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पटना। बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के पटना, नवादा, औरंगाबाद, मधुबनी और सीवन जिले में पांच नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है, जिससे छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलने के साथ उच्चतर शिक्षा में नामांकन दर बढ़ने की उम्मीद है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। किन विश्वविद्यालयों को मिली मंजूरी कैबिनेट ने पांच निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन को स्वीकृति दी है— 1. शांजा विश्वविद्यालय, मधुबनी दिल्ली ट्रस्ट द्वारा मधुबनी जिले में शांजा विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। यह विश्वविद्यालय मिथिला क्षेत्र के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का नया विकल्प बनेगा। 2. वीवी गिरि विश्वविद्यालय, दरौंधा (सीवान) अम्बेदकर इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा सीवान जिले के दरौंधा में वीवी गिरि विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। इससे सारण प्रमंडल और आसपास के छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। 3. एस.ए. विश्वविद्यालय, नवादा एस.ए. फाउंडेशन ट्रस्ट को नवादा के अशोक नगर क्षेत्र में एस.ए. विश्वविद्यालय स्थापित करने की अनुमति दी गई है। मगध क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए यह संस्थान महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। 4. हिमालय विश्वविद्यालय, पालीगंज (पटना) हिमालय एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा पटना के पालीगंज में हिमालय विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। राजधानी क्षेत्र के विद्यार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। 5. सीतयोग विश्वविद्यालय, औरंगाबाद सीतयोग एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी को औरंगाबाद जिले में सीतयोग विश्वविद्यालय स्थापित करने की मंजूरी मिली है। इससे दक्षिण बिहार के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। छात्रों को घर के पास मिलेगी उच्च शिक्षा बिहार के हजारों छात्र हर साल उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। नए विश्वविद्यालयों के खुलने से छात्रों को अपने जिले या आसपास के क्षेत्रों में ही स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर की पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि नए विश्वविद्यालयों के आने से शिक्षा के लिए होने वाले पलायन में भी कमी आ सकती है। इससे छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा। शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे विश्वविद्यालयों की स्थापना केवल शिक्षा तक सीमित नहीं होती। इनके निर्माण और संचालन से शिक्षकों, शोधकर्ताओं, प्रशासनिक कर्मियों तथा अन्य कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है। शैक्षणिक परिसरों के विकास से पुस्तकालय, छात्रावास, परिवहन, खान-पान और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ेगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। सकल नामांकन अनुपात बढ़ाने पर सरकार का जोर सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि संभव होगी। वर्तमान समय में उच्च शिक्षा तक अधिक से अधिक युवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।



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