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पटना। बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर नेता प्रतिपक्ष एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए आज कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने का फैसला इस बात का संकेत है कि राज्य अभूतपूर्व आर्थिक दबाव और वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है। श्री यादव ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि आकस्मिकता निधि का इस्तेमाल आमतौर पर प्राकृतिक आपदा, अप्रत्याशित संकट या विशेष वित्तीय जरूरतों के समय किया जाता है लेकिन यदि अब नियमित पेंशन भुगतान के लिए भी इसी निधि का उपयोग करना पड़ रहा है तो यह सरकार की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। वेतन, पेंशन और भुगतान में देरी का आरोप नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि पिछले कई महीनों से कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से जुड़े भुगतान प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा ठेकेदारों के बकाया भुगतान भी लंबे समय से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि कई विकास योजनाएं स्वीकृत होने के बावजूद जमीन पर शुरू नहीं हो सकी हैं। छात्रवृत्ति और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का भी किया जिक्र राजद नेता ने आरोप लगाया कि छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के भुगतान में देरी हो रही है और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना भी प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी का असर कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर दिखाई दे रहा है। फसल सहायता योजना बंद करने के फैसले पर भी सवाल श्री यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने फंड की कमी का हवाला देते हुए लंबे समय से चल रही बिहार राज्य फसल सहायता योजना को बंद करने का फैसला लिया है, जिससे किसानों के हित प्रभावित हो सकते हैं। मुख्यमंत्री से मांगा जवाब नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से राज्य की वित्तीय स्थिति पर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को जनता के सामने वास्तविक आर्थिक हालात रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंतित हैं और सरकार को इस विषय पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक चुनौतियों पर गंभीर चर्चा और समाधान की आवश्यकता है ताकि विकास योजनाओं, कर्मचारियों के भुगतान और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर किसी प्रकार का असर न पड़े।