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पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) ने पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पर गंभीर आरोप लगाए और कथित साक्ष्य पेश करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ( भाजपा) के इशारे पर पुलिस ने उनकी पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को घरों से उठाकर हिरासत में लिया ताकि मतदान प्रभावित किया जा सके। बाहरी लोगों की गिरफ्तारी का दावा बताया गलत श्री किशोर ने रविवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पटना एसएसपी की ओर से एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर दावा किया गया कि चुनाव के दौरान केवल बाहरी लोगों को हिरासत में लिया गया, ताकि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित हो सके। उन्होंने इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि जिन लोगों को गिरफ्तार या डिटेन किया गया, उनमें अधिकांश पटना के स्थायी निवासी हैं। उन्होंने 18 स्थानीय लोगों की सूची भी जारी की और कहा कि सभी वर्षों से उसी क्षेत्र में रह रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर कोई व्यक्ति अपने घर में सो रहा है तो वह बाहरी कैसे हो गया। पुलिस बताए कि रात में घर के अंदर सोया हुआ व्यक्ति आखिर किस कानून का उल्लंघन कर रहा था।" रात में घरों में घुसकर लोगों को उठाया गया पीके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आधी रात को लोगों के घरों में दबिश दी। उन्होंने कहा कि कई जगह दरवाजे तोड़ने जैसी स्थिति बनाई गई और परिवार के सदस्यों के सामने लोगों को जबरन उठाकर ले जाया गया। उनका आरोप था कि धारा-144 के उल्लंघन का कोई सवाल ही नहीं था, क्योंकि अधिकतर लोग अपने घरों में मौजूद थे। जन सुराज के 54 लोगों को पकड़ा, भाजपा के कितने श्री किशोर ने सवाल उठाया कि यदि पुलिस निष्पक्ष थी तो कार्रवाई एकतरफा क्यों हुई। उन्होंने कहा, "जन सुराज के 54 लोगों को गिरफ्तार या डिटेन किया गया। मैं सिर्फ इतना जानना चाहता हूं कि भाजपा के कितने लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया? अगर जवाब शून्य है तो फिर पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।" भाजपा कार्यकर्ताओं ने घरों में घुसकर दबाव बनाया पीके ने आरोप लगाया कि कई इलाकों में भाजपा से जुड़े लोग पुलिस के साथ पहुंचे और जन सुराज समर्थकों के घरों में दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि वार्ड-22 जैसे इलाके में भाजपा कार्यकर्ता घरों तक पहुंच गए और जब वह खुद मौके पर पहुंचे तो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वहां से चले गए। नीट छात्रा मामले का भी किया जिक्र श्री किशोर ने पटना एसएसपी पर व्यक्तिगत हमला करते हुए कहा कि यही अधिकारी पहले भी चर्चित मामलों में विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि नीट छात्रा की मौत के मामले में भी एसएसपी ने जल्दबाजी में आत्महत्या का दावा किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पुलिस निष्पक्ष थी तो चुनाव के दौरान महिलाओं के घरों में पुलिस क्यों भेजी गई। स्थानीय लोगों ने सुनाई पूरी कहानी संवाददाता सम्मेलन में कई ऐसे लोग भी मौजूद थे जिन्होंने दावा किया कि उन्हें बिना किसी कारण के हिरासत में लिया गया। 'रात में दरवाजा पीटा, फिर उठा ले गए' मंदिरी वार्ड-26 निवासी नवल किशोर गुप्ता ने बताया कि देर रात उनके घर का दरवाजा जोर-जोर से पीटा गया। उन्होंने कहा कि जब दरवाजा खोला तो भारी पुलिस बल मौजूद था। पुलिस उन्हें बिना कोई नोटिस या कारण बताए अपने साथ ले गई। उन्हें कई घंटे तक अलग-अलग जगह घुमाया गया और फिर राजीव नगर थाने में बैठा दिया गया। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मतदान का अधिकार छीने जाने की बात कही तब शाम करीब पांच बजे उन्हें बूथ ले जाकर वोट डलवाया गया और उसके बाद छोड़ा गया। 'मेरे घर में घुस आई पुलिस' वार्ड-22 की निवासी निभा भूषण ने आरोप लगाया कि वह केवल अपने परिवार के लोगों को मतदान के लिए प्रेरित कर रही थीं। घर लौटने पर उन्होंने देखा कि कुछ लोग उनके घर के बाहर मौजूद थे और बाद में पुलिस भी घर में दाखिल हो गई। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें स्थानीय होने का प्रमाण देने की बात कही गई। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक बताया। 'तीन बार मुझे पकड़ने आई पुलिस' वार्ड-38 निवासी सुनील चंद्रवंशी ने दावा किया कि चुनाव के दिन पुलिस तीन अलग-अलग बार उन्हें पकड़ने पहुंची। उन्होंने बताया कि पहले उन्हें दो घंटे तक पुलिस वाहन में घुमाया गया, फिर थाने ले जाया गया और बाद में छोड़ दिया गया। कुछ देर बाद फिर पुलिस उनके घर पहुंच गई। सम्राट चौधरी पर भी साधा निशाना श्री किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी हमला बोला और कहा कि मौजूदा सरकार में प्रशासन का खुलकर राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा, "श्री नीतीश कुमार के 20 वर्षों के शासन में हमने कभी चुनाव जिताने के लिए पुलिस और प्रशासन का ऐसा दुरुपयोग नहीं देखा।" 'मतगणना के दिन एसएसपी नहीं रहेंगे' पीके ने दावा किया कि उनकी शिकायत के बाद निर्वाचन आयोग ने उन्हें आश्वस्त किया है कि मतगणना के दौरान पटना के एसएसपी की ड्यूटी नहीं रहेगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि आयोग ने यह निर्णय किस आदेश के तहत लिया है। उन्होंने कहा कि आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया है।



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