ लाख रुपये में कीमत तय हो चुकी थी। जन्म के कुछ ही घंटों बाद उसे सौंपने की तैयारी चल रही थी लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस की कार्रवाई ने यह सौदा नाकाम कर दिया। बिहार के पूर्वी चंपारण जिला मुख्यालय मोतिहारी में सामने आए इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बच्चे के माता-पिता, एक बिचौलिया, एक आशा कार्यकर्ता और कथित खरीदार समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से सौदे में इस्तेमाल किए जाने वाले 1.50 लाख रुपये नकद भी जब्त किए हैं। अस्पताल के पास चल रही थी बच्चे को सौंपने की तैयारी पुलिस के अनुसार, नगर थानाध्यक्ष राजीव रंजन को नवजात की खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के बाद पुलिस टीम ने सदर अस्पताल चौक के आसपास निगरानी बढ़ाई। बताया गया कि नवजात को कथित रूप से घोड़ासहन थाना क्षेत्र के लैन बसवरिया निवासी एक महिला को सौंपा जाना था। जैसे ही सौदे से जुड़े लोग वहां पहुंचे, पुलिस ने कार्रवाई कर बच्चे को अपने कब्जे में ले लिया और पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जन्म से पहले ही तय हो गया था सौदा प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि बच्चे की कथित बिक्री की योजना उसके जन्म से पहले ही तैयार कर ली गई थी।नवजात की मां ने सोमवार को सदर अस्पताल चौक की गली नंबर एक स्थित एक निजी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था। पुलिस का कहना है कि प्रसव के तुरंत बाद बच्चे को कथित खरीदार तक पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी गई। यह तथ्य मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इससे आशंका पैदा होती है कि पूरी योजना अचानक नहीं बनी, बल्कि पहले से बातचीत और सौदेबाजी चल रही थी। माता-पिता के पहले से छह बच्चे पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार माता-पिता की पहचान हरसिद्धि थाना क्षेत्र के पकड़िया टोला निवासी प्रमोद साहनी और इंदू देवी के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि दंपति के पहले से छह बच्चे हैं। हालांकि पुलिस अभी यह पता लगा रही है कि नवजात को बेचने का फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया और सौदे की शुरुआत किसने की थी। बिचौलिया और आशा कार्यकर्ता की भूमिका पर सवाल मामले में नगर थाना क्षेत्र के बलुआ गोपालपुर निवासी तान्या खातून उर्फ कुरेशा खातून को कथित बिचौलिया बताया गया है। पुलिस ने घोड़ासहन थाना क्षेत्र के बगहा निवासी आशा कार्यकर्ता शोभा सिंह को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि नवजात की खरीद-बिक्री तय कराने में बिचौलिया और आशा कार्यकर्ता की मदद ली गई थी। स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी एक कार्यकर्ता का नाम सामने आने के बाद पुलिस अब यह जांच रही है कि क्या अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग से जुड़े किसी अन्य व्यक्ति को भी इस कथित सौदे की जानकारी थी। बच्चा लेने मोतिहारी पहुंची थी खरीददार पुलिस के अनुसार, घोड़ासहन थाना क्षेत्र के लैन बसवरिया निवासी चिंता देवी नवजात को लेने के लिए मोतिहारी पहुंची थी। कथित तौर पर बच्चे की कीमत डेढ़ लाख रुपये तय की गई थी। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान यही रकम नकद बरामद करने का दावा किया है। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रकम किसने दी, किसे दी जानी थी और इसमें शामिल लोगों के बीच पैसे का बंटवारा कैसे होना था। नवजात सुरक्षित, स्वास्थ्य जांच जारी पुलिस ने बरामद नवजात को सुरक्षित निगरानी में रखा है। बच्चे की आवश्यक देखभाल के साथ उसकी चिकित्सकीय जांच भी कराई जा रही है। जन्म के तुरंत बाद हुए इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए बच्चे की सेहत और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। आगे बच्चे की देखरेख और कानूनी संरक्षण को लेकर संबंधित विभागों की भूमिका भी तय की जाएगी। क्या इसके पीछे सक्रिय है कोई संगठित गिरोह पुलिस इस मामले को केवल एक नवजात की कथित खरीद-बिक्री तक सीमित मानकर नहीं चल रही है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए यह पता लगाया जा रहा है कि गिरफ्तार लोग पहले भी ऐसी किसी घटना में शामिल रहे हैं या नहीं। पुलिस यह भी जांच रही है कि कहीं नवजात बच्चों की खरीद-बिक्री कराने वाला कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, आपसी संपर्क और पुराने रिकॉर्ड की जांच से इस सवाल का जवाब मिल सकता है। निजी अस्पताल की भूमिका भी जांच के घेरे में नवजात का जन्म जिस निजी अस्पताल में हुआ, पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन या कर्मचारियों को कथित सौदे की जानकारी थी या नहीं। पुलिस यह भी जानना चाहती है कि बच्चे के जन्म और उसे अस्पताल से बाहर ले जाने से जुड़ी प्रक्रिया में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।



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