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मुंबई। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बेहतर तिमाही नतीजों से बीते सप्ताह शेयर बाजार में आधी फीसदी से अधिक की मजबूती देखने को मिली लेकिन अब अगले सप्ताह निवेशकों की नजर जुलाई के खुदरा और थोक महंगाई आंकड़ों के साथ अमेरिका के श्रम बाजार और महंगाई से जुड़े संकेतों पर रहेगी। वीकेंड पर सेंसेक्स 404 अंक चढ़ा, निफ्टी में 187 अंकों की तेजी बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 404.53 अंक यानी 0.51 फीसदी की बढ़त के साथ शुक्रवार को 78,499.17 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 187.05 अंक यानी 0.8 फीसदी मजबूत होकर 24,570.65 अंक पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा जोश बाजार की तेजी केवल दिग्गज शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। बीएसई मिडकैप 221.5 अंक यानी 1.3 फीसदी चढ़कर 17,240.08 अंक पर पहुंच गया, जबकि स्मॉलकैप 181.09 अंक यानी 2.6 फीसदी की तेज बढ़त के साथ 7,240.15 अंक पर बंद हुआ। यानी बीते सप्ताह छोटे शेयरों ने दिग्गज सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। नए सीएएस सिस्टम से शुरुआत में हिचकोले, बाद में लौटी स्थिरता सप्ताह की शुरुआत नए एफएंडओ क्लोजिंग ऑक्शन सेशन यानी सीएएस की वजह से उतार-चढ़ाव के साथ हुई। हालांकि निवेशकों के नई व्यवस्था के साथ तालमेल बैठाने के बाद बाजार में स्थिरता लौट आई। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट ने बाजार को और सहारा दिया, क्योंकि इससे महंगाई का दबाव कम होने और व्यापक आर्थिक स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद बढ़ी। कच्चा तेल सस्ता, डॉलर और बॉन्ड यील्ड भी नरम वैश्विक स्तर पर अमेरिका के श्रम बाजार से मिले कमजोर संकेतों ने निकट भविष्य में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना को कम किया। इसके चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी आई। वहीं, सुरक्षित निवेश की मांग बने रहने से सोने की कीमतों को भी समर्थन मिला। आरबीआई के रुख से भी बाजार को मिला भरोसा घरेलू स्तर पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत रुख ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। आरबीआई ने आर्थिक वृद्धि के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी की है, जबकि महंगाई का अनुमान कुछ कम किया है। इससे बाजार को यह संकेत मिला कि विकास और महंगाई के बीच संतुलन को लेकर केंद्रीय बैंक का नजरिया फिलहाल सकारात्मक है। कंपनियों के नतीजों ने बढ़ाई खरीदारी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे भी मोटे तौर पर उम्मीद से बेहतर रहे। इसी वजह से बाजार में व्यापक खरीदारी देखने को मिली। स्मॉलकैप शेयरों को मजबूत नतीजों और चुनिंदा कंपनियों से जुड़े सकारात्मक संकेतों का फायदा मिला, जबकि बेहतर बुनियादी स्थिति के कारण पीएसयू बैंक सेक्टर में सबसे मजबूत बढ़त दर्ज की गई। मेटल और ऑटो शेयरों में भी चमक बेहतर विकास अनुमान और मजबूत घरेलू मांग से मेटल शेयरों को समर्थन मिला। वहीं, त्योहारी सीजन में अच्छी मांग की उम्मीद से ऑटोमोबाइल शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। अब जुलाई की महंगाई पर टिकी नजर अगले सप्ताह घरेलू बाजार के लिए सबसे अहम ट्रिगर जुलाई 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई और थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई के आंकड़े होंगे। इन आंकड़ों से यह संकेत मिलेगा कि देश में कीमतों का दबाव किस दिशा में जा रहा है और आगे आरबीआई के नीतिगत फैसलों के लिए कितना गुंजाइश बन सकती है। अगले सप्ताह खुदरा महंगाई के आंकड़े 12 अगस्त और थोक महंगाई के आंकड़े 14 अगस्त को जारी होने की उम्मीद है। अमेरिका के आंकड़े भी होंगे अहम निवेशक अमेरिका के श्रम बाजार और महंगाई के आंकड़ों पर भी करीब से नजर रखेंगे। इनसे फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिलेंगे। इसके अलावा घरेलू स्तर पर कर्ज वृद्धि के रुझान भी महत्वपूर्ण रहेंगे, क्योंकि वे अर्थव्यवस्था में मांग, निवेश और विकास की रफ्तार का अंदाजा देने में मदद करेंगे। बाजार के लिए अगला सप्ताह क्यों अहम? बीता सप्ताह राहत और खरीददारी का रहा लेकिन अब बाजार की असली परीक्षा महंगाई के आंकड़े करेंगे। अगर घरेलू महंगाई उम्मीद से नरम रहती है और अमेरिका से भी कमजोर महंगाई तथा रोजगार संकेत मिलते हैं, तो बाजार को और समर्थन मिल सकता है। वहीं, इसके उलट आंकड़े ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा सकते हैं।