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कटिहार। बिहार में कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड के बारसोई-आबादपुर मुख्य मार्ग से सटे एकशाला पंचायत के नौरोल गांव में वर्षों से हरियाली की पहचान बने ‘छोटे वन’ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का मामला सामने आया है, जहां ग्रामीणों का दावा है कि पिछले करीब एक सप्ताह में लगभग एक हजार पेड़ काटे जा चुके हैं वहीं वन विभाग ने साफ किया है कि कटाई की अनुमति नहीं दी गई थी। करीब 3500 पेड़ों वाला बगीचा, एक सप्ताह में हजार पेड़ कटने का दावा नौरोल गांव का यह बागीचा लंबे समय से इलाके में हरियाली के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता रहा है। स्थानीय लोग इसे बारसोई का ‘छोटा वन’ कहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पूरे बगीचे में करीब 3500 पेड़ होने का अनुमान है और पिछले एक सप्ताह में इनमें से लगभग एक हजार पेड़ काटे जा चुके हैं । लगातार हो रही कटाई को लेकर गांव में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ रही है। जगह-जगह बिखरे कटे तने और लकड़ियां मौके पर बागीचे के भीतर जगह-जगह पेड़ों के मोटे कटे हुए तने और लकड़ियां बिखरी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई पुराने और हरे पेड़ों को भी काट दिया गया है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते कटाई पूरी तरह नहीं रोकी गई तो बागीचे में बड़ी संख्या में और पेड़ों पर आरी चल सकती है। ग्रामीणों का दावा: पहले ही दी थी वन विभाग को सूचना स्थानीय लोगों के अनुसार, पेड़ों की कटाई की जानकारी वन विभाग के सब-बीट ऑफिसर संतोष कुमार को पहले ही दी गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि सूचना देने पर उन्हें बताया गया था कि पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई है और निजी जमीन पर लगे पेड़ों को काटे जाने से नहीं रोका जा सकता। ग्रामीणों के मुताबिक इसके बाद भी कटाई जारी रही और देखते ही देखते एक सप्ताह के अंदर बड़ी संख्या में पेड़ काट दिए गए। मामला बढ़ा तो प्रशासन और पुलिस पहुंची मौके पर पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद बढ़ने के बाद अंचल पदाधिकारी श्याम सुंदर साहा , वन विभाग की पदाधिकारी वैष्णवी कुमारी और बारसोई पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और पेड़ों की कटाई से जुड़े जरूरी दस्तावेज दिखाने को कहा। बताया गया कि मौके पर मौजूद कर्मी आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सके।दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने के बाद पुलिस ने हरे पेड़ों की कटाई में इस्तेमाल हो रहे एक उपकरण को जब्त कर लिया। इसके साथ ही तत्काल पेड़ों की कटाई रोकने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों के मौके पर पहुंचते ही वहां मौजूद कुछ लोगों के भागने की बात भी सामने आई है। वन विभाग का बड़ा बयान: आवेदन था, अनुमति नहीं मामले में सबसे अहम बयान वन विभाग की पदाधिकारी वैष्णवी कुमारी का सामने आया है। उन्होंने बताया कि भू-स्वामी की ओर से पेड़ों की कटाई के लिए आवेदन जरूर दिया गया था लेकिन विभाग की ओर से पेड़ काटने की अनुमति नहीं दी गई थी। वन विभाग के इस बयान के बाद पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो गए हैं। अगर अनुमति नहीं थी तो इतने पेड़ कैसे कटे ग्रामीणों का सवाल है कि यदि वन विभाग को पहले से पेड़ों की कटाई की जानकारी थी और अनुमति भी नहीं दी गई थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यह भी सवाल उठ रहा है कि कटाई से जुड़े दस्तावेजों की जांच पहले क्यों नहीं की गई और कथित तौर पर इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई लगातार कैसे होती रही। विधायक संगीता देवी ने पर्यावरण मंत्री से की शिकायत मामले ने अब राजनीतिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है। स्थानीय विधायक संगीता देवी ने पर्यावरण मंत्री से मुलाकात कर बारसोई क्षेत्र में हो रही कथित अवैध पेड़ कटाई से उन्हें अवगत कराया है। विधायक ने इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। अनुमंडल पदाधिकारी बोले-जांच के बाद होगी कानूनी कार्रवाई इधर बारसोई के अनुमंडल पदाधिकारी राजू कुमार ने कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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