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पटना। पीजी की फीस वृद्धि वापस लेने, दाखिले में विश्वविद्यालय कोटा बहाल करने और छात्र सुविधाएं बेहतर बनाने समेत दस सूत्री मांगों को लेकर पटना विश्वविद्यालय में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल गुरुवार को चौथे दिन भी जारी रही और संगठन के बंद के आह्वान पर आंदोलनकारी छात्रों ने कई कॉलेजों तथा कार्यालयों को बंद कराया। इस दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चिकित्सकों की टीम ने उनकी मेडिकल जांच की। एआईएसएफ ने कहा है कि मांगों का समाधान होने तक अनशन जारी रहेगा। सुबह से जुटे छात्र, कॉलेजों से अनशन स्थल तक पहुंचा समर्थन एआईएसएफ ने गुरुवार को बताया कि सुबह से ही भूख हड़ताल स्थल पर छात्रों का जुटना शुरू हो गया था। इसके बाद आंदोलनकारी पटना आर्ट कॉलेज, बीएन कॉलेज, पटना कॉलेज, दरभंगा हाउस, वाणिज्य महाविद्यालय और साइंस कॉलेज समेत विभिन्न संस्थानों तथा कार्यालयों को बंद कराने पहुंचे। संगठन ने दावा किया कि बंद को छात्रों के साथ पटना विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ का भी समर्थन मिला। बड़ी संख्या में छात्र कक्षाओं से निकलकर भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचे और आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई। फीस वृद्धि और दाखिला नियमों पर सबसे तीखा विरोध आंदोलन में पीजी पाठ्यक्रम की फीस वृद्धि और पीजी प्रवेश में विश्वविद्यालय कोटा बहाल करने की मांग प्रमुख है। छात्रों को संबोधित करते हुए एआईएसएफ के पूर्व नेता निखिल झा ने प्रवेश नियमावली में प्रस्तावित बदलाव पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बदलाव से विश्वविद्यालय के अपने छात्रों के लिए आगे की पढ़ाई के अवसर प्रभावित होंगे। कुलपति के रवैये की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। अनशन को समर्थन देने पहुंचे ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (एआईवाईएफ) के बिहार राज्य सचिव संभू देवा ने कहा कि फीस में लगातार बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल होगा। उन्होंने विश्वविद्यालय को निजी हाथों में सौंपने की साजिश का आरोप भी लगाया और कहा कि प्रशासन छात्रों तथा कर्मचारियों से संवाद नहीं कर रहा है। प्रशासन पर संवाद न करने का आरोप एआईएसएफ के बिहार राज्य अध्यक्ष सुधीर ने शिक्षा व्यवस्था, छात्र सुविधाओं और अधिकारियों तथा छात्रों के बीच संवाद की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने इन समस्याओं के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति संस्थान की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप नहीं है। एआईएसएफ के पूर्व नेता जितेंद्र ने भी अनशन का समर्थन किया। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले भी कुलपतियों से मतभेद और संघर्ष होते थे, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत की जाती थी। उन्होंने वर्तमान कुलपति पर संवाद से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया। छात्र नेता मीर सरफराज अली ने फीस वृद्धि और छात्र-युवा समस्याओं की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। लाइब्रेरी से हॉस्टल तक, ये हैं दस मांगें एआईएसएफ ने फीस और प्रवेश प्रक्रिया के साथ सुरक्षा, चिकित्सा तथा शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ी मांगें भी रखी हैं। संगठन की दस सूत्री मांगें हैं: 1. पीजी पाठ्यक्रम में हुई फीस वृद्धि वापस ली जाए। 2. पीजी प्रवेश में विश्वविद्यालय कोटा दोबारा बहाल किया जाए। 3. सेंट्रल लाइब्रेरी सप्ताह के सातों दिन, चौबीसों घंटे खोली जाए। 4. सभी छात्रों के लिए हॉस्टल उपलब्ध कराए जाएं और जर्जर छात्रावासों की मरम्मत हो। 5. मगध महिला कॉलेज के सामने छात्राओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए फुट ओवरब्रिज बनाया जाए। 6. साइंस कॉलेज के पुराने और जर्जर लैब उपकरणों को अपडेट किया जाए। 7. मगध महिला कॉलेज समेत सभी कॉलेजों में चौबीसों घंटे एंबुलेंस की व्यवस्था हो। 8. कुलपति को बर्खास्त किया जाए। 9. कला एवं शिल्प महाविद्यालय में एमएफए की पढ़ाई शुरू की जाए। 10. जिस परीक्षा में संगठन ने पेपर लीक का आरोप लगाया है, उसे दोबारा कराया जाए। मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा अनशन एआईएसएफ ने कहा है कि वह आगे की रणनीति तय कर आंदोलन जारी रखेगा और मांगों के समाधान के बिना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेगा।