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( देवापुर-बेलवा संगम तट से संजय कौशिक) मोतिहारी। बागमती और लालबकेया नदियों का संगम बुधवार को सिर्फ दो नदियों का मिलन स्थल नहीं रहा बल्कि हजारों कांवरियों की आस्था, संकल्प और शिवभक्ति का विराट संगम बन गया। देवापुर-बेलवा संगम तट पर दूर तक लहराता भगवा, कंधों पर कांवर और हर कुछ क्षण बाद गूंजता ‘हर-हर महादेव... बोल बम’ का जयघोष पूरे वातावरण को शिवमय करता रहा। श्रद्धालुओं की भीड़ देखकर लगा, मानो पूर्वी चंपारण में ही ‘मिनी सुल्तानगंज’ उतर आया हो। सुबह से ही संगम तट पर कांवरियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। कोई नंगे पांव अकेले कांवर लेकर पहुंचा तो कोई भजन-कीर्तन करते हुए टोली के साथ। संगम के पवित्र जल को कांवर में लेकर श्रद्धालु करीब 80 किलोमीटर की पदयात्रा पर अरेराज स्थित बाबा सोमेश्वरनाथ धाम के लिए रवाना होते रहे। मंजिल एक, बाबा का जलाभिषेक और स्वर भी एक "हर-हर महादेव।" किसी के पैरों में यात्रा की थकान थी, किसी के कंधे पर कांवर का भार, लेकिन चेहरे पर भक्ति की चमक कम नहीं हुई। ढोल-मंजीरे की थाप, भजन-कीर्तन और बोल बम के जयघोष के बीच कांवरियों के जत्थे लगातार आगे बढ़ते रहे। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं का उत्साह इस यात्रा को धार्मिक आयोजन से कहीं अधिक एक सामूहिक आस्था-पर्व का स्वरूप देता दिखा। स्वयंभू पंचमुखी शिवलिंग की ओर बढ़ते कदम अरेराज स्थित बाबा सोमेश्वरनाथ धाम को श्रद्धालु बिहार की काशी के रूप में भी मानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां स्थापित पंचमुखी शिवलिंग स्वयंभू है। स्कंद पुराण और शिव पुराण में भी इस स्थान के धार्मिक महत्व का उल्लेख मिलता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम विवाह के बाद जनकपुर से लौटते समय यहां रुके थे। मोतिहारी से करीब 22 किलोमीटर पश्चिम स्थित अरेराज में महाशिवरात्रि और श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भाद्रपक्ष की तेरस और अनंत चतुर्दशी पर भी कांवरियों की भारी भीड़ बाबा सोमेश्वरनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचती है। इनमें डाक कांवरियों की संख्या भी उल्लेखनीय रहती है। बिहार के विभिन्न हिस्सों के साथ नेपाल और भूटान से भी शिवभक्तों के पहुंचने की परंपरा बताई जाती है। संगम से शिवधाम तक आस्था की लंबी डगर देवापुर-बेलवा संगम पर पवित्र जल ग्रहण करने के बाद कांवरियों की यात्रा अरेराज की ओर बढ़ रही है। नंगे पांव चल रहे श्रद्धालुओं के लिए यह दूरी महज 80 किलोमीटर नहीं, बल्कि विश्वास की परीक्षा और संकल्प की यात्रा है। किसी के हाथ में कांवर है, किसी की जुबां पर शिव का नाम और किसी की आंखों में बाबा के दर्शन की प्रतीक्षा। यात्रा में शामिल महिलाएं और पुरुष भी बड़ी संख्या में नजर आए। जत्थों में शामिल कांवरिये भजन गाते और एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाते हुए आगे बढ़ते रहे। आस्था के बीच सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम कांवरियों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने संगम और जलाभिषेक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई है। घाट और आसपास के क्षेत्र में चार-चार मोटरबोट तैनात किए गए हैं, ताकि नदी में किसी आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके। पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी लगातार घाट पर निगरानी कर रहे हैं। शिवहर और पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन की टीमें भी घाट पर सतर्क हैं। नदी की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं की गतिविधियों और भीड़ की आवाजाही पर विशेष नजर रखी जा रही है। प्रशासन की मौजूदगी के बीच श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से पवित्र जल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहे। देवापुर-बेलवा का संगम बुधवार को एक ऐसी तस्वीर का साक्षी बना, जिसमें नदी की लहरों के साथ आस्था भी बह रही थी। हजारों कांवरियों के कदम अरेराज की ओर बढ़ते रहे और वातावरण में एक ही स्वर लगातार गूंजता रहा- “हर-हर महादेव... बोल बम!”