Full Story

पटना। बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए हुए चुनाव में सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए, जिससे मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और 10 में से 9 सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने जीत दर्ज की। निर्वाचन आयोग ने बुधवार को औपचारिक घोषणा करते हुए सभी उम्मीदवारों को विजयी घोषित कर दिया। इस चुनाव में एनडीए ने 10 में से 9 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि एक सीट राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के खाते में गई। इस बार निर्वाचित हुए 10 सदस्यों में से आठ पहली बार विधान परिषद पहुंचे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संजय प्रकाश मयूख और राजद के सुनील कुमार सिंह ही ऐसे नेता हैं, जो दोबारा विधान परिषद सदस्य बने हैं। कौन-कौन बने विधान परिषद सदस्य जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की ओर से स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद निर्वाचित हुए हैं। भाजपा के टिकट पर भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह, संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित ने जीत दर्ज की है। वहीं, एनडीए की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा-रामविलास) के अशरफ अंसारी भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। दूसरी ओर राजद की ओर से सुनील कुमार सिंह उच्च सदन पहुंचे हैं। पवन सिंह की एंट्री बनी चर्चा का विषय इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता और गायक पवन सिंह की रही। उनके विधान परिषद पहुंचने से राजनीति और मनोरंजन जगत दोनों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मंत्री दीपक प्रकाश के भविष्य पर बढ़ी अटकलें विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद पंचायती राज मंत्री एवं राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एनडीए ने उन्हें इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद उनके मंत्री पद को लेकर सवाल उठने लगे हैं। संवैधानिक नियमों के मुताबिक कोई भी मंत्री यदि विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है। ऐसा नहीं होने पर उसे मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि तय समय सीमा के भीतर दीपक प्रकाश किसी अन्य रास्ते से विधानमंडल की सदस्यता हासिल नहीं कर पाते हैं तो उनके मंत्री पद पर संकट गहरा सकता है। क्यों कराए गए थे ये चुनाव विधान परिषद के कई सदस्यों का कार्यकाल 28 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इनमें संजय मयूख, गुलाम गौस, कुमुद वर्मा, भीष्म साहनी, मोहम्मद फारूक, सुनील कुमार सिंह और समीर कुमार सिंह शामिल हैं। इनके अलावा सम्राट चौधरी और भगवान सिंह के विधानसभा सदस्य बनने से दो सीटें खाली हुई थीं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उनकी विधान परिषद सीट रिक्त हो गई थी। इन्हीं रिक्तियों को भरने के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई थी।