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वॉशिंगटन। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के पिछले दो दिनों में एक अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से दो बार निशाना बनाने की कथित कोशिश के जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने मंगलवार को ओमान की खाड़ी और खार्ग द्वीप के पास पांच ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट कर दिया। https://www.centcom.mil/MEDIA/PUBLIC-RELEASES/Article/4593050/us-destroys-5-irgc-tankers-after-iran-targets-another-american-warship/ ओमान की खाड़ी में चार, खार्ग द्वीप के पास एक टैंकर निशाने पर सेंटकॉम ने बयान जारी कर बताया कि अमेरिकी बलों ने एम/टी काविज, एम/टी चारमीनार, एम/टी होराइजन-1 और एम/टी रिस्को को ओमान की खाड़ी में निशाना बनाया। इसके अलावा एम/टी डेर्या को खार्ग द्वीप के पास निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि हमला करने से पहले जहाजों के चालक दल को उन्हें खाली करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद पांचों टैंकरों पर कार्रवाई कर उन्हें संचालन के लायक नहीं रहने दिया गया। दो दिनों में दो बार अमेरिकी युद्धपोत पर हमले की कोशिश सेंटकॉम का दावा है कि आईआरजीसी ने पिछले दो दिनों के दौरान एक अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से दो बार निशाना बनाने की कोशिश की। लेकिन, युद्धपोत दोनों हमलों से सफलतापूर्वक बच गया और इसके बाद भी क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गश्त करता रहा। इन हमलों में किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी के घायल या मारे जाने की सूचना नहीं है। अमेरिका का दावा-आईआरजीसी के ‘शैडो नेटवर्क’ का हिस्सा थे टैंकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने आरोप लगाया है कि जिन तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया, उनका इस्तेमाल ऐसे अरबों डॉलर के ‘शैडो नेटवर्क’ के हिस्से के रूप में किया जा रहा था, जिससे आईआरजीसी और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को धन मिलता है। सेंटकॉम ने यह दावा भी किया कि ईरान के पास इन जहाजों की रक्षा करने का कोई साधन नहीं है। तीन दिन पहले भी तीन तेल टैंकरों पर हुआ था हमला ताजा कार्रवाई से पहले 05 सितंबर को भी अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को नष्ट करने की जानकारी दी थी। सेंटकॉम के मुताबिक उस समय आईआरजीसी ने एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यानी विमानवाहक पोत और एक गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर यानी निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पर हमला करने की कोशिश की थी। अमेरिकी सेना का दावा है कि अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों के खिलाफ आईआरजीसी की सभी कोशिशें नाकाम रही हैं। तीन दिनों में आठ ईरानी तेल टैंकर निशाने पर 05 सितंबर की कार्रवाई में तीन और 08 सितंबर की कार्रवाई में पांच टैंकरों को मिलाया जाए तो अमेरिकी सेना ने महज तीन दिनों में कुल आठ ईरानी कच्चे तेल के टैंकरों को निशाना बनाया है। इससे अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव में तेल टैंकर एक नए और बेहद संवेदनशील मोर्चे के रूप में सामने आए हैं। खार्ग द्वीप क्यों है महत्वपूर्ण? गौरतलब है कि खार्ग द्वीप ईरान के तेल ढांचे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ईरानी कच्चे तेल के निर्यात में इस इलाके की अहम भूमिका रही है। ऐसे में खार्ग द्वीप के आसपास किसी तेल टैंकर पर सैन्य कार्रवाई का महत्व केवल एक जहाज को निशाना बनाए जाने तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसका संबंध ईरान के ऊर्जा कारोबार और तेल परिवहन से भी जुड़ जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी टिकी दुनिया की नजर ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत भी बढ़ जाती है। यह खाड़ी क्षेत्र के तेल और ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल टैंकरों और दूसरे वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ सकती है। यही वजह है कि अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री टकराव को वैश्विक ऊर्जा बाजार के नजरिये से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सैन्य टकराव के साथ तेल कारोबार भी बना अहम मोर्चा ताजा घटनाक्रम में खास बात यह है कि सैन्य युद्धपोतों को निशाना बनाने के कथित प्रयासों के जवाब में अमेरिका ने सीधे कच्चे तेल के टैंकरों पर कार्रवाई की है। अमेरिका इन जहाजों को आईआरजीसी की आर्थिक ताकत से जोड़ रहा है। ऐसे में मौजूदा संघर्ष में सैन्य और आर्थिक दोनों पहलू एक-दूसरे से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका का दावा-हर ईरानी कोशिश नाकाम सेंटकॉम का कहना है कि अमेरिकी नौसैनिक युद्धपोतों के खिलाफ आईआरजीसी की ओर से किए गए सभी प्रयास अब तक विफल रहे हैं। ताजा मामले में भी अमेरिका का दावा है कि बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से उसका युद्धपोत सुरक्षित बच गया और उसने क्षेत्रीय जलक्षेत्र में अपनी गश्त जारी रखी।