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नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से एक-दूसरे के लिए बाजार खोलने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने और पेशेवर डिग्रियों को आपसी मान्यता देने की अपील करते हुए कहा कि आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए व्यापार और नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाना जरूरी है। श्री गोयल ने शुक्रवार को भारत मंडपम् में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई है। उन्होंने बाजार तक बेहतर पहुंच और आपूर्ति के स्रोतों में विविधता को सहयोग बढ़ाने के लिए अहम बताया। बाजार खुलेंगे तभी मजबूत होंगी आपूर्ति श्रृंखलाएं केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स के आपसी व्यापार में भारत को एक अनिवार्य स्तंभ बताते हुए इंजीनियरिंग उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा क्षेत्र का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत इन उत्पादों सहित दूसरे क्षेत्रों के लिए भी ब्रिक्स को एक महत्वपूर्ण बाजार मानता है।उन्होंने सदस्य और साझेदार देशों से एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजार खोलने की अपील की। इसमें कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता भी शामिल है। उन्होंने जोर दिया कि आपूर्ति श्रृंखलाएं तभी मजबूत होंगी, जब वे दोतरफा होंगी। इसके लिए बाजार पहुंच बढ़ाने के साथ नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल करना भी जरूरी है। पेशेवरों की आवाजाही आसान हो, डिग्रियों को मिले मान्यता श्री गोयल ने सेवा क्षेत्र को एक-दूसरे के लिए खोलने और सीमा पार पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने ब्रिक्स देशों से एक-दूसरे की पेशेवर डिग्रियों को मान्यता देने पर भी जोर दिया। कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और कृषि प्रौद्योगिकी से जुड़े स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने की अपील करते हुए गोयल ने उम्मीद जताई कि फोरम से व्यापार और आर्थिक साझेदारी मजबूत करने के लिए ठोस सुझाव सामने आएंगे। बदलती दुनिया में ब्रिक्स की भूमिका अहम: जयशंकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान समूह की सदस्यता, एजेंडा और सहयोग के तरीकों में काफी विस्तार और बदलाव हुआ है। उन्होंने शिखर सम्मेलन की थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े बदलावों के बीच ये प्राथमिकताएं खास महत्व रखती हैं। उन्होंने कहा कि अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता वैश्विक व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं बन गई हैं। भू-राजनीतिक संघर्ष, महामारी, जलवायु संबंधी चुनौतियां, डिजिटलीकरण और तकनीकी प्रगति आर्थिक परिदृश्य को बदल रहे हैं। एआई से सेमीकंडक्टर तक साझेदारी का अवसर वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस फोरम सदस्य देशों की ताकत को ठोस व्यावसायिक नतीजों में बदलने का अवसर देता है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई में प्रौद्योगिकी के अधिक आदान-प्रदान और सहयोग पर जोर दिया। भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का उल्लेख करते हुए उन्होंने इस क्षेत्र के पूरे पारितंत्र को विकसित करने के लिए साझेदारी का आह्वान किया। छोटे उद्यमों को मिले किफायती पूंजी का सहारा वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ब्रिक्स को एक महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ता बाजार बताया। उन्होंने सदस्य देशों के बीच बढ़ते व्यापार का उल्लेख करते हुए व्यापार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर जोर दिया और कहा कि ब्रिक्स एक अहम और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। सदस्य देशों के बीच व्यापार 2003 में 84 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 1.2 लाख करोड़ डॉलर हो गया है। श्री अग्रवाल ने बहुस्तरीय व्यापार तंत्र को बनाए रखने और उसे मजबूत करने पर जोर देने के साथ किफायती कार्यशील पूंजी के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने की बात कही। उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की जरूरत भी बताई। उद्घाटन सत्र को रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने भी संबोधित किया।