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एम. ए. खान पटना: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी संजीव हंस समेत सात आरोपितों के खिलाफ भ्रष्टाचार और सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में विशेष अदालत में आज आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष अदालत में पेश किया गया आरोप पत्र विशेष निगरानी इकाई ने निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता ( बीएनएस ) और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोप पत्र दायर किया है। चार्जशीट में किन-किन लोगों के नाम विशेष लोक अभियोजक आनंदी सिंह ने बताया कि आईएएस संजीव हंस , पवन कुमार , ठेकेदार रिशुश्री , भवन निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास , वित्त विभाग के संयुक्त सचिव मुमुक्षु चौधरी , आवास विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह और संतोष कुमार को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने आरोप पत्र में संजीव हंस और पवन कुमार को फरार भी बताया है। ऐसे में अब अदालत इन दोनों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकती है। क्या है पूरा मामला विशेष निगरानी इकाई बिहार सरकार के विभिन्न विभागों में ठेकेदारी और टेंडर आवंटन में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही थी। आरोप है कि सरकारी ठेकों को प्रभावित करने और लाभ पहुंचाने के लिए नियमों की अनदेखी की गई तथा टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं। इन्हीं आरोपों के आधार पर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान कई अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों से पूछताछ की गई। इसके बाद जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अब अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। जेल में बंद आरोपियों की जमानत पर सुनवाई मामले में आरोपी बनाए गए भवन निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता तारिणी दास और ठेकेदार रिशुश्री फिलहाल जेल में हैं। दोनों की ओर से नियमित जमानत याचिका दायर की गई है। वहीं, आईएएस अधिकारी संजीव हंस ने गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। अदालत ने सभी लंबित जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 08 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।



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