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पटना। बिहार में दंगा, सांप्रदायिक तनाव, हिंसक प्रदर्शन और भीड़ नियंत्रण जैसी आपात स्थितियों से त्वरित एवं प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों में विशेष जिला एंटी राइट फोर्स (डीएआरएफ) के गठन का आदेश जारी किया है, जिसके तहत 49 कंपनियां गठित की जाएंगी और सूचना मिलने के 20 मिनट के भीतर बल को घटनास्थल के लिए रवाना किया जाएगा। हर जिले में बनेगा जि ला एंटी राइट फोर्स पुलिस मुख्यालय के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत सभी जिलों में विशेष दंगा निरोधी दस्ता गठित किया जाएगा। यह बल दंगा, सांप्रदायिक तनाव, हिंसक प्रदर्शन, सड़क जाम, सरकारी संपत्ति पर हमले और भीड़ नियंत्रण जैसी संवेदनशील परिस्थितियों से प्रभावी तरीके से निपटेगा। जिला और अनुमंडल स्तर पर इस विशेष बल की तैनाती रहेगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। एक महीने की विशेष ट्रेनिंग, फिर हर तीन महीने रिफ्रेशर कोर्स डीएआरएफ में शामिल पुलिसकर्मियों को प्रत्येक जिले के पुलिस केंद्र में एक महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।प्रशिक्षण के लिए चयनित पुलिस निरीक्षक, सार्जेंट मेजर, पुलिस अवर निरीक्षक (सार्जेंट) और सहायक अवर निरीक्षक को पहले मेरठ स्थित रैपिड एक्शन फोर्स एकेडमी फॉर पब्लिक ऑर्डर (आरएपीओ) में ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) कराई जाएगी। इसके बाद यही प्रशिक्षक अपने-अपने जिलों में विशेष दस्ते के जवानों को प्रशिक्षित करेंगे। साथ ही हर तीन महीने पर एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स भी आयोजित किया जाएगा। दस्ते में महिला पुलिसकर्मी से लेकर मेडिकल टीम तक होगी शामिल विशेष दंगा निरोधी दस्ता केवल लाठीधारी पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी, महिला पुलिसकर्मी, अश्रुगैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चिकित्सा एवं एंबुलेंस सहायता दल, वीडियोग्राफी टीम, वायरलेस ऑपरेटर और रिजर्व बल भी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य किसी भी स्थिति से पेशेवर और व्यवस्थित तरीके से निपटना है। हर कंपनी में तीन प्लाटून, एक प्लाटून में 47 जवान प्रत्येक कंपनी में तीन प्लाटून होंगे। हर प्लाटून में 47 प्रशिक्षित कर्मी तैनात रहेंगे, जिनमें अश्रुगैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक और वायरलेस ऑपरेटर शामिल होंगे। हर प्लाटून को एक बस और एक ट्रक , यानी कुल दो वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्य में बनेंगी 49 कंपनियां, मिलेंगे 294 वाहन पुलिस मुख्यालय ने जिलों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटते हुए कुल 49 कंपनियों के गठन का फैसला लिया है। इन कंपनियों के संचालन के लिए राज्यभर में 294 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। पटना को सबसे ज्यादा बल, कई जिलों को दो-दो कंपनियां श्रेणी-ए में राजधानी पटना को सबसे अधिक तीन कंपनियां और 18 वाहन मिलेंगे। इसके अलावा गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), पश्चिमी चंपारण (बेतिया), दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और बेगूसराय को दो-दो कंपनियां और 12-12 वाहन दिए जाएंगे। 22 जिलों को एक-एक कंपनी, छह जिलों को एक-एक प्लाटून श्रेणी-बी में नालंदा, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, वैशाली, सीतामढ़ी, सीवान, गोपालगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज, बांका, मुंगेर, जमुई और खगड़िया को एक-एक कंपनी और छह-छह वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, श्रेणी-सी में अरवल, शिवहर, बगहा, लखीसराय, शेखपुरा और नवगछिया को एक-एक प्लाटून और दो-दो वाहन मिलेंगे। 20 मिनट में रवाना होगा दस्ता नई व्यवस्था के तहत जैसे ही किसी जिले में दंगा या हिंसक स्थिति की सूचना जिला नियंत्रण कक्ष को मिलेगी, तत्काल अलर्ट जारी किया जाएगा। निर्देश के अनुसार 20 मिनट के भीतर विशेष दंगा निरोधी दस्ता घटनास्थल के लिए रवाना होगा और वहां पहुंचकर वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए स्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इस नई व्यवस्था से संवेदनशील परिस्थितियों में पुलिस की प्रतिक्रिया पहले से अधिक तेज और प्रभावी होगी। विशेष प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधनों और स्पष्ट संचालन व्यवस्था के साथ जिला एंटी राइट फोर्स राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।



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