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रांची। झारखंड सरकार के मंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा ( झामुमो ) के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू का आज दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। श्री सुदिव्य कुमार ने गिरिडीह के एक अस्पताल में रविवार तड़के करीब 4 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। राज्य सरकार ने 06 और 07 सितंबर को दो दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया है जबकि 07 सितंबर को राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद रहेंगे। अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में नहीं बच सकी जान पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, श्री सुदिव्य कुमार गिरिडीह स्थित अपने आवास पर थे तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन और समर्थक उन्हें देर रात इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। सरकार में संभाल रहे थे कई महत्वपूर्ण विभाग सुदिव्य कुमार झारखंड सरकार में कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके पास नगर विकास एवं आवास विभाग, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग का जिम्मा था। वे झामुमो के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे और लंबे समय से पार्टी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। विज्ञप्ति में उन्हें गिरिडीह में बेहद लोकप्रिय नेता बताया गया है। 06 और 07 सितंबर को पूरे झारखंड में राजकीय शोक मंत्री के निधन के बाद झारखंड सरकार ने 06 और 07 सितंबर को पूरे राज्य में राजकीय शोक मनाने का फैसला किया है। इस दौरान जिन सरकारी भवनों पर नियमित रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, वहां तिरंगा आधा झुका रहेगा। राजकीय शोक की अवधि में किसी भी तरह का राजकीय समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने 07 सितंबर को राज्य सरकार के सभी कार्यालय बंद रखने का निर्णय लिया है। हेमंत सोरेन बोले—‘सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया...’ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने श्री सुदिव्य कुमार के निधन पर गहरा शोक जताते हुए इसे अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि इस खबर को स्वीकार कर पाना उनके लिए बेहद कठिन है। उन्होंने कहा, “सोनू भैया का जाना मेरे जीवन में ऐसी रिक्तता छोड़ गया है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं।” उन्होंने उन्हें केवल वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं बल्कि बड़े भाई की तरह स्नेह और मार्गदर्शन देने वाला व्यक्ति बताया। झारखंड आंदोलन से जुड़ी यादों को किया साझा श्री सोरेन ने अपने शोक संदेश में श्री सुदिव्य कुमार के झारखंड आंदोलन से जुड़ाव को भी याद किया। उनके मुताबिक, वे आंदोलन के दौर से ही दिशोम गुरुजी के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे। उन्होंने कहा कि झामुमो के समर्पित सिपाही के रूप में सुदिव्य कुमार ने अपना जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि झारखंडियत के प्रति उनका समर्पण और जुझारू भावना हमेशा याद की जाएगी। झामुमो में शोक, नेताओं-समर्थकों ने जताया दुख श्री सुदिव्य कुमार के निधन की खबर मिलते ही झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक फैल गया। पार्टी और प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया। अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा शहर, नम आंखों से दी विदाई निधन के बाद मंत्री सुदिव्य कुमार ‘सोनू’ के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए गिरिडीह शहर के विभिन्न प्रमुख चौक-चौराहों और मार्गों से गुजारा गया। उनके पार्थिव शरीर के शहर से गुजरने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग प्रमुख रास्तों और सड़क किनारे जुटने लगे। शहरवासियों ने हाथ जोड़कर अपने जनप्रतिनिधि को श्रद्धांजलि दी और नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इस दौरान समर्थकों के साथ आम लोगों की आंखें भी नम नजर आईं। लोगों ने उनके असमय निधन को गिरिडीह के लिए बड़ी क्षति बताते हुए कहा कि सुदिव्य कुमार ‘सोनू’ का जाना शहर और यहां के लोगों के लिए एक गहरा सदमा है। छात्र आंदोलनों के दौरान सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बने थे अहम कड़ी हाल के दिनों में झारखंड लोकसेवा आयोग ( जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर हुए छात्र आंदोलनों के दौरान भी श्री सुदिव्य कुमार की सक्रिय भूमिका देखने को मिली थी। परीक्षाओं को लेकर नाराज छात्रों के आंदोलन के बीच उन्होंने सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच संवाद की अहम कड़ी के रूप में भूमिका निभाई थी। छात्रों से बातचीत के दौरान उन्होंने सरकार का पक्ष उनके सामने रखा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार तथा अनियमितताओं की जांच से जुड़े मुद्दों पर जानकारी दी थी। आंदोलन के बीच उनकी यह भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि एक तरफ छात्र अपनी मांगों को लेकर सरकार से जवाब चाहते थे, वहीं दूसरी तरफ सरकार की ओर से उनसे संवाद बनाए रखने की जरूरत थी। ऐसे समय में सुदिव्य कुमार ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी चिंताओं और सरकार के रुख के बीच संवाद कायम करने की कोशिश की थी।