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पटना। बिहार में महिलाओं के लिए अलग विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा, जहां कुलपति, प्रोफेसर, अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थी, सभी महिलाएं होंगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना के बापू सभागार में ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ अभियान की शुरुआत करते हुए यह घोषणा की। हालांकि विश्वविद्यालय कहां बनेगा, कब शुरू होगा और प्रवेश की प्रक्रिया क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी नहीं दी गई है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पांच लाख महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए 600 करोड़ रुपये भेजे गए। इसके साथ ही जीविका निधि से 10 हजार महिलाओं को ऋण वितरित किया गया। शिक्षा से रोजगार तक, महिलाओं के लिए घोषणाओं का पिटारा सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम की थीम ‘विकसित भारत-समृद्ध बिहार’ और ‘बहनों का सम्मान, सरकार की पहचान’ रखी गई थी। रक्षाबंधन से पहले आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रगति के बिना बिहार का विकास संभव नहीं है। महिला विश्वविद्यालय में ‘टॉप टू बॉटम’ महिला नेतृत्व प्रस्तावित महिला विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत इसका संपूर्ण महिला प्रबंधन होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, कुलपति से लेकर प्रोफेसर और कर्मचारियों तक हर पद पर महिलाएं होंगी तथा इसमें केवल छात्राएं पढ़ेंगी। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं को सुरक्षित वातावरण में उच्च शिक्षा के साथ अध्यापन, अनुसंधान और प्रशासनिक रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा, “जब महिलाएं समृद्ध होंगी, तभी बिहार समृद्ध होगा और भारत विकसित बनेगा।” पांच लाख महिलाओं को मिले 600 करोड़ रुपये मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पांच लाख लाभार्थियों के खातों में 600 करोड़ रुपये भेजे गए। इस तरह औसतन प्रति लाभार्थी 12 हजार रुपये की राशि बैठती है, हालांकि अलग-अलग लाभार्थियों को मिली राशि का विस्तृत योजना-वार ब्योरा विज्ञप्ति में नहीं दिया गया है। जीविका निधि के माध्यम से 10 हजार लाभार्थियों को ऋण भी वितरित किया गया। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें कारोबार और स्वरोजगार से जोड़ना है। एक करोड़ रोजगार, एक करोड़ ‘लखपति दीदी’ का लक्ष्य श्री चौधरी ने राज्य की एक करोड़ महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और एक करोड़ को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा। पशुपालन, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को महिला रोजगार का प्रमुख आधार बनाया जाएगा। सरकार के अनुसार, बिहार में अब तक करीब 50 लाख जीविका दीदियां ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। ‘पशु सखी’ अभियान के तहत लगभग 25 लाख महिलाएं पशुपालन, बकरी पालन और गाय पालन से जुड़ी हैं। 31 मार्च तक 10 लाख घरों पर सोलर पैनल राज्य सरकार ने 31 मार्च तक 10 लाख जीविका दीदियों के घरों पर सौर पैनल लगाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए पात्र परिवारों की पहचान की जाएगी। योजना का उद्देश्य परिवारों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और बिजली पर होने वाला खर्च घटाकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना है। 7376 महिलाओं का सरकारी नर्स के रूप में चयन बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा के जरिए 7376 महिलाओं का सरकारी नर्स के रूप में चयन किया गया है। मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए इसे सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। सरकार बिहार को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए भी अभियान शुरू करेगी। इसके तहत नवंबर तक एक करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच और जरूरत के मुताबिक मुफ्त दवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पीएचडी करने वाली एक हजार महिलाओं को हर महीने 10 हजार रुपये उच्च शिक्षा और शोध में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए सरकार एक हजार महिलाओं को पीएचडी की पढ़ाई के दौरान प्रतिमाह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बिहार में फिलहाल करीब 4,600 शोधार्थी पीएचडी कर रहे हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या लगभग 600 है। नई सहायता का उद्देश्य इस अंतर को कम करना है। बिहार में 40 हजार महिला पुलिसकर्मी महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्कूल, कॉलेज, कार्यालय तथा जीविका समूहों के आसपास ‘पुलिस दीदी’ तैनात करने की व्यवस्था की गई है। महिला पुलिसकर्मियों को मोटरसाइकिल भी दी गई हैं, ताकि वे शिकायत मिलने पर तुरंत मौके पर पहुंच सकें। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बिहार में करीब 40 हजार महिला पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जो देश में सर्वाधिक संख्या है। 125 यूनिट मुफ्त बिजली, 23 हजार करोड़ की सब्सिडी श्री चौधरी ने कहा कि राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दी जा रही है। बिजली उपभोक्ताओं को कुल मिलाकर करीब 23 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने महिलाओं को नशामुक्ति अभियान से जोड़ने की घोषणा भी की। पूरे बिहार में नुक्कड़ नाटक और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा। ब्रह्माकुमारी और मद्य निषेध विभाग के बीच समझौता नशामुक्ति और सामाजिक जागरूकता के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय तथा मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री ने ‘समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार’ अभियान और ‘लखपति दीदी’ से संबंधित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया। 112 ग्रामीण हाट से मिलेगा स्थानीय उत्पादों को बाजार ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ के तहत 112 ग्रामीण हाटों के निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। इन हाटों के जरिए ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को स्थानीय बाजार और बिक्री का बेहतर मंच देने की योजना है। इससे जीविका समूहों, कारीगरों, पशुपालकों और छोटे उद्यमों से जुड़ी महिलाओं की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। ‘सहयोग’ पोर्टल पर 30 दिन में समाधान का दावा मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सहयोग’ कार्यक्रम के माध्यम से लोगों की समस्याओं का 30 दिनों के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। गांव, क्षेत्र या जीविका से संबंधित समस्या के लिए पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है। अधिकारियों को निर्धारित समय के भीतर शिकायतों का निपटारा करने का निर्देश दिया गया है। जीविका से जुड़ीं 1.81 करोड़ महिलाएं राज्य सरकार के अनुसार, स्वयं सहायता समूहों से एक करोड़ 81 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं और बिहार की अर्थव्यवस्था में जीविका दीदियों का योगदान लगभग 1.46 लाख करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री ने जीविका को मजबूत बनाने का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देते हुए कहा कि महिलाओं के आत्मविश्वास और मेहनत ने परिवारों के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी है। 2030 तक महिलाओं पर 20 हजार करोड़ खर्च करने का लक्ष्य श्री चौधरी ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और स्वास्थ्य सशक्तीकरण के लिए बिहार सरकार वर्ष 2030 तक 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार ने डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, मॉडल स्कूल विकसित करने, मेडिकल एवं इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने और ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने की बात भी कही है।



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