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नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने ई20 पेट्रोल में नमी और क्लोराइड मिलने की रिपोर्टों के बाद पूरी सप्लाई चेन की जांच कर ईंधन को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बताया लेकिन कहा कि पेट्रोल पंपों से लिए गए 160 नमूनों में से दो में क्लोराइड की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने शुक्रवार को संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ई20 ईंधन की गुणवत्ता को लेकर अपना पक्ष रखा। ई20 में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। तेल कंपनियों ने कहा- ईंधन दूषित होने की पुष्टि नहीं तीनों तेल कंपनियों के मुताबिक, ई20 ईंधन में नमी और क्लोराइड पाए जाने से जुड़ी रिपोर्टों के बाद पूरी आपूर्ति श्रृंखला की जांच की गई। कंपनियों का दावा है कि व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से किए गए परीक्षणों में ईंधन के दूषित होने की पुष्टि नहीं हुई और इसकी गुणवत्ता लगातार निर्धारित मानकों के भीतर बनी हुई है। कंपनियों ने कहा कि जांच के नतीजों ने ईंधन की गुणवत्ता को लेकर उनके मौजूदा दावे की फिर पुष्टि की है। 160 नमूनों में से 2 में तय सीमा से ज्यादा क्लोराइड हालांकि तेल कंपनियों ने अपनी विज्ञप्ति में यह भी स्वीकार किया कि पेट्रोल पंपों से लिए गए 160 नमूनों में से दो में क्लोराइड का स्तर तय मानकों से अधिक पाया गया। कंपनियों ने इन दोनों मामलों को अलग-थलग मामले बताया है। इन केंद्रों पर ईंधन की आपूर्ति तत्काल रोक दी गई और क्लोराइड का स्तर ज्यादा होने के कारण का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की गई। कंपनियों के अनुसार, जरूरी सुधारात्मक उपाय लागू किए जाने के बाद ही दोनों केंद्रों पर ईंधन की आपूर्ति दोबारा शुरू की गई। 90 हजार पेट्रोल पंपों पर बढ़ाई निगरानी ई20 की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बाद तेल विपणन कंपनियों ने अपनी निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का दावा किया है। कंपनियों के मुताबिक, देशभर में मौजूद करीब 90 हजार पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन 8 से 12 बार जल-प्रवेश और घनत्व परीक्षण किए जा रहे हैं यानी पेट्रोल पंपों पर ईंधन में पानी की मौजूदगी और उसके घनत्व पर दिन में कई बार नजर रखी जा रही है। मोबाइल लैब भी मैदान में, नतीजों का स्वतंत्र सत्यापन सिर्फ पेट्रोल पंपों पर जांच तक ही व्यवस्था सीमित नहीं रखी गई है। तेल कंपनियों ने विभिन्न स्थानों पर मोबाइल ईंधन गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं भी तैनात की हैं। इसके अलावा जांच के नतीजों का स्वतंत्र रूप से ईंधन प्रयोगशालाओं से सत्यापन भी कराया जा रहा है। कंपनियों का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ईंधन की गुणवत्ता को लेकर उच्च स्तर का भरोसा सुनिश्चित करना है। रिफाइनरी से पेट्रोल पंप तक जांच, क्लोराइड की सीमा 0-3 पीपीएम विज्ञप्ति के मुताबिक, रिफाइनरी से मिलने वाले पेट्रोल, डिस्टिलरी से मिलने वाले शुद्ध एथेनॉल और विपणन नेटवर्क के माध्यम से वितरित किए जाने वाले ई20 ईंधन के नमूनों की भी जांच की गई। कंपनियों के अनुसार, इन नमूनों में क्लोराइड की मात्रा निर्धारित शून्य से तीन पीपीएम की सीमा के भीतर पाई गई। हालांकि पेट्रोल पंपों से लिए गए 160 नमूनों में दो अपवाद मिले, जिन पर अलग से कार्रवाई की गई। आखिर क्लोराइड को लेकर क्यों उठे सवाल? ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर नमी और क्लोराइड से संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद ईंधन के दूषित होने को लेकर सवाल उठे थे। इन्हीं चिंताओं के बाद इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला में जांच और निगरानी बढ़ाई। कंपनियों का कहना है कि व्यापक जांच में ऐसा कोई आधार नहीं मिला जिससे पूरे ई20 ईंधन की गुणवत्ता को मानकों से बाहर माना जाए। उपभोक्ताओं से अपील- निश्चिंत होकर इस्तेमाल करें ई20 पेट्रोल तीनों सरकारी तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं से ई20 पेट्रोल का इस्तेमाल जारी रखने की अपील की और कहा कि उपभोक्ता निश्चिंत होकर ई20 पेट्रोल का उपयोग जारी रख सकते हैं , क्योंकि उपलब्ध कराया जा रहा ईंधन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है।